27 अगस्त 2026
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उज्जैन ढाबा हिंसा: करणी सेना के दो गुटों की झड़प में दो की मौत, तीन आरोपी फरार

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उज्जैन ढाबा हिंसा: करणी सेना के दो गुटों की झड़प में दो की मौत, तीन आरोपी फरार

सारांश

उज्जैन के कनिपुरा इलाके में देर रात एक ढाबे पर करणी सेना के दो गुटों की पुरानी रंजिश घातक हिंसा में बदल गई। 12 से 15 हथियारबंद लोगों के हमले में दो लोगों की जान गई, तीन मुख्य आरोपी फरार हैं और पुलिस जाँच जारी है।

मुख्य बातें

27 अगस्त 2025 की देर रात उज्जैन के कनिपुरा स्थित लकी दरबार ढाबा पर हिंसक झड़प हुई।
राहुल दरबार उर्फ विजय प्रताप (42) और ढाबा संचालक जितेंद्र पंवार (35) की मौत हुई।
पुलिस के अनुसार, करणी सेना से जुड़े दो गुटों के बीच पुरानी रंजिश इस हिंसा की वजह बनी।
कथित तौर पर 12 से 15 हथियारबंद लोग चाकू व तलवारें लेकर मौके पर पहुँचे।
अर्पित , मोहन बाना और सोनू बंजारा फरार; शक्ति सिंह घायल होकर इलाज में।
चिमनगंज पुलिस मामले की जाँच कर रही है, सबूतों के आधार पर कार्रवाई होगी।

मध्य प्रदेश के उज्जैन में 27 अगस्त 2025 की देर रात कनिपुरा इलाके के लकी दरबार ढाबा पर हुई हिंसक झड़प में दो लोगों की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, यह टकराव करणी सेना से जुड़े दो गुटों के बीच पुरानी रंजिश के चलते भड़का, जो देखते-देखते घातक हमले में बदल गया।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस के मुताबिक, रात को ढाबे पर दो पक्षों के बीच बहस शुरू हुई। कथित तौर पर एक पक्ष ने अपने साथियों को बुलाया, जिसके बाद करीब 12 से 15 हथियारबंद लोग मौके पर पहुँचे और चाकू व तलवारों से विरोधी गुट पर हमला कर दिया।

हमले में नीमनवासा निवासी 42 वर्षीय राहुल दरबार उर्फ विजय प्रताप गंभीर रूप से घायल हुए। उन्हें एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। ढाबा संचालक 35 वर्षीय जितेंद्र पंवार का शव बाद में ढाबे से कुछ दूरी पर झाड़ियों में मिला।

घटना की पृष्ठभूमि

राहुल के मामा हेमंत सिंह चौहान ने पुलिस को बताया कि रात करीब 11 बजे राहुल के छोटे भाई को शक्ति सिंह नामक व्यक्ति का फोन आया था, जिसमें चेतावनी दी गई थी कि 'अगर हो सके तो अपने भाई को बचा लो।' इसके बाद परिवार के सदस्य ढाबे पर पहुँचे और राहुल को घायल अवस्था में पाया।

चौहान के अनुसार, राहुल और अर्पित के बीच एक बच्चे को लेकर पुराना विवाद था, जो कथित तौर पर सुलझ चुका था। उसी सिलसिले में दोनों ढाबे पर गए थे। वहाँ बहस के बाद शक्ति ने राहुल को थप्पड़ मारा और आरोप है कि राहुल ने जवाब में उसके सिर पर चम्मच से वार किया।

एक अन्य घायल श्रवण ने पुलिस को बताया कि झगड़े को शुरू में काबू में कर लिया गया था, लेकिन बाद में शक्ति ने कथित तौर पर सोनू बंजारा को फोन कर अपने कई साथियों को बुला लिया, जिसके बाद हिंसा फिर भड़क उठी।

आरोपियों की स्थिति

पुलिस ने बताया कि शक्ति सिंह भी इस झड़प में घायल हुआ है और उसका इलाज चल रहा है। वहीं अर्पित, मोहन बाना और सोनू बंजारा फिलहाल फरार हैं। पुलिस इनकी तलाश में जुटी है।

जाँच की दिशा

चिमनगंज पुलिस स्टेशन के एसएचओ विवेक कनोडिया ने कहा, 'हम घटना के सभी पहलुओं की जाँच कर रहे हैं, जिसमें मकसद और हर आरोपी की भूमिका शामिल है। सबूतों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।' चिमनगंज पुलिस पुरानी रंजिश की प्रकृति, हिंसा की तत्काल वजह और इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका की जाँच कर रही है। घायलों और मौके पर मौजूद अन्य लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब मध्य प्रदेश के कई शहरों में गुट-आधारित हिंसा की घटनाएँ कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बनती जा रही हैं। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और जाँच के नतीजे आगे की कार्रवाई तय करेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उज्जैन ढाबा हिंसा में कौन मारा गया?
इस झड़प में नीमनवासा निवासी 42 वर्षीय राहुल दरबार उर्फ विजय प्रताप और ढाबा संचालक 35 वर्षीय जितेंद्र पंवार की मौत हुई। राहुल की मृत्यु अस्पताल में इलाज के दौरान हुई, जबकि जितेंद्र का शव ढाबे से कुछ दूरी पर झाड़ियों में मिला।
उज्जैन ढाबा हिंसा की वजह क्या थी?
पुलिस के अनुसार, करणी सेना से जुड़े दो गुटों के बीच पुरानी रंजिश इस हिंसा की मूल वजह बनी। कथित तौर पर एक बच्चे को लेकर पुराना विवाद था, जो सुलझा हुआ माना जा रहा था, लेकिन ढाबे पर बहस के बाद स्थिति हिंसक हो गई।
इस मामले में कितने आरोपी फरार हैं?
पुलिस के अनुसार, अर्पित, मोहन बाना और सोनू बंजारा फिलहाल फरार हैं। शक्ति सिंह घायल होकर इलाज में है और जाँच के दायरे में है।
उज्जैन ढाबा मामले की जाँच कौन कर रहा है?
चिमनगंज पुलिस स्टेशन इस मामले की जाँच कर रही है। एसएचओ विवेक कनोडिया ने बताया कि मकसद, हर आरोपी की भूमिका और पुरानी रंजिश की प्रकृति की जाँच की जा रही है।
क्या उज्जैन ढाबा हमला पूर्व-नियोजित था?
पुलिस अभी इस पहलू की जाँच कर रही है। हालाँकि, घटनाक्रम के अनुसार एक पक्ष ने कथित तौर पर 12 से 15 हथियारबंद साथियों को बुलाया, जो चाकू और तलवारें लेकर मौके पर पहुँचे — जो पूर्व-तैयारी का संकेत देता है।
राष्ट्र प्रेस
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