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यूपी में जल जीवन मिशन: 5 लाख महिलाओं ने की 1.43 करोड़ से अधिक जल नमूनों की जाँच

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यूपी में जल जीवन मिशन: 5 लाख महिलाओं ने की 1.43 करोड़ से अधिक जल नमूनों की जाँच

सारांश

उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन का यह आँकड़ा केवल संख्या नहीं है — 5 लाख महिलाएँ, 1.43 करोड़ नमूने और गाँव-गाँव तक फैला निगरानी नेटवर्क। सुजलाम शक्ति समूह ने ग्रामीण पेयजल सुरक्षा को महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण से जोड़ने की एक नई मिसाल पेश की है।

मुख्य बातें

जल जीवन मिशन के तहत यूपी में करीब 5 लाख महिलाओं को FTK के ज़रिए पेयजल गुणवत्ता जाँच का प्रशिक्षण दिया गया है।
वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2026-27 के बीच कुल 1,43,21,260 जल नमूनों का परीक्षण किया जा चुका है।
महिलाएँ सुजलाम शक्ति समूह के रूप में संगठित हैं, जिनमें स्वयं सहायता समूह, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्त्री शामिल हैं।
पानी की जाँच भारतीय मानक IS-10500:2012 के आधार पर होती है — आयरन, नाइट्रेट, क्लोराइड समेत अन्य अशुद्धियों की पहचान की जाती है।
जाँच कार्य के लिए निर्धारित मानदेय भुगतान से यह समूह ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का माध्यम भी बना है।
जल निगम (ग्रामीण) के MD योगेश कुमार ने कहा कि निगरानी व्यवस्था और सेवा गुणवत्ता को आगे और मज़बूत किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के तहत प्रशिक्षित करीब 5 लाख महिलाएँ फील्ड टेस्ट किट (FTK) के ज़रिए पेयजल की शुद्धता की जाँच कर हर घर तक स्वच्छ पानी पहुँचाने की निगरानी में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। 16 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2026-27 के बीच कुल 1,43,21,260 जल नमूनों का परीक्षण किया जा चुका है। नवरात्र पर्व के संदर्भ में यह पहल 'नारी शक्ति' की व्यावहारिक मिसाल के रूप में सामने आई है।

सुजलाम शक्ति समूह: संगठन और कार्यप्रणाली

जल जीवन मिशन 1.0 के अंतर्गत प्रत्येक राजस्व ग्राम से पाँच महिलाओं को जल गुणवत्ता परीक्षण का प्रशिक्षण दिया गया था। अब ये प्रशिक्षित महिलाएँ जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सुजलाम शक्ति समूह के रूप में संगठित होकर गाँव-गाँव में पेयजल की गुणवत्ता पर नज़र रख रही हैं। इस समूह में स्वयं सहायता समूहों की सदस्याओं के साथ-साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री और आशा कार्यकर्त्री भी पात्रता के आधार पर शामिल हैं।

प्रशिक्षण के बाद प्रत्येक महिला को FTK उपलब्ध कराई जाती है, जिससे पानी में आयरन, नाइट्रेट और क्लोराइड समेत विभिन्न अशुद्धियों की प्राथमिक जाँच की जाती है। यह परीक्षण भारतीय मानक IS-10500:2012 के आधार पर संचालित होता है। ये महिलाएँ प्रत्येक माह FHTC (फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन), विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य केंद्रों और हैंडपंपों सहित विभिन्न स्रोतों से नमूने एकत्र कर जाँचती हैं।

वर्षवार जाँच के आँकड़े

आँकड़ों के अनुसार, 2022-23 में 39,47,102 नमूनों की जाँच की गई, 2023-24 में 36,68,743, 2024-25 में 38,19,440 और 2025-26 में 5,51,221 नमूनों की जाँच हुई। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक 23,34,754 नमूनों की जाँच की जा चुकी है। गौरतलब है कि यह बड़े पैमाने पर विकेंद्रीकृत निगरानी तंत्र ग्रामीण स्तर पर कार्यरत है, जो केंद्रीय प्रयोगशालाओं पर निर्भरता को कम करता है।

