31 अक्टूबर 2026
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कारवार: कोल्ड स्टोरेज सफाई के दौरान जहरीली गैस से 2 ओडिशा मछुआरों की मौत, एक गंभीर

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कारवार: कोल्ड स्टोरेज सफाई के दौरान जहरीली गैस से 2 ओडिशा मछुआरों की मौत, एक गंभीर

सारांश

तीन दिनों में पाँचवीं मौत — कर्नाटक के कारवार में मुदागा हार्बर पर कोल्ड स्टोरेज सफाई के दौरान जहरीली गैस से दो और ओडिशा मछुआरों की जान गई। तदादी बंदरगाह की त्रासदी के ठीक बाद यह हादसा तटीय मछुआरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गहरे सवाल उठाता है।

मुख्य बातें

31 अक्टूबर 2026 को कर्नाटक के कारवार जिले के मुदागा फिशिंग हार्बर पर कोल्ड स्टोरेज सफाई के दौरान जहरीली गैस से 2 मछुआरों की मौत हुई।
मृतकों में ओडिशा निवासी पुरंदर बिसारा (21) और आकाश नाइक (24) शामिल हैं।
41 वर्षीय लालिंदर ध्रुवा गंभीर रूप से घायल, कारवार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में उपचाराधीन।
यह हादसा तदादी बंदरगाह पर हुई इसी तरह की घटना के तीन दिन बाद हुआ, जिसमें 3 मछुआरों की जान गई थी।
दोनों घटनाओं में 'चमन' मछली से निकली जहरीली गैसें ज़िम्मेदार बताई जा रही हैं।
तीन दिनों में कर्नाटक में मछुआरों की कुल 5 मौतें , सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सवाल।

कर्नाटक के कारवार जिले के मुदागा फिशिंग हार्बर में 31 अक्टूबर 2026 को एक मछली पकड़ने वाली नाव के कोल्ड स्टोरेज कंपार्टमेंट की सफाई के दौरान कथित तौर पर जहरीली गैसों की चपेट में आने से ओडिशा के दो मछुआरों की मौत हो गई। एक तीसरे मछुआरे की हालत गंभीर बनी हुई है, जबकि दो अन्य को सुरक्षित बचा लिया गया।

घटनाक्रम: कैसे हुई दुर्घटना

यह दुखद घटना बेलेकेरी में पंजीकृत 'मूकाम्बिका' नामक मछली पकड़ने वाली नाव पर हुई। नाव चमन मछली पकड़कर मुदागा बंदरगाह लौटी थी। बंदरगाह पर पहुँचने के बाद मछुआरों ने पकड़ी गई मछलियाँ स्टोरेज कंपार्टमेंट से बाहर निकालीं और कोल्ड स्टोरेज यूनिट की सफाई शुरू की।

सफाई के दौरान कंपार्टमेंट के अंदर से जहरीली गैसें और तीव्र दुर्गंध निकलने लगी, जिससे अंदर मौजूद मछुआरों का दम घुटने लगा। अधिकारियों के अनुसार, ओडिशा निवासी 21 वर्षीय पुरंदर बिसारा और 24 वर्षीय आकाश नाइक उस जहरीले माहौल में फंस गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

घायल मछुआरे का उपचार जारी

एक अन्य मछुआरे 41 वर्षीय लालिंदर ध्रुवा को भी जहरीली गैसों का सामना करना पड़ा और वे गंभीर रूप से प्रभावित हुए। उन्हें तुरंत कारवार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनका आपातकालीन उपचार जारी है। घटना में शामिल शेष दो मछुआरों को सुरक्षित बचा लिया गया।

तीन दिन में दूसरी ऐसी त्रासदी

यह घटना इसलिए और भी गंभीर है क्योंकि ठीक तीन दिन पहले कारवार जिले के कुमटा तालुक स्थित तदादी बंदरगाह पर भी इसी तरह की एक दुर्घटना हुई थी। उस घटना में तीन मछुआरों की जान चली गई थी।

