18 अक्टूबर 2026
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UP मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने खारिज किया '2 आवेदन पर 4 वोटर आईडी' का दावा, बोले — 4 फॉर्म भरे थे

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UP मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने खारिज किया '2 आवेदन पर 4 वोटर आईडी' का दावा, बोले — 4 फॉर्म भरे थे

सारांश

उत्तर प्रदेश के सीईओ कार्यालय ने '2 आवेदन पर 4 वोटर आईडी' के वायरल दावे को एक्स पर सीधे खारिज किया — असली तथ्य यह है कि 4 फॉर्म भरे गए थे। साथ ही आयोग ने रियल टाइम डी डुप्लीकेशन व्यवस्था जल्द लागू करने का संकल्प दोहराया।

मुख्य बातें

UP सीईओ कार्यालय ने 18 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया दावे का खंडन किया — '2 फॉर्म पर 4 EPIC' का आरोप गलत है।
वास्तविकता यह है कि संबंधित व्यक्ति ने 4 आवेदन जमा किए थे, जिससे 4 वोटर आईडी बनीं।
सीईओ ने यूज़र को चुनौती दी कि वे दो आवेदनों के रेफरेंस नंबर प्रस्तुत करें।
भारत निर्वाचन आयोग ECINet के ज़रिए डी डुप्लीकेशन करता है और रियल टाइम पहचान प्रणाली जल्द लागू करेगा।
आयोग ने संवैधानिक संस्था के विरुद्ध भ्रामक जानकारी फैलाने पर यूज़र को चेतावनी दी।

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने 18 अक्टूबर 2026 को एक सोशल मीडिया दावे का सख्त खंडन किया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि केवल दो आवेदन जमा करने पर एक व्यक्ति को चार मतदाता फोटो पहचान पत्र (EPIC) मिल गए। कार्यालय ने स्पष्ट किया कि संबंधित व्यक्ति ने वास्तव में चार अलग अलग फॉर्म जमा किए थे, जिससे चार वोटर आईडी बनी — दो नहीं। यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब सोशल मीडिया पर चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर भ्रामक पोस्ट तेज़ी से फैल रही थीं।

सीईओ कार्यालय की सीधी प्रतिक्रिया

सीईओ कार्यालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर संबंधित यूज़र को सीधे संबोधित करते हुए लिखा, 'मिस्टर फैक्ट चेकर, कृपया अपने खुद के तथ्यों की ही जांच कर लें। चुनाव आयोग की ऐसी कोई स्कीम नहीं है, जिसमें "एक खरीदें, एक मुफ्त पाएं" जैसा कुछ हो।' कार्यालय ने यह भी कहा कि फॉर्म 6 दो बार भरने पर चार EPIC मिलने का दावा 'बिल्कुल गलत' है।

सीईओ ने यूज़र को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वह अपने दावे पर कायम हैं, तो वे उन दो आवेदनों के रेफरेंस नंबर प्रस्तुत करें जिनका उन्होंने उल्लेख किया — बाकी दो के रेफरेंस नंबर कार्यालय स्वयं देने को तैयार है।

डुप्लीकेट वोटर आईडी की समस्या और आयोग का समाधान

सीईओ कार्यालय ने माना कि एक व्यक्ति द्वारा कई फॉर्म जमा करने पर एकाधिक EPIC बन जाने की समस्या काफी पुरानी है। हालाँकि, आयोग इस पर काम कर रहा है — वह ECINet प्रणाली के ज़रिए समय समय पर 'डी डुप्लीकेशन' अभियान चलाता है।

गौरतलब है कि आयोग अब एक ऐसी उन्नत व्यवस्था विकसित करने में जुटा है, जिससे किसी व्यक्ति के एकाधिक फॉर्म जमा होने के तत्काल समय पर ही उन्हें पकड़ा जा सके — यानी पंजीकरण से पहले ही दोहराव रोका जा सके। कार्यालय ने भरोसा दिलाया कि आयोग जल्द ही इस लक्ष्य को हासिल कर लेगा।

