यूपी में जल जीवन मिशन: 5 लाख महिलाओं ने की 1.43 करोड़ से अधिक जल नमूनों की जाँच
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के तहत प्रशिक्षित करीब 5 लाख महिलाएँ फील्ड टेस्ट किट (FTK) के ज़रिए पेयजल की शुद्धता की जाँच कर हर घर तक स्वच्छ पानी पहुँचाने की निगरानी में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। 16 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2026-27 के बीच कुल 1,43,21,260 जल नमूनों का परीक्षण किया जा चुका है। नवरात्र पर्व के संदर्भ में यह पहल 'नारी शक्ति' की व्यावहारिक मिसाल के रूप में सामने आई है।
सुजलाम शक्ति समूह: संगठन और कार्यप्रणाली
जल जीवन मिशन 1.0 के अंतर्गत प्रत्येक राजस्व ग्राम से पाँच महिलाओं को जल गुणवत्ता परीक्षण का प्रशिक्षण दिया गया था। अब ये प्रशिक्षित महिलाएँ जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सुजलाम शक्ति समूह के रूप में संगठित होकर गाँव-गाँव में पेयजल की गुणवत्ता पर नज़र रख रही हैं। इस समूह में स्वयं सहायता समूहों की सदस्याओं के साथ-साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री और आशा कार्यकर्त्री भी पात्रता के आधार पर शामिल हैं।
प्रशिक्षण के बाद प्रत्येक महिला को FTK उपलब्ध कराई जाती है, जिससे पानी में आयरन, नाइट्रेट और क्लोराइड समेत विभिन्न अशुद्धियों की प्राथमिक जाँच की जाती है। यह परीक्षण भारतीय मानक IS-10500:2012 के आधार पर संचालित होता है। ये महिलाएँ प्रत्येक माह FHTC (फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन), विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य केंद्रों और हैंडपंपों सहित विभिन्न स्रोतों से नमूने एकत्र कर जाँचती हैं।
वर्षवार जाँच के आँकड़े
आँकड़ों के अनुसार, 2022-23 में 39,47,102 नमूनों की जाँच की गई, 2023-24 में 36,68,743, 2024-25 में 38,19,440 और 2025-26 में 5,51,221 नमूनों की जाँच हुई। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक 23,34,754 नमूनों की जाँच की जा चुकी है। गौरतलब है कि यह बड़े पैमाने पर विकेंद्रीकृत निगरानी तंत्र ग्रामीण स्तर पर कार्यरत है, जो केंद्रीय प्रयोगशालाओं पर निर्भरता को कम करता है।
महिलाओं के लिए आय का अवसर
जाँच कार्य के लिए निर्धारित मानदेय के आधार पर महिलाओं को भुगतान किया जाता है, जिससे सुजलाम शक्ति समूह पेयजल निगरानी के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का माध्यम भी बन रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की श्रम भागीदारी दर को बढ़ाने पर नीतिगत जोर बढ़ा है। इसके अतिरिक्त, दक्ष महिलाओं को ग्राम स्तर पर गठित जल समितियों में सदस्य के रूप में भी शामिल किया जाता है।
सरकार का दृष्टिकोण और आगे की राह
उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक योगेश कुमार ने कहा, 'ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुँचाना विभाग की प्राथमिकता है।' उन्होंने कहा कि गाँव स्तर पर प्रशिक्षित महिलाओं को जल गुणवत्ता जाँच से जोड़कर निगरानी व्यवस्था को मज़बूत किया गया है और पेयजल आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर भी विभाग लगातार काम कर रहा है।
प्रदेश में गाँव, ब्लॉक और ज़िला स्तर पर सुजलाम शक्ति समूहों का जो नेटवर्क तैयार किया गया है, वह जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन से जुड़े जागरूकता कार्यक्रमों में भी भूमिका निभा रहा है। आगामी समय में इस निगरानी व्यवस्था और सेवा गुणवत्ता को और सुदृढ़ करने की योजना है।