क्या सीएम योगी की नीतियों से थारू जनजाति को मिल रही नई पहचान?
सारांश
Key Takeaways
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संकल्प: 2029 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था।
- थारू जनजाति के लिए 350 से ज्यादा समूह बनाना।
- सरकार से 1.50 लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता।
- ओडीओपी योजना ने 3 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार दिया।
- स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग।
लखनऊ, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश को 2029 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। इसके लिए वह इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपोर्ट, उद्योग, एमएसएमई, हस्तशिल्प, और हथकरघा सभी को साथ लेकर चल रहे हैं। उनका मानना है कि विकास की दौड़ में कोई भी पीछे न छूटे। मुख्यमंत्री का ध्यान हाशिए पर रहे जनजाति समुदाय पर भी है। उत्तर प्रदेश के जनपदों में निवास कर रही जनजातियों को बाजार से जोड़कर आर्थिक उन्नयन किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उत्तर प्रदेश में जनजातियों के सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान है। थारू जनजाति के लिए लगभग 350 से ज्यादा समूह गठित किए गए हैं। इसके माध्यम से जनजातियों को व्यापार और उद्योग के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। सरकार जनजातियों को छोटे व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए लगभग 1.50 लाख रुपए की वित्तीय मदद दे रही है, जिससे वे छोटे उद्योग स्थापित कर सकेंगे, जो उनकी आजीविका के लिए सहायक होगा।
उत्तर प्रदेश में थारू जनजाति गोरखपुर, महराजगंज, बलरामपुर, बहराइच, लखीमपुर खीरी, और पीलीभीत में निवास करती है। यह जनजाति काष्ठशिल्प और बांस से जुड़े उत्पादों को बनाने में कुशल होती है। लखीमपुर खीरी के पलिया ब्लॉक में फॉरेस्ट एंड डेवलपमेंट रिलेटेड वैल्यू चेन कंपनी थारू जनजाति के हस्तशिल्प उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग कर रही है, जिससे जनजाति समुदाय में आर्थिक विकास के लिए आत्मविश्वास बढ़ा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी योजना एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) ने उत्तर प्रदेश के वंचित और पिछड़े समूहों के आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ओडीओपी ने 2018 में अपनी लॉन्चिंग से लेकर अब तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर 3 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया है। ओडीओपी की देन है कि 2016-17 में यूपी का निर्यात लगभग 80,000 करोड़ था जो बढ़कर 1.56 लाख करोड़ के पार चला गया है। इसका लाभ जनजाति समुदाय को भी मिल रहा है।
जनजाति समुदाय अपने परंपरागत उत्पादों के ब्रांडिंग, बिक्री और निर्माण के लिए सरकार से ऋण प्राप्त कर रहे हैं। उनके उत्पाद मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और डिजिटल मार्केटिंग के जरिए विश्व के बाजारों तक पहुंच रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार एक करोड़ के निवेश से लगभग 8 लोगों को रोजगार मिलता है। लघु और सूक्ष्म उद्योगों ने ग्रामीण स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया है, जिससे उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था तेजी के साथ आगे बढ़ रही है।
उत्तर प्रदेश ऐसा राज्य है, जहां सबसे ज्यादा एमएसएमई इकाइयां हैं। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के प्रयासों का नतीजा है कि 96 लाख से ज्यादा लघु और मध्यम उद्योग इकाइयां यहां नागरिकों को रोजगार उपलब्ध करवा रही हैं। 27,000 से अधिक ग्रामीण और अर्ध-शहरी फैक्ट्रियों का संचालन और 11 प्राथमिकता क्षेत्रों में 19 जिलों के 6 रोजगार जोन का गठन से आर्थिक गतिविधियों को बल मिल रहा है। ये सब मिलकर यूपी की अर्थव्यवस्था के लिए एक ‘इकोसिस्टम ट्रांसफॉर्मेशन’ जैसा बदलाव साबित हो रहे हैं।
इस मॉडल में स्थानीय उत्पाद को सिर्फ बनाया नहीं जाता, बल्कि पैकेजिंग, ब्रांडिंग, ग्लोबल सप्लाई चेन जोड़ने और ई-मार्केटिंग तक हर स्तर पर तैयार किया जाता है। यही कारण है कि कभी सीमांत समझे जाने वाले क्षेत्र अब अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंच बना रहे हैं। योगी सरकार एमएसएमई से जुड़ी इकाइयों के लिए लोन की भी व्यवस्था कर रही है। पहले की सरकारों में ऐसी व्यवस्था नहीं थी, 2017 के बाद योगी सरकार ने युवाओं को उद्यमी बनाने के लिए एक व्यापक योजना पर काम किया। इसी का परिणाम है कि जनजाति समुदाय आज गर्व और सम्मान से जीवनयापन कर रहा है।