आयोग की चेतावनी

सीईओ कार्यालय ने संबंधित यूज़र को स्पष्ट रूप से आगाह किया कि भारत निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के बारे में पूरी तरह से गलत जानकारी फैलाकर नागरिकों के मन में अविश्वास या नाराज़गी पैदा करने की कोशिश न करें।

कार्यालय ने उपयोगकर्ता को सुझाव दिया कि चूँकि उन्हें उनकी गलत जानकारी के बारे में सूचित कर दिया गया है, इसलिए वे मामले की सही तरह जाँच करें और अपनी पोस्ट में सुधार करें अथवा उसे हटा दें।

क्यों मायने रखता है यह मामला

यह प्रकरण उस व्यापक चुनौती को उजागर करता है जिसका सामना चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं को सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं के युग में करना पड़ता है। एकाधिक EPIC की समस्या का तकनीकी समाधान लंबे समय से मतदाता सूची की शुद्धता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। आयोग की रियल टाइम डी डुप्लीकेशन योजना, यदि सफलतापूर्वक लागू होती है, तो भविष्य में इस तरह की भ्रांतियों की गुंजाइश काफी हद तक कम होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी रियल टाइम रोकथाम अभी लक्ष्य है, हकीकत नहीं — यह अपने आप में एक नीतिगत कमी है जिसे स्वीकार किया जाना ज़रूरी है। एक्स पर सार्वजनिक रूप से जवाबी कार्रवाई करने की आयोग की रणनीति पारदर्शिता का संकेत है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता तभी होगी जब तकनीकी व्यवस्था भी उतनी ही दृढ़ हो।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'2 आवेदन पर 4 वोटर आईडी' का दावा क्या था?
सोशल मीडिया पर एक यूज़र ने दावा किया था कि केवल दो बार फॉर्म 6 जमा करने पर एक व्यक्ति को चार EPIC (मतदाता फोटो पहचान पत्र) मिल गए। UP सीईओ कार्यालय ने इसे 'बिल्कुल गलत' बताते हुए स्पष्ट किया कि संबंधित व्यक्ति ने वास्तव में चार फॉर्म जमा किए थे।
डुप्लीकेट वोटर आईडी की समस्या से चुनाव आयोग कैसे निपटता है?
भारत निर्वाचन आयोग ECINet प्रणाली के ज़रिए समय समय पर 'डी डुप्लीकेशन' अभियान चलाता है। आयोग अब एक उन्नत व्यवस्था विकसित कर रहा है, जिससे एकाधिक फॉर्म जमा होने पर उन्हें तत्काल पहचाना जा सके।
क्या एक व्यक्ति के लिए कई वोटर आईडी बनना संभव है?
हाँ, अगर कोई व्यक्ति एक से अधिक बार फॉर्म 6 जमा करे, तो एकाधिक EPIC बन सकते हैं — सीईओ कार्यालय ने खुद इसे 'काफी पुरानी समस्या' माना है। हालाँकि, आयोग इसे ECINet के ज़रिए नियमित रूप से ठीक करता है।
चुनाव आयोग ने भ्रामक पोस्ट पर क्या कार्रवाई की?
सीईओ कार्यालय ने एक्स पर सार्वजनिक जवाब देकर दावे का खंडन किया और यूज़र को चेतावनी दी कि संवैधानिक संस्था के विरुद्ध गलत जानकारी फैलाकर अविश्वास न पैदा करें। यूज़र को पोस्ट हटाने या सुधारने की सलाह दी गई।
रियल टाइम डी डुप्लीकेशन व्यवस्था कब तक लागू होगी?
UP सीईओ कार्यालय ने कहा है कि आयोग 'जल्द ही' यह व्यवस्था लागू करेगा, जिससे एकाधिक फॉर्म जमा होने पर उन्हें पंजीकरण के समय ही पकड़ा जा सकेगा। कोई निश्चित तिथि अभी तक घोषित नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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