क्या साल के पहले दिन बाबा महाकाल का अद्भुत शृंगार हुआ?
सारांश
Key Takeaways
- महाकाल मंदिर में नववर्ष के पहले दिन भक्तों की भारी भीड़ है।
- बाबा का शृंगार बेहद अद्भुत और दुर्लभ है।
- पंचामृत पूजन के बाद बाबा महाकाल का राजा स्वरूप शृंगार किया गया है।
- भक्त विदेशों से भी बाबा के दर्शन के लिए आ रहे हैं।
- काशी विश्वनाथ मंदिर में भी नववर्ष का विशेष आयोजन हुआ।
उज्जैन, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। साल के पहले दिन महाकाल मंदिर में भक्तों की विशाल भीड़ उमड़ पड़ी है। सुबह से ही भक्त बाबा महाकाल के दर्शन के लिए कोहरे में लंबी कतारों में खड़े हैं।
नए साल की शुरुआत पर बाबा का विशेष शृंगार किया गया है, जिसे उज्जैन के राजा के रूप में सजाया गया है। इस अद्भुत दर्शन को पाकर भक्तों का मन प्रसन्न है और पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज रहा है।
नववर्ष के पहले दिन महाकाल मंदिर में पंचामृत पूजन के बाद महाकाल का राजा स्वरूप शृंगार किया गया है, जिसमें उनके मस्तक पर चाँद, सूरज और त्रिशूल को अंकित किया गया है। पंचामृत पूजन में जल, फल, दूध, दही और घी से बाबा को स्नान कराया जाता है और फिर उनका शृंगार किया जाता है। आज, यानी गुरुवार के दिन, बाबा के दर्शन बेहद अद्भुत और दुर्लभ हैं, जहाँ बाबा के माथे पर चाँद और सूरज दोनों को एक साथ अंकित किया गया है।
आज रात 11 बजे बाबा महाकाल के कपाट खुले रहेंगे और भक्त पूरे दिन बाबा के दर्शन कर सकेंगे।
इस विशेष दिन पर बाबा महाकाल के पुजारी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि बाबा महाकाल के प्रति लाखों भक्तों की आस्था है और उनके लिए बीता साल भी बाबा का है, और आने वाला समय भी बाबा का है। इसी कड़ी में बाबा महाकाल के दर पर लाखों भक्त उनके अद्भुत दर्शन के लिए पहुंचे हैं। पुजारी ने यह भी बताया कि भक्त विदेशों से आकर भी दर्शन कर रहे हैं।
वहीं, वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर में नववर्ष के अवसर पर विशेष मंगला आरती का आयोजन हुआ और अस्सी घाट पर गंगा आरती के साथ नव वर्ष का स्वागत किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालु एकत्रित हुए।
बाबा काशी विश्वनाथ का दूध, दही और घी से अभिषेक किया गया और फिर रुद्राक्ष और फूलों की माला से बाबा के शृंगार किए गए। नववर्ष के उपलक्ष्य में काशी विश्वनाथ मंदिर भी देर रात तक खुला रहेगा। चढ़ते सूरज के साथ मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ बढ़ती जा रही है।