23 अक्टूबर 2026
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यूपी चुनाव 2027: ओवैसी को 'बीजेपी की बी टीम' बताते हुए नसीम सिद्दीकी की जनता से सावधान रहने की अपील

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यूपी चुनाव 2027: ओवैसी को 'बीजेपी की बी टीम' बताते हुए नसीम सिद्दीकी की जनता से सावधान रहने की अपील

सारांश

यूपी 2027 की रणनीतिक बिसात पर NCP (SP) नेता नसीम सिद्दीकी ने ओवैसी को 'BJP की बी टीम' करार देकर मुस्लिम वोटों के बिखराव की चेतावनी दी। साथ ही, कांग्रेस को सपा के साथ 'छोटे भाई' की भूमिका स्वीकार करने की सलाह दी — यह संकेत है कि विपक्षी एकजुटता की रूपरेखा अभी भी विवादित है।

मुख्य बातें

NCP (SP) नेता नसीम सिद्दीकी ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को BJP की 'बी टीम' करार दिया और मुस्लिम मतदाताओं को सावधान रहने की अपील की।
अखिलेश यादव की जेल में आजम खान से मुलाकात ने यूपी 2027 की राजनीतिक चर्चाओं को गर्म किया है।
सिद्दीकी के अनुसार उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अकेले चुनाव लड़े तो 2 से 4 सीटें ही हासिल कर सकती है; 40 सीटों के लिए सपा के साथ गठबंधन जरूरी है।
BSP प्रमुख मायावती की रणनीति पर अभी कुछ कहना 'जल्दबाजी' — सिद्दीकी ने उम्मीद जताई कि मायावती BJP-विरोधी मोर्चे से जुड़ सकती हैं।
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने मतदाता सूची के SIR पर वोट-चोरी का आरोप लगाया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग का समर्थन किया।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के वरिष्ठ नेता नसीम सिद्दीकी ने 23 अक्टूबर 2026 को ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की राजनीतिक सक्रियता पर कड़ा निशाना साधा। सिद्दीकी ने ओवैसी पर आरोप लगाया कि वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) की 'बी टीम' की भूमिका निभाते हैं और मुस्लिम मतदाताओं को बाँटने के इरादे से यूपी की राजनीति में उतरते हैं।

ओवैसी पर सिद्दीकी का आरोप

सिद्दीकी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ओवैसी की पार्टी जब भी किसी बड़े राज्य के चुनाव में उतरती है, उसका मुख्य परिणाम विपक्षी मतों का बिखराव होता है। उन्होंने बिहार और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों का हवाला देते हुए जनता से 'जज़्बाती राजनीति' से सावधान रहने की अपील की।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम मतदाताओं की भावनाओं को प्रभावित करने के लिए भावनात्मक मुद्दे उठाए जा रहे हैं, लेकिन इससे अंतत: विपक्ष को ही नुकसान होता है। यह ऐसे समय में आया है जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की जेल में वरिष्ठ सपा नेता आजम खान से मुलाकात ने यूपी की राजनीतिक चर्चाओं को और गर्म कर दिया है।

सपा-कांग्रेस गठबंधन पर सिद्दीकी का नजरिया

सिद्दीकी ने उत्तर प्रदेश में BJP को प्रभावी चुनौती देने के लिए समाजवादी पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच ठोस गठजोड़ की जरूरत पर जोर दिया। उनके अनुसार यूपी में सपा की राजनीतिक पकड़ कहीं मजबूत है, इसलिए कांग्रेस को इस गठबंधन में 'छोटे भाई' की भूमिका स्वीकार करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस अकेले चुनाव मैदान में उतरती है तो उसे राज्य में सीमित सफलता ही मिल सकती है — संभवतः 2 से 4 सीटों तक — जो एक कमजोर उपस्थिति है। उनका तर्क था कि इतनी सीमित मौजूदगी से 40 सीटों का लक्ष्य हासिल करना व्यावहारिक नहीं होगा।

मायावती और बसपा की संभावित भूमिका

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती की चुनावी रणनीति पर सिद्दीकी ने कहा कि इस बारे में अभी कोई ठोस राय देना जल्दबाजी होगी। हालाँकि उन्होंने उम्मीद जताई कि मायावती BJP-विरोधी गठबंधन के साथ आ सकती हैं।

गौरतलब है कि बसपा पिछले कुछ चुनावों में एकाकी रणनीति अपनाती रही है, जिसका असर विपक्षी वोटों के बिखराव के रूप में सामने आया है। 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में बसपा को केवल 1 सीट पर ही संतोष करना पड़ा था।

