14 अक्टूबर 2026
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यूपी में पैक्ड पानी पर FSDA की सख्ती: BIS प्रमाणन अनिवार्य, 968 इकाइयों को 31 मार्च 2027 तक मिलेगी मोहलत

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यूपी में पैक्ड पानी पर FSDA की सख्ती: BIS प्रमाणन अनिवार्य, 968 इकाइयों को 31 मार्च 2027 तक मिलेगी मोहलत

सारांश

उत्तर प्रदेश में बोतलबंद पानी की शुद्धता अब कागजी नहीं, कानूनी अनिवार्यता है। FSDA की जाँच में 660 में से 513 नमूने फेल हुए और ई-कोलाई तक मिला — इसके बाद BIS प्रमाणन फिर से अनिवार्य कर दिया गया। 968 इकाइयों के पास 31 मार्च 2027 तक का वक्त है, वरना उत्पादन बंद।

मुख्य बातें

रोशन जैकब ने 14 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी किया — नई पैक्ड पानी इकाइयों को BIS प्रमाणन मिले बिना लाइसेंस नहीं मिलेगा।
प्रदेश की 811 इकाइयों के 660 नमूनों में से 513 नमूने (लगभग 78% ) गुणवत्ता मानकों पर विफल रहे — 176 असुरक्षित , 337 अधोमानक ।
असुरक्षित नमूनों में ई-कोलाई, कोलीफार्म बैक्टीरिया, यीस्ट और मोल्ड जैसे सूक्ष्मजीव मिले।
152 इकाइयों के लाइसेंस निलंबित; केंद्रीय लाइसेंस प्राप्त 55 इकाइयों के निलंबन की संस्तुति।
सभी मौजूदा 968 इकाइयों को 31 मार्च 2027 तक BIS प्रमाणन अनिवार्य; चूक पर उत्पादन बंद।
FSSAI ने 18 अक्टूबर 2024 को BIS अनिवार्यता हटाई थी — यूपी ने राज्य स्तर पर उसे पुनः लागू किया।

उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने 14 अक्टूबर 2026 को पैक्ड पेयजल और पैक्ड मिनरल वॉटर की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक निर्णायक आदेश जारी किया, जिसके तहत प्रदेश में अब किसी भी नई इकाई को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का प्रमाणन मिले बिना खाद्य सुरक्षा लाइसेंस या पंजीकरण नहीं दिया जाएगा। पहले से संचालित 968 इकाइयों को 31 मार्च 2027 तक यह प्रमाणन हासिल करना अनिवार्य होगा, अन्यथा उनका लाइसेंस निलंबित कर उत्पादन बंद कर दिया जाएगा। FSDA आयुक्त डॉ. रोशन जैकब द्वारा जारी यह आदेश खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

निरीक्षण में सामने आई गंभीर खामियाँ

इस आदेश की पृष्ठभूमि में FSDA द्वारा पिछले एक वर्ष में की गई व्यापक जाँच-कार्रवाई है। विभाग ने प्रदेश की 811 पैक्ड पेयजल और मिनरल वॉटर विनिर्माण इकाइयों का निरीक्षण किया और इनसे 660 नमूने एकत्र किए। जाँच के नतीजे चौंकाने वाले रहे — 176 नमूने स्वास्थ्य के लिए सीधे तौर पर असुरक्षित पाए गए, जबकि 337 नमूने अधोमानक निकले। यानी कुल 513 नमूने, जो जाँचे गए कुल नमूनों का करीब 78% है, निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे।

असुरक्षित नमूनों में ई-कोलाई, कोलीफार्म बैक्टीरिया, यीस्ट और मोल्ड जैसे हानिकारक सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति दर्ज की गई। कई इकाइयों में अल्ट्रावायलेट (UV) ट्रीटमेंट प्लांट और ओजोनीकरण सुविधाएँ तक अनुपस्थित थीं। अधोमानक नमूनों में कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे खनिजों की मात्रा सामान्य स्तर से कम पाई गई।

उत्पादन प्रक्रिया और स्वच्छता में उल्लंघन

भौतिक निरीक्षण में सामने आया कि कई इकाइयों में उत्पादन प्रक्रिया के दौरान हाथों से काम किया जा रहा था, जो संदूषण का सीधा जोखिम पैदा करता है। कहीं पानी के स्रोत की जाँच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं मिली तो कहीं भंडारण और स्वच्छता मानकों का खुला उल्लंघन पाया गया। गौरतलब है कि ये खामियाँ केवल कागजी दस्तावेजों तक सीमित नहीं थीं, बल्कि उत्पादन की मूलभूत प्रक्रियाओं से जुड़ी थीं।

इन गंभीर निष्कर्षों के आधार पर FSDA ने 152 इकाइयों के लाइसेंस या पंजीकरण निलंबित कर उनका उत्पादन बंद कराया। इसके अतिरिक्त केंद्रीय लाइसेंस प्राप्त 55 इकाइयों के लाइसेंस निलंबित करने की संस्तुति भी की गई है।

BIS अनिवार्यता हटाने के बाद क्यों बढ़ीं समस्याएँ

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने 18 अक्टूबर 2024 से पैक्ड पेयजल के लिए BIS (ISI) प्रमाणन की अनिवार्यता समाप्त कर दी थी। इस निर्णय के बाद पैक्ड पानी को उच्च जोखिम वाले खाद्य उत्पादों की श्रेणी से बाहर किया गया और विनिर्माण लाइसेंस के लिए BIS शर्त हटा दी गई। विभाग के अनुसार, इसके बाद प्रदेश में ऐसी इकाइयों की संख्या बढ़कर 968 हो गई। हालाँकि, साथ ही गुणवत्ता उल्लंघनों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई, जिसने राज्य सरकार को BIS प्रमाणन दोबारा अनिवार्य करने पर विवश किया।

