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आंध्र प्रदेश के 7 लापता मछुआरे 25 दिन बाद सुरक्षित काकीनाडा लौटे, इंजन खराबी से फंसे थे समुद्र में

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आंध्र प्रदेश के 7 लापता मछुआरे 25 दिन बाद सुरक्षित काकीनाडा लौटे, इंजन खराबी से फंसे थे समुद्र में

सारांश

3 अगस्त को टूना मछली पकड़ने निकले आंध्र प्रदेश के 7 मछुआरे इंजन खराबी के बाद समुद्र में बह गए और तीन दिन से अधिक बिना भोजन के जीवित रहे। 15 तटरक्षक जहाजों की तलाशी के बाद पश्चिम बंगाल के शंकरपुर तट पर मिले और 25 दिन बाद काकीनाडा सुरक्षित लौटे।

मुख्य बातें

अंबेडकर कोनासीमा जिले के 7 मछुआरे 3 अगस्त को ओडलरेवु से गहरे समुद्र में गए और लापता हो गए।
नाव के इंजन में तकनीकी खराबी के कारण मछुआरे समुद्र में फँसे; 3 दिन से अधिक बिना भोजन के रहे।
15 तटरक्षक जहाज और 4 हेलीकॉप्टर तैनात कर तलाशी अभियान चलाया गया।
बुधवार को पश्चिम बंगाल के शंकरपुर बंदरगाह के निकट स्थानीय मछुआरों ने नाव खोजी।
25 दिनों बाद शुक्रवार को सभी 7 मछुआरे सुरक्षित काकीनाडा पहुँचे।

डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनासीमा जिले के सात मछुआरे, जो 3 अगस्त को ओडलरेवु मछली उतारने के स्थान से टूना मछली पकड़ने गहरे समुद्र में निकले थे और लापता हो गए थे, 25 दिनों बाद शुक्रवार, 29 अगस्त को सुरक्षित काकीनाडा पहुँच गए। नाव के इंजन में तकनीकी खराबी के कारण वे समुद्र में फँस गए थे और पश्चिम बंगाल के तट पर शंकरपुर मछली पकड़ने के बंदरगाह के निकट स्थानीय मछुआरों ने उन्हें बुधवार दोपहर खोज निकाला।

घटनाक्रम: कैसे लापता हुए मछुआरे

मछुआरे 3 अगस्त को एक मशीनीकृत नाव पर सवार होकर ओडलरेवु से रवाना हुए। रवानगी के लगभग चार दिन बाद उनका अपने परिवारों से संपर्क पूरी तरह टूट गया। 12 अगस्त को वापसी की निर्धारित तारीख बीत जाने के बाद परिवारजनों ने अधिकारियों से संपर्क किया और खोज अभियान की माँग की।

मछुआरों ने बाद में बताया कि नाव के इंजन में तकनीकी खराबी आने के कारण वे असहाय होकर समुद्र में बहते रहे। पश्चिम बंगाल के तट तक पहुँचने से पहले वे तीन दिनों से अधिक समय तक बिना भोजन के समुद्र में जीवित रहे।

तलाशी अभियान और बचाव

मंगलवार को तलाशी अभियान को व्यापक रूप दिया गया, जिसमें 15 तटरक्षक जहाज और 4 हेलीकॉप्टर तैनात किए गए। केंद्र सरकार के सहयोग से भारतीय तटरक्षक बल (ICG), भारतीय नौसेना और संबंधित विभागों ने समन्वित प्रयास किए।

बुधवार दोपहर पश्चिम बंगाल के शंकरपुर बंदरगाह के निकट स्थानीय मछुआरों ने लापता नाव को खोज निकाला। उन्होंने फँसे हुए मछुआरों को एक मोबाइल फोन दिया, जिससे उन्होंने आंध्र प्रदेश में अपने परिवारों से संपर्क कर अपनी सुरक्षा की पुष्टि की।

