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क्या त्रिपुरा से दिल्ली तक पैदल मार्च कर रहे हैं तिप्रासा समुदाय के लोग?

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क्या त्रिपुरा से दिल्ली तक पैदल मार्च कर रहे हैं तिप्रासा समुदाय के लोग?

सारांश

त्रिपुरा के तिप्रासा समुदाय के नेता डेविड मुरासिंह ने दिल्ली के जंतर-मंतर तक पैदल मार्च की शुरुआत की है। उनका यह कदम केंद्र सरकार की अनदेखी वादों के खिलाफ है। जानिए इस मार्च के पीछे की कहानी और तिप्रासा समुदाय की मांगें।

मुख्य बातें

तिप्रासा समुदाय की मांगें अनदेखी नहीं की जा सकतीं।
अवैध प्रवास से आदिवासी अधिकारों पर खतरा है।
मार्च का उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित करना है।
समुदाय की एकजुटता संस्कृति की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
केंद्र सरकार को समझौते को लागू करना चाहिए।

अगरतला, 25 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। त्रिपुरा के तिप्रासा समुदाय के नेता और टिपरा मोथा पार्टी के कार्यकर्ता डेविड मुरासिंह ने केंद्र सरकार की द्वारा वादों को पूरा न करने के खिलाफ त्रिपुरा से दिल्ली के जंतर-मंतर तक पैदल मार्च की शुरुआत की है। इस मार्च में तिप्रासा समुदाय के 16-17 लोग भी शामिल हैं।

डेविड मुरासिंह ने बताया कि वे साउथ बीसी मोनो के जनरल चेयरमैन थे, लेकिन इस कार्यक्रम के लिए उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस मार्च में समय-समय पर कई लोग शामिल हो रहे हैं और समुदाय का समर्थन भी मिल रहा है।

डेविड मुरासिंह ने राष्ट्र प्रेस के साथ बातचीत में कहा, "यह मार्च मेरा निजी उद्देश्य नहीं है, बल्कि तिप्रासा समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांगों की ओर ध्यान दिलाना है। हमारी तीन मुख्य मांगें हैं: पहला, 'ग्रेटर तिपरालैंड' की स्थापना; दूसरा, तिपरासा समझौते को लागू करना; और तीसरा, त्रिपुरा और पूरे पूर्वोत्तर में अवैध प्रवास पर रोक लगाना।"

उन्होंने बताया कि 2 मार्च 2024 को केंद्र सरकार, त्रिपुरा सरकार और तिपरा मोथा के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते को छह महीने में लागू करना था, लेकिन 18 महीने बीत जाने के बावजूद इसे लागू नहीं किया गया है। तिप्रासा समुदाय का कहना है कि केंद्र सरकार ने उनके हितों की अनदेखी की है।

अवैध प्रवास के कारण त्रिपुरा के आदिवासी समुदाय को अपनी जमीन, रोजगार और राजनीतिक अधिकारों में नुकसान हो रहा है।

डेविड मुरासिंह ने कहा, "अवैध प्रवास न केवल त्रिपुरा, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर और भारत के लिए एक बड़ी समस्या है। हम दिल्ली में जंतर-मंतर पर धरना देंगे और पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन करेंगे ताकि हमारी मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर सुना जाए।"

इस मार्च का उद्देश्य केंद्र सरकार का ध्यान तिप्रासा समुदाय की मांगों की ओर खींचना है, जिसमें ग्रेटर तिपरालैंड, समझौते का कार्यान्वयन और अवैध प्रवास पर रोक शामिल है। यह मार्च त्रिपुरा की आदिवासी संस्कृति, पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुटता का प्रतीक माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। सरकार को इन मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए ताकि समुदाय की समस्याओं का समाधान हो सके।
RashtraPress
9 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तिप्रासा समुदाय की मुख्य मांगें क्या हैं?
तिप्रासा समुदाय की मुख्य मांगें हैं: ग्रेटर तिपरालैंड की स्थापना, तिपरासा समझौते का कार्यान्वयन, और अवैध प्रवास पर रोक लगाना।
मार्च का उद्देश्य क्या है?
इस मार्च का उद्देश्य केंद्र सरकार का ध्यान तिप्रासा समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांगों की ओर खींचना है।
कब तक यह मार्च चलेगा?
यह मार्च तब तक चलेगा जब तक तिप्रासा समुदाय की मांगों को मान्यता नहीं दी जाती।
राष्ट्र प्रेस
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