नए आदेश के तीन प्रमुख प्रावधान

नई इकाइयों के लिए: पैक्ड पेयजल और मिनरल वॉटर की किसी भी नई विनिर्माण इकाई को BIS प्रमाणन मिलने के बाद ही खाद्य सुरक्षा लाइसेंस या पंजीकरण जारी किया जाएगा।

पहले से संचालित इकाइयों के लिए: सभी मौजूदा इकाइयों को 31 मार्च 2027 तक BIS प्रमाणन प्राप्त करना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर लाइसेंस निलंबित रहेगा और उत्पादन बंद रहेगा।

केंद्रीय लाइसेंस प्राप्त इकाइयों के लिए: उत्तर प्रदेश में संचालित केंद्रीय अनुज्ञप्ति धारक विनिर्माण इकाइयाँ भी इस आदेश के दायरे में होंगी और उन्हें निर्धारित समयसीमा के भीतर BIS प्रमाणन लेना होगा।

जनस्वास्थ्य पर असर और आगे की राह

FSDA आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने कहा कि पैक्ड पेयजल का कारोबार उपभोक्ता के उस भरोसे पर टिका है जिसके तहत वह पानी की शुद्धता सुनिश्चित मानकर कीमत चुकाता है। जब प्रयोगशाला जाँच में हानिकारक सूक्ष्मजीव मिलते हैं या शोधन प्रक्रिया में खामियाँ उजागर होती हैं, तो मामला केवल कारोबारी नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सीधे जनस्वास्थ्य से जुड़ जाता है।

इस नए नियामकीय ढाँचे के तहत उत्तर प्रदेश देश का संभवतः पहला बड़ा राज्य बन गया है जिसने FSSAI की केंद्रीय छूट के बावजूद राज्य स्तर पर BIS प्रमाणन को पुनः अनिवार्य किया है। आने वाले महीनों में इस आदेश के अनुपालन की निगरानी FSDA की जिला इकाइयों द्वारा की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें BIS अनिवार्यता हटाई गई थी, जमीनी नतीजों की कसौटी पर विफल रहा। विडंबना यह है कि उस नीतिगत छूट के बाद प्रदेश में इकाइयों की संख्या बढ़ी, लेकिन गुणवत्ता गिरती रही। यूपी का यह कदम एक राज्य की केंद्रीय नियामकीय ढील के विरुद्ध व्यावहारिक विद्रोह है — और यह सवाल खड़ा करता है कि क्या FSSAI को अपनी उस छूट पर पुनर्विचार करना चाहिए। असली परीक्षा 31 मार्च 2027 के बाद अनुपालन की निगरानी और उल्लंघन पर की जाने वाली कार्रवाई की होगी — क्योंकि भारत में खाद्य नियामकीय आदेश अकसर कागज पर मजबूत और जमीन पर कमज़ोर साबित होते हैं।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश में पैक्ड पानी के लिए BIS प्रमाणन अनिवार्य क्यों किया गया?
FSDA की जाँच में प्रदेश की 811 इकाइयों के 660 नमूनों में से 513 गुणवत्ता मानकों पर विफल पाए गए, जिनमें ई-कोलाई और कोलीफार्म बैक्टीरिया जैसे हानिकारक सूक्ष्मजीव मिले। इसी के मद्देनजर FSDA ने BIS प्रमाणन को पुनः अनिवार्य बनाया है ताकि उत्पादन इकाइयों की गुणवत्ता जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
मौजूदा पैक्ड पानी इकाइयों के लिए BIS प्रमाणन की समयसीमा क्या है?
पहले से संचालित सभी 968 इकाइयों को 31 मार्च 2027 तक BIS प्रमाणन प्राप्त करना अनिवार्य है। इस तिथि तक प्रमाणन न लेने वाली इकाइयों का लाइसेंस या पंजीकरण निलंबित रहेगा और उत्पादन बंद करा दिया जाएगा।
FSDA ने अब तक कितनी इकाइयों के लाइसेंस निलंबित किए हैं?
गुणवत्ता जाँच और भौतिक निरीक्षण में पाई गई कमियों के आधार पर FSDA ने 152 इकाइयों के लाइसेंस या पंजीकरण निलंबित कर उनका उत्पादन बंद कराया है। इसके अतिरिक्त केंद्रीय लाइसेंस प्राप्त 55 इकाइयों के लाइसेंस निलंबित करने की संस्तुति की गई है।
पहले BIS प्रमाणन क्यों हटाया गया था और अब दोबारा क्यों लागू किया गया?
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने 18 अक्टूबर 2024 से पैक्ड पेयजल के लिए BIS (ISI) प्रमाणन की अनिवार्यता समाप्त कर दी थी। हालाँकि, इसके बाद प्रदेश में इकाइयों की संख्या और गुणवत्ता उल्लंघन दोनों बढ़े, जिससे FSDA ने राज्य स्तर पर इसे पुनः अनिवार्य करने का निर्णय लिया।
इस आदेश से आम उपभोक्ताओं पर क्या असर होगा?
इस आदेश का उद्देश्य बाज़ार में उपलब्ध बोतलबंद पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। जो इकाइयाँ BIS प्रमाणन नहीं लेंगी, उनका उत्पादन बंद हो जाएगा, जिससे बाज़ार में केवल मानक-सम्मत उत्पाद ही उपलब्ध रहेंगे और उपभोक्ताओं को ई-कोलाई जैसे सूक्ष्मजीवों से दूषित पानी के जोखिम से सुरक्षा मिलेगी।
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