मछुआरों की पहचान

लापता नाव पर सवार सातों मछुआरों की पहचान इस प्रकार की गई है: कोपानाथी रामकृष्ण, कोल्लाती येसुदासु, पालेपु सांता राव, कोल्लाती श्रीनुबाबू, कर्री रामबाबू, संगानी टाटाराव और काटादी सतीश कुमार — ये सभी डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनासीमा जिले के निवासी हैं।

स्वागत और परिवारों से मिलन

अधिकारियों ने मछुआरों को पश्चिम बंगाल से काकीनाडा वापस लाने में सहायता की। विधायक वी. कोंडाबाबू, एमएलसी राजशेखर और जिला अधिकारियों ने काकीनाडा में मछुआरों का स्वागत किया। 25 दिनों की लंबी प्रतीक्षा के बाद परिवारों से उनका मिलन भावुक क्षण रहा।

यह घटना एक बार फिर गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले मछुआरों की सुरक्षा और आपातकालीन संचार व्यवस्था की ज़रूरत को रेखांकित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह घटना गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले हजारों मछुआरों की कमज़ोर सुरक्षा व्यवस्था की ओर ध्यान दिलाती है। नाव में इंजन खराब होने के बाद 25 दिनों तक कोई आपातकालीन संचार उपकरण काम नहीं आया — यह सवाल उठाता है कि मशीनीकृत नावों पर अनिवार्य EPIRB (इमरजेंसी पोजिशन इंडिकेटिंग रेडियो बीकन) या GPS ट्रैकर की नीति कहाँ तक लागू हो रही है। तटरक्षक बल का विस्तृत अभियान सराहनीय है, पर असली सवाल यह है कि क्या मछुआरों की नावों पर अनिवार्य सुरक्षा उपकरणों की नीति को धरातल पर लागू किया जा रहा है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आंध्र प्रदेश के 7 मछुआरे कब और कहाँ से लापता हुए थे?
ये मछुआरे 3 अगस्त को ओडलरेवु मछली उतारने के स्थान से एक मशीनीकृत नाव पर सवार होकर टूना मछली पकड़ने गहरे समुद्र में गए थे। रवानगी के लगभग चार दिन बाद उनका परिवारों से संपर्क टूट गया और 12 अगस्त को वापसी की तारीख बीत जाने पर परिवारों ने अधिकारियों को सूचित किया।
मछुआरे समुद्र में क्यों फँस गए थे?
मछुआरों ने बताया कि नाव के इंजन में तकनीकी खराबी आने के कारण वे असहाय होकर समुद्र में बहते रहे। पश्चिम बंगाल के तट तक पहुँचने से पहले वे तीन दिनों से अधिक समय तक बिना भोजन के जीवित रहे।
मछुआरों को कहाँ और कैसे खोजा गया?
बुधवार दोपहर पश्चिम बंगाल के शंकरपुर मछली पकड़ने के बंदरगाह के निकट स्थानीय मछुआरों ने लापता नाव को खोज निकाला। उन्होंने फँसे मछुआरों को मोबाइल फोन दिया, जिससे उन्होंने आंध्र प्रदेश में परिवारों से संपर्क कर अपनी सुरक्षा की पुष्टि की।
बचाव अभियान में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल थीं?
केंद्र सरकार के सहयोग से भारतीय तटरक्षक बल (ICG) और भारतीय नौसेना ने समन्वित अभियान चलाया। मंगलवार को 15 तटरक्षक जहाज और 4 हेलीकॉप्टर तैनात किए गए।
लापता मछुआरों की पहचान क्या है?
सातों मछुआरे डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनासीमा जिले के निवासी हैं। उनके नाम हैं: कोपानाथी रामकृष्ण , कोल्लाती येसुदासु , पालेपु सांता राव , कोल्लाती श्रीनुबाबू , कर्री रामबाबू , संगानी टाटाराव और काटादी सतीश कुमार ।
राष्ट्र प्रेस
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