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क्या त्रिपुरा में नगर निगम के बैंक खाते से 16.38 करोड़ रुपये की निकासी हुई?

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क्या त्रिपुरा में नगर निगम के बैंक खाते से 16.38 करोड़ रुपये की निकासी हुई?

सारांश

त्रिपुरा की सरकार ने अगरतला नगर निगम के बैंक खाते से 16.38 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया है। क्या यह धोखाधड़ी के पीछे की सच्चाई को उजागर करेगा? जानें इस घटनाक्रम की पूरी कहानी और क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

मुख्य बातें

16.38 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की गई है।
क्लोन चेक का उपयोग कर धोखाधड़ी की गई।
विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है।
यूको बैंक ने राशि वापस करने पर सहमति दी है।
पुलिस ने 20,387 बैंक खातों की जानकारी प्राप्त की है।

अगरतला, 11 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। त्रिपुरा सरकार ने अगरतला नगर निगम (एएमसी) के बैंक खाते से 16.38 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की जांच के लिए चार सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि क्लोन चेक का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी की गई है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पश्चिम त्रिपुरा जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहरी) इस एसआईटी का नेतृत्व करेंगे और उन्हें पश्चिम त्रिपुरा जिले के पुलिस अधीक्षक नमित पाठक को रिपोर्ट सौंपनी होगी।

एसआईटी में अन्य सदस्यों में उप-विभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) सदर देबा प्रसाद रॉय, पश्चिम अगरतला पुलिस स्टेशन के प्रभारी निरीक्षक राणा चटर्जी और जांच अधिकारी उप-निरीक्षक रंजीत दास शामिल हैं।

यूको बैंक के जोनल मैनेजर संजीव रॉय ने पश्चिम अगरतला पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। त्रिपुरा पुलिस ने क्लोन चेक का उपयोग कर एएमसी के बैंक खाते से राशि निकालने के आरोप में अज्ञात धोखेबाजों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। उन्होंने यह शिकायत तब दर्ज कराई जब उन्हें पता चला कि पिछले हफ्ते छह क्लोन चेक के जरिए एएमसी खाते से 16.38 करोड़ रुपये निकाले गए थे।

एएमसी के मेयर और भाजपा विधायक दीपक मजूमदार ने कहा कि इस धोखाधड़ी में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी शामिल नहीं है।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि अज्ञात धोखेबाज हैदराबाद से काम कर रहे थे। उन्होंने एक पूर्व नगर निगम अधिकारी के जाली हस्ताक्षर कर बैंक से पैसे निकाल लिए, जबकि मूल चेक नगर निगम के पास ही थे।

अधिकारी ने कहा, "हमारे जांच अधिकारी ने पाया कि मूल चेक अभी भी संबंधित नगर निगम अधिकारियों के पास हैं।" उन्होंने कहा कि उन्होंने शहर के मध्य में कमान चौमुहानी स्थित यूको बैंक की मुख्य शाखा से सीसीटीवी फुटेज भी एकत्र किया है और यह पता लगाने के लिए उसका अध्ययन कर रहे हैं कि जाली चेक जमा करने के लिए बैंक में कौन आया था।

उन्होंने कहा, "यूको बैंक में क्लोन चेक जमा करने वाले लोगों की पहचान हो जाने पर, हमें इस मामले में शामिल लोगों का पता लगाने में मदद मिलेगी।"

नगर निगम के एक अधिकारी ने कहा कि उन्होंने यूको बैंक से नगर निगम के खाते में पूरे 16.38 करोड़ रुपये वापस करने का अनुरोध किया है और बैंक ने इस पर सहमति दे दी है।

उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले भी ऐसा ही एक मामला हुआ था और उस मामले में भी बैंक ने पैसे वापस कर दिए थे।

त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक अनुराग ने पिछले हफ्ते कहा था कि राज्य पुलिस ने 2021 से अब तक त्रिपुरा में 46.96 करोड़ रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले पकड़े हैं, जिसमें से अधिकारियों ने 5.2 करोड़ रुपये को होल्ड किया और पीड़ितों को 34 लाख रुपये पहले ही वापस कर दिए।

उन्होंने मीडिया को बताया कि पुलिस अगले तीन महीनों में कुछ सत्यापन और जांच के बाद शेष राशि वापस करने के लिए एक विशेष अभियान चला रही है।

डीजीपी ने कहा कि पुलिस ने त्रिपुरा में इन साइबर अपराध हमलों में शामिल 20,387 बैंक खातों का विवरण भी प्राप्त किया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह आवश्यक है कि राज्य सरकार और पुलिस उच्च स्तर की सुरक्षा सुनिश्चित करें। यह घटना न केवल स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय समस्या भी है जिसे गंभीरता से लेना होगा।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा में यह धोखाधड़ी कब हुई?
यह धोखाधड़ी पिछले हफ्ते हुई जब छह क्लोन चेक के जरिए 16.38 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की गई।
क्या इस मामले में किसी अधिकारी का हाथ है?
एएमसी के मेयर दीपक मजूमदार का कहना है कि इस धोखाधड़ी में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी शामिल नहीं है।
पुलिस ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
पुलिस ने इस संबंध में विशेष जांच दल का गठन किया है और अज्ञात धोखेबाजों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है।
राष्ट्र प्रेस
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