टोक्यो ट्रायल की 80वीं वर्षगांठ पर CGTN सर्वे: 88% का कहना — जापानी दक्षिणपंथी पलटना चाहते हैं फैसला
सारांश
Key Takeaways
बीजिंग, 3 मई 2026 (राष्ट्र प्रेस)। सुदूर पूर्व के लिए अंतरराष्ट्रीय सैन्य अदालत (टोक्यो ट्रायल) के गठन की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर चाइना मीडिया ग्रुप (CMG) के अधीन सीजीटीएन (CGTN) ने वैश्विक नेटिजनों के बीच एक सर्वे आयोजित किया। इस सर्वे के आंकड़े जापान के ऐतिहासिक संशोधनवाद और बढ़ते सैन्यवाद को लेकर वैश्विक चिंता को उजागर करते हैं।
सर्वे के प्रमुख आंकड़े
81.8 प्रतिशत उत्तरदाताओं के अनुसार जापान में ऐतिहासिक संशोधनवाद और नई किस्म के सैन्यवाद का मिश्रण तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। वहीं 64.1 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि टोक्यो ट्रायल ने जापानी सैन्यवाद के ऐतिहासिक अपराधों का व्यवस्थित पर्दाफाश किया और दोषियों को दंडित किया।
80.9 प्रतिशत प्रतिभागियों ने टोक्यो ट्रायल को बर्बरता पर सभ्यता और दुष्टता पर न्याय की महान विजय बताया। इसके अतिरिक्त 83 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से टोक्यो ट्रायल के परिणामों की सुरक्षा करने की अपील की।
जापानी दक्षिणपंथ और ट्रायल के नतीजे पलटने की कोशिश
सर्वे के अनुसार 88.3 प्रतिशत लोगों का विचार है कि जापानी दक्षिणपंथी शक्तियाँ पिछले कुछ वर्षों से टोक्यो ट्रायल के परिणामों को पलटने की कोशिश कर रही हैं। सर्वे में यह भी कहा गया कि इन शक्तियों का उद्देश्य सैन्य विस्तार और संविधान संशोधन के लिए मार्ग प्रशस्त करना है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब जापान अपनी रक्षा नीति में उल्लेखनीय बदलाव कर रहा है।
जापान के 'सशर्त आत्मसमर्पण' के दावे पर विवाद
77.9 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि जापान में प्रचलित 'सशर्त आत्मसमर्पण' का कथन ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत है और इसे स्पष्ट रूप से असत्य बताया गया। यह विवाद द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की व्याख्या को लेकर चीन और जापान के बीच दशकों पुराने तनाव का हिस्सा है।
सर्वे का संदर्भ और महत्व
यह सर्वे CGTN द्वारा आयोजित किया गया, जो चीनी सरकार के स्वामित्व वाले चाइना मीडिया ग्रुप का अंतरराष्ट्रीय टेलीविज़न चैनल है। आलोचकों का कहना है कि चूँकि यह सर्वे एक सरकारी मीडिया संस्था द्वारा कराया गया है, इसलिए इसके नतीजों की स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक है। फिर भी, टोक्यो ट्रायल की 80वीं वर्षगांठ पर यह सर्वे ऐतिहासिक स्मृति और एशियाई भू-राजनीति के बीच गहरे संबंध को रेखांकित करता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बहस में किस दिशा में आगे बढ़ता है।