जल जीवन मिशन: यूपी में गुणवत्ता से समझौता नहीं, स्वतंत्र देव सिंह ने दिए कड़ी कार्रवाई के निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने 8 जून 2026 को लखनऊ स्थित जल निगम (ग्रामीण) के सभागार में नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट किया कि जल जीवन मिशन की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जहाँ भी अनियमितता या खामियाँ पाई जाएँ, वहाँ तत्काल कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। 'हर घर नल से जल' योजना को शत-प्रतिशत लागू करने के लिए राज्य सरकार ने अभियान को और तेज़ कर दिया है।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुए
इस उच्चस्तरीय बैठक में अपर मुख्य सचिव, जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक, राज्य स्वच्छ गंगा मिशन, राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन तथा भूगर्भ जल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में जल जीवन मिशन के अंतर्गत चल रही परियोजनाओं की भौतिक और वित्तीय प्रगति की विस्तारपूर्वक समीक्षा की गई।
मुख्य घटनाक्रम: कितने गाँव, कितनी योजनाएँ
अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में 36,364 नई पेयजल योजनाओं के माध्यम से 85,163 राजस्व गाँवों को जोड़ा जा रहा है। इसके अतिरिक्त 5,978 पुरानी योजनाओं के ज़रिए 10,951 गाँवों को लाभ पहुँचाया जा रहा है। वर्तमान में 57,242 राजस्व गाँवों में नियमित जलापूर्ति शुरू हो चुकी है, जबकि शेष गाँवों में निर्माण कार्य तेज़ी से जारी है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार जल जीवन मिशन की समयबद्ध पूर्णता पर विशेष ज़ोर दे रही है।
गुणवत्ता निरीक्षण और समय-सीमा
मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने भारत सरकार, राज्य सरकार, थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन (TPI) और जल निगम स्तर पर नियमित निरीक्षण जारी रखने के निर्देश दिए। बैठक में पुरानी पेयजल योजनाओं के तहत स्वीकृत मरम्मत और अनुरक्षण कार्यों को एक माह के भीतर पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया। इसके अलावा 7,682 टैंक टाइप स्टैंड पोस्ट (TTSP), फ्लोराइड रिमूवल यूनिट (FRU) और आर्सेनिक रिमूवल यूनिट (ARU) से जुड़े कार्यों को भी अगले एक महीने में पूरा करने के निर्देश दिए गए।
जन-जागरूकता अभियान: जल चौपाल और जल पदयात्रा
जनभागीदारी बढ़ाने और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए मंत्री ने विशेष अभियान चलाने पर ज़ोर दिया। उन्होंने 15 जून तक प्रत्येक ज़िले के कम-से-कम 10 गाँवों में 'जल चौपाल' आयोजित करने के निर्देश दिए। साथ ही अगले दो सप्ताह के भीतर नियमित जलापूर्ति वाले गाँवों में 10 किलोमीटर लंबी 'जल पदयात्रा' निकालने को कहा गया। 'जल सारथी ऐप' के व्यापक प्रचार-प्रसार और भूगर्भ जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने पर भी विशेष बल दिया गया।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार की मंशा स्पष्ट है — लंबित कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करना और प्रत्येक गाँव तक स्वच्छ पेयजल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना। अधिकारियों के अनुसार, जहाँ भी निर्माण गुणवत्ता में कमी पाई जाएगी, संबंधित एजेंसियों और ठेकेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। आने वाले हफ्तों में जल चौपाल और पदयात्राओं के ज़रिए ज़मीनी स्तर पर जन-जागरूकता की वास्तविक परीक्षा होगी।