चुनाव आयोग और मतदाता सूची पर आरोप

उत्तर प्रदेश में एमएलसी चुनाव के संदर्भ में सिद्दीकी ने मतदाता सूची में अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधते हुए कथित तौर पर यह आरोप लगाया कि केंद्र सरकार उन्हें संरक्षण देने का प्रयास कर रही है।

इसी मुद्दे पर कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसकी आड़ में वोटों की 'चोरी' होती है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की विपक्षी माँग का समर्थन किया।

अन्य मुद्दों पर सिद्दीकी की राय

देश में विरोध प्रदर्शनों और कथित विदेशी हस्तक्षेप से जुड़े सवाल पर सिद्दीकी ने कहा कि भारत में आंदोलन का स्वरूप यहाँ की जनता, संविधान और संसद तय करेंगे। उन्होंने गांधीजी के अहिंसा सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में विरोध-प्रदर्शन शांतिपूर्ण होने चाहिए, और देश की छवि को अराजक बताकर खराब करने की कोशिशों की उन्होंने आलोचना की।

फिल्म अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े एक मामले और बाबा सिद्दीकी की हत्या के प्रकरण पर भी उन्होंने सरकार से पूछा कि इसमें मास्टरमाइंड की पहचान और गिरफ्तारी की दिशा में कितनी प्रगति हुई है। प्रियंका गांधी वाड्रा के पुत्र रेहान वाड्रा की तस्वीरों को लेकर उठे विवाद पर उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त है और रेहान को उनके पारिवारिक-राजनीतिक संबंधों के कारण निशाना बनाया जा रहा है।

2027 का यूपी विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आएगा, इस तरह की राजनीतिक बयानबाजी और गठबंधन की चर्चाएँ और तीखी होती जाएँगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में भी इस गठजोड़ में टकराव की स्थितियाँ बनी थीं। मायावती को 'विपक्षी एकता' में लाने की उम्मीद रखना भी महत्वाकांक्षी है — 2022 में बसपा की एकाकी रणनीति ने ही विपक्षी वोट बिखेरे थे। मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना साधना विपक्ष की रणनीतिक जरूरत हो सकती है, लेकिन इससे जमीनी संगठन मजबूत नहीं होता — और 2027 की लड़ाई बयानों नहीं, बूथ प्रबंधन से जीती जाएगी।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नसीम सिद्दीकी ने ओवैसी को 'BJP की बी टीम' क्यों कहा?
NCP (SP) नेता नसीम सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी जब भी यूपी जैसे बड़े राज्य में चुनाव लड़ते हैं, तो मुस्लिम वोट बँटते हैं और BJP को फायदा होता है। उन्होंने बिहार और बंगाल के चुनावों का उदाहरण देते हुए मतदाताओं को 'जज़्बाती राजनीति' से सतर्क रहने की अपील की।
यूपी 2027 में सपा-कांग्रेस गठबंधन पर सिद्दीकी का क्या कहना है?
सिद्दीकी के अनुसार उत्तर प्रदेश में BJP को हराने के लिए सपा और कांग्रेस को मिलकर लड़ना होगा। यूपी में सपा की मजबूत पकड़ के कारण कांग्रेस को गठबंधन में 'छोटे भाई' की भूमिका स्वीकार करनी चाहिए; अकेले लड़ने पर कांग्रेस को केवल 2 से 4 सीटें ही मिल सकती हैं।
अखिलेश यादव और आजम खान की जेल में मुलाकात का क्या महत्व है?
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने जेल में बंद वरिष्ठ सपा नेता आजम खान से मुलाकात की, जो पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के करीबी रहे हैं। यह मुलाकात यूपी 2027 की तैयारियों के बीच पार्टी के भीतर एकजुटता के संकेत के रूप में देखी जा रही है।
मतदाता सूची और मुख्य चुनाव आयुक्त पर विपक्ष के क्या आरोप हैं?
नसीम सिद्दीकी ने यूपी एमएलसी चुनाव में मतदाता सूची में गड़बड़ियों का आरोप लगाया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर केंद्र सरकार के संरक्षण का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने SIR प्रक्रिया को वोट-चोरी का जरिया बताते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की माँग का समर्थन किया।
बसपा प्रमुख मायावती यूपी 2027 में किस भूमिका में रहेंगी?
सिद्दीकी ने कहा कि मायावती की चुनावी रणनीति के बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। हालाँकि उन्होंने उम्मीद जताई कि मायावती BJP-विरोधी विपक्षी गठबंधन के साथ आ सकती हैं, हालाँकि इसकी कोई औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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