महिलाओं के लिए आय का अवसर

जाँच कार्य के लिए निर्धारित मानदेय के आधार पर महिलाओं को भुगतान किया जाता है, जिससे सुजलाम शक्ति समूह पेयजल निगरानी के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का माध्यम भी बन रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की श्रम भागीदारी दर को बढ़ाने पर नीतिगत जोर बढ़ा है। इसके अतिरिक्त, दक्ष महिलाओं को ग्राम स्तर पर गठित जल समितियों में सदस्य के रूप में भी शामिल किया जाता है।

सरकार का दृष्टिकोण और आगे की राह

उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक योगेश कुमार ने कहा, 'ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुँचाना विभाग की प्राथमिकता है।' उन्होंने कहा कि गाँव स्तर पर प्रशिक्षित महिलाओं को जल गुणवत्ता जाँच से जोड़कर निगरानी व्यवस्था को मज़बूत किया गया है और पेयजल आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर भी विभाग लगातार काम कर रहा है।

प्रदेश में गाँव, ब्लॉक और ज़िला स्तर पर सुजलाम शक्ति समूहों का जो नेटवर्क तैयार किया गया है, वह जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन से जुड़े जागरूकता कार्यक्रमों में भी भूमिका निभा रहा है। आगामी समय में इस निगरानी व्यवस्था और सेवा गुणवत्ता को और सुदृढ़ करने की योजना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इनमें से कितने नमूनों में अशुद्धियाँ मिलीं और उन पर क्या कार्रवाई हुई — यह डेटा सार्वजनिक नहीं किया गया है। जाँच की संख्या और जल गुणवत्ता में वास्तविक सुधार के बीच की खाई को स्वतंत्र सत्यापन के बिना पाटना मुश्किल है। साथ ही, 2025-26 में महज़ 5,51,221 नमूनों की जाँच — जो पिछले वर्षों की तुलना में काफ़ी कम है — इस पर सफ़ाई की ज़रूरत है। निगरानी का यह मॉडल तभी टिकाऊ होगा, जब महिलाओं को दिया जाने वाला मानदेय नियमित और पर्याप्त हो, अन्यथा यह एक और सरकारी योजना बनकर रह जाएगी जो काग़ज़ पर सफल और ज़मीन पर कमज़ोर है।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुजलाम शक्ति समूह क्या है और यह कैसे काम करता है?
सुजलाम शक्ति समूह जल जीवन मिशन के तहत उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में गठित महिला समूह हैं, जो फील्ड टेस्ट किट (FTK) के ज़रिए पेयजल की गुणवत्ता जाँचती हैं। इनमें स्वयं सहायता समूह, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्त्री शामिल हैं, जो गाँव, ब्लॉक और ज़िला स्तर पर नेटवर्क बनाकर कार्य करती हैं।
यूपी में अब तक कितने जल नमूनों की जाँच हो चुकी है?
आँकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2026-27 के बीच कुल 1,43,21,260 जल नमूनों का परीक्षण किया जा चुका है। इनमें चालू वर्ष 2026-27 में अब तक 23,34,754 नमूनों की जाँच शामिल है।
FTK से पानी की जाँच में क्या-क्या देखा जाता है?
फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से पानी में आयरन, नाइट्रेट और क्लोराइड समेत विभिन्न अशुद्धियों की प्राथमिक स्तर पर जाँच की जाती है। यह परीक्षण भारतीय मानक IS-10500:2012 के आधार पर होता है।
इन महिलाओं को जाँच के लिए भुगतान कैसे होता है?
जाँच कार्य के लिए निर्धारित मानदेय के आधार पर महिलाओं को भुगतान किया जाता है। इस तरह सुजलाम शक्ति समूह पेयजल निगरानी के साथ ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का माध्यम भी बन रहे हैं।
जल जीवन मिशन 1.0 और 2.0 में क्या अंतर है?
जल जीवन मिशन 1.0 में प्रत्येक राजस्व ग्राम से पाँच महिलाओं को जल गुणवत्ता परीक्षण का प्रशिक्षण दिया गया था। मिशन 2.0 में इन्हीं प्रशिक्षित महिलाओं को सुजलाम शक्ति समूह के रूप में औपचारिक रूप से संगठित किया गया है, जो अब निगरानी के साथ-साथ जल संरक्षण जागरूकता और जल समितियों में भी भूमिका निभाती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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