उधमपुर एयरपोर्ट टर्मिनल: 10 जुलाई को तकनीकी निविदा, अगस्त 2026 में मिलेगा कार्यादेश
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने 5 जुलाई 2026 को एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि उधमपुर एयरपोर्ट टर्मिनल भवन के निर्माण हेतु टेंडर पहले ही जारी किया जा चुका है और अब इस परियोजना की प्रक्रिया तेज गति से आगे बढ़ रही है। जम्मू-कश्मीर के इस रणनीतिक हवाई अड्डे पर नागरिक उड़ानें शुरू करने की दिशा में यह एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम और समयसीमा
अधिकारियों के अनुसार, 10 जुलाई 2026 को तकनीकी निविदा खोली जाएगी, जबकि 22 जुलाई 2026 को वित्तीय निविदा खोले जाने की संभावना है। इसके बाद अगस्त 2026 के दूसरे सप्ताह में टर्मिनल निर्माण का कार्यादेश जारी करने की योजना है। यह समयसीमा परियोजना में पारदर्शिता और त्वरित क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तय की गई है।
दो चरणों में होगा विकास
उधमपुर एयरपोर्ट को दो चरणों में विकसित करने की रणनीति बनाई गई है। पहले चरण में मौजूदा उधमपुर एयरफोर्स स्टेशन के परिसर में स्थित एक अस्थायी टर्मिनल से व्यावसायिक उड़ानों का संचालन शुरू किया जाएगा। अनुमान है कि अगले 6 से 7 महीनों के भीतर यहाँ से नागरिक उड़ानें प्रारंभ हो जाएंगी।
दूसरे चरण में स्थायी और विस्तृत टर्मिनल के निर्माण के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार से लगभग 28 एकड़ अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। यह भूमि मिलने के पश्चात भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) एक आधुनिक स्थायी टर्मिनल का निर्माण करेगा, जहाँ भविष्य में बड़े विमानों का संचालन भी संभव होगा। इस विस्तार योजना को अगले तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
क्षेत्र पर असर
उधमपुर एयरपोर्ट के नागरिक संचालन की घोषणा पहले ही आधिकारिक रूप से की जा चुकी है। यह परियोजना उधमपुर और आसपास के इलाकों की हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी। गौरतलब है कि उधमपुर एक महत्वपूर्ण सैन्य और प्रशासनिक केंद्र है, और नागरिक हवाई सेवाओं के शुरू होने से यहाँ पर्यटन, व्यापार और आपातकालीन परिवहन में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है।
आगे क्या होगा
निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद AAI कार्यादेश जारी करेगा और निर्माण कार्य आरंभ होगा। अस्थायी टर्मिनल से उड़ान संचालन की शुरुआत स्थानीय निवासियों को राहत देगी, जबकि स्थायी टर्मिनल के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया समानांतर रूप से जारी रहेगी। यह परियोजना जम्मू-कश्मीर में बुनियादी ढाँचे के विकास की व्यापक पहल का हिस्सा है।