क्या टीएमसी विधायक मनोरंजन बापरी ने भाजपा-सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं की सराहना की?

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क्या टीएमसी विधायक मनोरंजन बापरी ने भाजपा-सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं की सराहना की?

सारांश

टीएमसी विधायक मनोरंजन बापरी ने भाजपा और सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं की सराहना की। क्या यह बंगाल की सियासत में एक नए अध्याय की शुरुआत है? जानिए उनके अनुभव और इस पर राजनीतिक जानकारों की राय।

Key Takeaways

  • राजनीतिक विचारधाराएं भिन्न हो सकती हैं, लेकिन सम्मान महत्वपूर्ण है।
  • शिष्टाचार का पालन करना सभी नेताओं के लिए आवश्यक है।
  • मनोरंजन बापरी का अनुभव सकारात्मक राजनीति का उदाहरण है।

कोलकाता, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक मनोरंजन बापरी के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने पश्चिम बंगाल की सियासत में हलचल मचा दी है। इस पोस्ट में उन्होंने भाजपा और सीपीआई(एम) दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं की विनम्रता और दरियादिली की तारीफ की।

हुगली जिले के बालागढ़ से टीएमसी विधायक बापरी ने सोमवार सुबह यह पोस्ट साझा किया। इसमें उन्होंने दो निजी अनुभवों का उल्लेख किया, जिनमें से एक भाजपा के कार्यकर्ता से जुड़ा था और दूसरा सीपीआई(एम) के युवा कार्यकर्ता से, यह बताने के लिए कि शिष्टाचार और उदारता जैसे मूल्य राजनीतिक विचारधाराओं से ऊपर होते हैं, यहां तक कि विरोधी पार्टियों के बीच भी।

बापरी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में जिस पहली घटना का उल्लेख किया, वह कुछ साल पहले की है, जब वह सेंट्रल कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की एक पार्टी मीटिंग से लौट रहे थे।

वापस आते समय, डंकुनी टोल प्लाजा पर भाजपा कार्यकर्ताओं के विरोध-प्रदर्शन के कारण उनकी गाड़ी रोक दी गई। बापरी ने अपनी पोस्ट में कहा, “मेरे असिस्टेंट पार्थ ने मुझसे गाड़ी से बाहर न निकलने को कहा। मैंने उनकी बात नहीं मानी। मैं गाड़ी से बाहर निकला और भाजपा समर्थकों से उनके विरोध का कारण पूछा। उन्होंने मुझे पहचान लिया। बहुत ही नरमी से उन्होंने मुझसे माफी मांगी और मुझे आगे बढ़ने को कहा। मैं उनका कट्टर विरोधी हूं। इसके बावजूद, विपक्षी पार्टी के कट्टर कार्यकर्ताओं से सम्मान मिलना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात थी।”

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे समय में जब अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के बीच झड़पें आम बात हो गई हैं, वे बिना किसी सुरक्षा के पूरे राज्य में घूमते हैं और कभी-कभी तो पब्लिक गाड़ियों में भी सफर करते हैं। मुझ पर कभी किसी ने हमला नहीं किया। मुझे नहीं लगता कि कोई कभी ऐसा करेगा। मैंने पूरी जिंदगी लोगों का प्यार कमाया है।

दूसरी घटना जो उन्होंने बताई, वह रविवार की है, जब वह कोलकाता इंटरनेशनल बुक फेयर से पब्लिक गाड़ी से लौट रहे थे। यह समझते हुए कि हाल ही में घुटने की सर्जरी की वजह से मुझे खड़े होने में दिक्कत हो रही है, गाड़ी में बैठे तीन बात कर रहे युवाओं में से एक ने मेरे लिए अपनी सीट खाली कर दी। शर्मिंदा होकर मैंने मना कर दिया। फिर उनमें से एक ने मुझसे कहा कि उसने मुझे पहचान लिया है। उसने यह भी कहा कि, एक पक्के सीपीआई(एम) युवा कार्यकर्ता होने के नाते, वह और उसके दो दोस्त अक्सर मेरे अलग-अलग सोशल मीडिया पोस्ट पर मेरे साथ राजनीतिक चर्चा करते हैं। इसके बाद उनके साथ काफी देर तक बातचीत हुई। मैं उनकी कुछ बातों से सहमत हुआ, और वे भी मेरी कुछ बातों से सहमत हुए। जिस बात ने मुझे सबसे ज्यादा हैरान किया, वह यह थी कि यह जानते हुए भी कि मैं तृणमूल कांग्रेस का विधायक हूं, उन्होंने मुझे बहुत इज्जत दी और मेरी तारीफ भी की।

उन्होंने आगे दावा किया कि हालांकि उन्हें नहीं पता कि एक विधायक के तौर पर वह कितने सफल रहे, लेकिन उनकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धि वह सम्मान है जो उन्हें आम लोगों से मिला, चाहे उनकी राजनीतिक विचारधारा कुछ भी रही हो।

राजनीतिक जानकारों का मानना ​​है कि पश्चिम बंगाल में अलग-अलग राजनीतिक विचारों वाले नेताओं के बीच आपसी दोस्ती कोई नई बात नहीं है। पश्चिम बंगाल के दो दिग्गज मुख्यमंत्रियों - स्वर्गीय सिद्धार्थ शंकर रॉय और स्वर्गीय ज्योति बसु - की दोस्ती और एक-दूसरे के प्रति सम्मान सभी को पता था।

शहर के एक राजनीतिक जानकार ने कहा कि इसी तरह, पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री एलके आडवाणी और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के बीच भी आपसी सम्मान था और दोनों में एक कॉमन बात यह थी कि दोनों आधुनिक साहित्य के जानकार थे। इसी तरह, भट्टाचार्य और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, डॉ मनमोहन सिंह भी एक-दूसरे की तारीफ करते थे।

Point of View

यह स्पष्ट है कि राजनीति में सम्मान और शिष्टाचार की आवश्यकता है। मनोरंजन बापरी का उदाहरण हमें बताता है कि राजनीतिक विचारधाराएं भले ही भिन्न हों, लेकिन इंसानियत और आपसी सम्मान की भावना हमेशा महत्वपूर्ण होती है।
NationPress
11/02/2026

Frequently Asked Questions

मनोरंजन बापरी ने भाजपा और सीपीआई(एम) की तारीफ क्यों की?
उन्होंने अपने अनुभव साझा किए हैं कि शिष्टाचार और उदारता राजनीतिक विचारधाराओं से ऊपर होते हैं।
क्या यह घटना बंगाल की सियासत में बदलाव का संकेत है?
यह घटना एक नई राजनीतिक सोच का संकेत हो सकती है, जहां सम्मान और बातचीत को प्राथमिकता दी जाती है।
बापरी के अनुभव से हमें क्या सीखने को मिलता है?
हमें यह सीख मिलती है कि विरोधियों के प्रति भी सम्मान और शिष्टाचार की भावना रखनी चाहिए।
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