तदादी में मंगलवार शाम सफाई के दौरान नाव के अंदर सड़ी हुई मछलियों से निकली जहरीली गैसों ने तीन मछुआरों का दम घोंट दिया। मृतकों में कागल गाँव के नौशाद अली राजा (35), ओन्हाली के अमन अयूब लंगाडू और उंचाली के अमीर अब्दुल शामिल थे। ये तीनों 'खुजैना' नामक पर्स सीन नाव पर सवार थे, जो कुमटा तालुक के वनहाली निवासी कासिम की है।

गोकर्ण पुलिस के अनुसार, वे गोवा की तरफ गए थे, जहाँ उन्होंने बड़ी मात्रा में चमन मछली पकड़ी। गौरतलब है कि यह मछली 24 घंटे के भीतर खराब हो जाती है, और तदादी बंदरगाह पहुँचने में एक दिन की देरी हो जाने के कारण तब तक सभी मछलियाँ सड़ चुकी थीं।

सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

महज तीन दिनों में पाँच मछुआरों की मौत ने कर्नाटक के तटीय मछली पकड़ने के बंदरगाहों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्टोरेज कंपार्टमेंट की सफाई के दौरान उचित वेंटिलेशन उपकरणों और सुरक्षा प्रशिक्षण का अभाव इन हादसों की मुख्य वजह है।

यह ऐसे समय में आया है जब तटीय क्षेत्रों में मछुआरों की कार्यस्थल सुरक्षा को लेकर पहले से ही चिंताएँ जताई जा रही थीं। अधिकारियों से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप और जाँच की माँग की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उनसे जुड़े खतरे नए नहीं हैं, फिर भी न बंदरगाहों पर पर्याप्त वेंटिलेशन उपकरण हैं, न मछुआरों को सुरक्षा प्रशिक्षण। ये मजदूर अक्सर अन्य राज्यों से आए प्रवासी हैं, जो सबसे कम संरक्षित श्रमिकों में गिने जाते हैं। सवाल यह है कि क्या इन मौतों के बाद राज्य के मत्स्य पालन और श्रम विभाग तत्काल सुरक्षा ऑडिट का आदेश देंगे, या यह घटना भी सांख्यिकीय दुर्घटना बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कारवार मुदागा हार्बर हादसे में क्या हुआ?
31 अक्टूबर 2026 को कर्नाटक के कारवार जिले के मुदागा फिशिंग हार्बर पर 'मूकाम्बिका' नामक नाव के कोल्ड स्टोरेज कंपार्टमेंट की सफाई के दौरान जहरीली गैसें निकलीं, जिससे ओडिशा के दो मछुआरों की मौत हो गई और एक गंभीर रूप से घायल हो गया।
मृत मछुआरों की पहचान क्या है?
मृतकों में ओडिशा निवासी 21 वर्षीय पुरंदर बिसारा और 24 वर्षीय आकाश नाइक शामिल हैं। 41 वर्षीय लालिंदर ध्रुवा गंभीर रूप से प्रभावित हुए और उन्हें कारवार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
चमन मछली इतनी खतरनाक क्यों मानी जाती है?
चमन मछली लगभग 24 घंटे में सड़ने लगती है और सड़ने पर जहरीली गैसें छोड़ती है। बंद कोल्ड स्टोरेज कंपार्टमेंट में यह गैस जमा होकर ऑक्सीजन को विस्थापित कर देती है, जिससे अंदर काम करने वाले मछुआरों का दम घुटने का खतरा बन जाता है।
कर्नाटक में इससे पहले भी ऐसी घटना हुई थी?
हाँ, इसी घटना से तीन दिन पहले कारवार जिले के कुमटा तालुक स्थित तदादी बंदरगाह पर भी ऐसी ही दुर्घटना हुई थी, जिसमें नौशाद अली राजा, अमन अयूब लंगाडू और अमीर अब्दुल की मौत हो गई थी। तीन दिनों में कर्नाटक के तटीय जिलों में यह पाँचवीं मौत है।
इन हादसों से मछुआरों की सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा?
इन लगातार घटनाओं ने मछली पकड़ने के बंदरगाहों पर कोल्ड स्टोरेज सफाई के दौरान पर्याप्त वेंटिलेशन उपकरण और सुरक्षा प्रशिक्षण की माँग को तेज कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रवासी मछुआरों को सुरक्षा प्रोटोकॉल की जानकारी न होना इन दुर्घटनाओं की प्रमुख वजह है।
राष्ट्र प्रेस
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