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जल जीवन मिशन: यूपी में गुणवत्ता से समझौता नहीं, स्वतंत्र देव सिंह ने दिए कड़ी कार्रवाई के निर्देश

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जल जीवन मिशन: यूपी में गुणवत्ता से समझौता नहीं, स्वतंत्र देव सिंह ने दिए कड़ी कार्रवाई के निर्देश

सारांश

उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन की रफ़्तार तेज़ हुई — 57,242 गाँवों में जलापूर्ति शुरू, पर मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने साफ़ कहा: गुणवत्ता में ज़रा भी ढील नहीं चलेगी। खामी मिली तो कार्रवाई तय है।

मुख्य बातें

जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने 8 जून 2026 को लखनऊ में जल जीवन मिशन की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की।
प्रदेश में 36,364 नई पेयजल योजनाओं से 85,163 राजस्व गाँव जोड़े जा रहे हैं; 57,242 गाँवों में नियमित जलापूर्ति शुरू।
पुरानी योजनाओं की मरम्मत और 7,682 TTSP/FRU/ARU कार्य एक माह में पूरे करने का निर्देश।
15 जून तक प्रत्येक ज़िले के 10 गाँवों में 'जल चौपाल' और 10 किमी 'जल पदयात्रा' का आदेश।
गुणवत्ता में खामी पाए जाने पर TPI, जल निगम और संबंधित एजेंसियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित।

उत्तर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने 8 जून 2026 को लखनऊ स्थित जल निगम (ग्रामीण) के सभागार में नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट किया कि जल जीवन मिशन की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जहाँ भी अनियमितता या खामियाँ पाई जाएँ, वहाँ तत्काल कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। 'हर घर नल से जल' योजना को शत-प्रतिशत लागू करने के लिए राज्य सरकार ने अभियान को और तेज़ कर दिया है।

बैठक में कौन-कौन शामिल हुए

इस उच्चस्तरीय बैठक में अपर मुख्य सचिव, जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक, राज्य स्वच्छ गंगा मिशन, राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन तथा भूगर्भ जल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में जल जीवन मिशन के अंतर्गत चल रही परियोजनाओं की भौतिक और वित्तीय प्रगति की विस्तारपूर्वक समीक्षा की गई।

मुख्य घटनाक्रम: कितने गाँव, कितनी योजनाएँ

अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में 36,364 नई पेयजल योजनाओं के माध्यम से 85,163 राजस्व गाँवों को जोड़ा जा रहा है। इसके अतिरिक्त 5,978 पुरानी योजनाओं के ज़रिए 10,951 गाँवों को लाभ पहुँचाया जा रहा है। वर्तमान में 57,242 राजस्व गाँवों में नियमित जलापूर्ति शुरू हो चुकी है, जबकि शेष गाँवों में निर्माण कार्य तेज़ी से जारी है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार जल जीवन मिशन की समयबद्ध पूर्णता पर विशेष ज़ोर दे रही है।

गुणवत्ता निरीक्षण और समय-सीमा

मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने भारत सरकार, राज्य सरकार, थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन (TPI) और जल निगम स्तर पर नियमित निरीक्षण जारी रखने के निर्देश दिए। बैठक में पुरानी पेयजल योजनाओं के तहत स्वीकृत मरम्मत और अनुरक्षण कार्यों को एक माह के भीतर पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया। इसके अलावा 7,682 टैंक टाइप स्टैंड पोस्ट (TTSP), फ्लोराइड रिमूवल यूनिट (FRU) और आर्सेनिक रिमूवल यूनिट (ARU) से जुड़े कार्यों को भी अगले एक महीने में पूरा करने के निर्देश दिए गए।

जन-जागरूकता अभियान: जल चौपाल और जल पदयात्रा

जनभागीदारी बढ़ाने और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए मंत्री ने विशेष अभियान चलाने पर ज़ोर दिया। उन्होंने 15 जून तक प्रत्येक ज़िले के कम-से-कम 10 गाँवों में 'जल चौपाल' आयोजित करने के निर्देश दिए। साथ ही अगले दो सप्ताह के भीतर नियमित जलापूर्ति वाले गाँवों में 10 किलोमीटर लंबी 'जल पदयात्रा' निकालने को कहा गया। 'जल सारथी ऐप' के व्यापक प्रचार-प्रसार और भूगर्भ जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने पर भी विशेष बल दिया गया।

आगे क्या होगा

राज्य सरकार की मंशा स्पष्ट है — लंबित कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करना और प्रत्येक गाँव तक स्वच्छ पेयजल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना। अधिकारियों के अनुसार, जहाँ भी निर्माण गुणवत्ता में कमी पाई जाएगी, संबंधित एजेंसियों और ठेकेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। आने वाले हफ्तों में जल चौपाल और पदयात्राओं के ज़रिए ज़मीनी स्तर पर जन-जागरूकता की वास्तविक परीक्षा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

242 गाँवों में जलापूर्ति शुरू होना निश्चित रूप से प्रगति है, लेकिन असली परीक्षा आपूर्ति की निरंतरता और गुणवत्ता की है — न कि केवल पाइप बिछाने की। 'खामी मिलने पर कार्रवाई' जैसे बयान तब तक प्रभावी नहीं होते जब तक TPI रिपोर्टें सार्वजनिक न हों और दोषी ठेकेदारों पर वास्तविक दंड न लगे। जल चौपाल और पदयात्रा जैसे जन-जागरूकता कार्यक्रम सराहनीय हैं, परंतु भूगर्भ जल संरक्षण एक संरचनात्मक चुनौती है जिसका समाधान केवल अभियानों से नहीं होगा। यूपी जैसे बड़े राज्य में योजना की सफलता का पैमाना यह होगा कि पाँच साल बाद भी वही नल चालू हैं या नहीं।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जल जीवन मिशन के तहत उत्तर प्रदेश में अब तक कितने गाँवों में जलापूर्ति शुरू हुई है?
अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में 57,242 राजस्व गाँवों में नियमित जलापूर्ति शुरू हो चुकी है। 36,364 नई पेयजल योजनाओं के ज़रिए 85,163 गाँवों को जोड़ा जा रहा है और शेष गाँवों में निर्माण कार्य जारी है।
स्वतंत्र देव सिंह ने गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्या निर्देश दिए?
जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने भारत सरकार, राज्य सरकार, थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन (TPI) और जल निगम स्तर पर नियमित निरीक्षण जारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जहाँ भी अनियमितता या खामी पाई जाए, वहाँ कड़ी कार्रवाई की जाए।
जल चौपाल और जल पदयात्रा क्या है और कब आयोजित होगी?
'जल चौपाल' गाँव स्तर पर जल संरक्षण जागरूकता के लिए आयोजित बैठकें हैं, जिन्हें 15 जून तक प्रत्येक ज़िले के कम-से-कम 10 गाँवों में आयोजित करने का निर्देश दिया गया है। 'जल पदयात्रा' 10 किलोमीटर लंबी जागरूकता रैली है, जो अगले दो सप्ताह में नियमित जलापूर्ति वाले गाँवों में निकाली जाएगी।
TTSP, FRU और ARU क्या हैं और इन्हें कब तक पूरा करना है?
टैंक टाइप स्टैंड पोस्ट (TTSP), फ्लोराइड रिमूवल यूनिट (FRU) और आर्सेनिक रिमूवल यूनिट (ARU) पेयजल शुद्धिकरण से जुड़ी संरचनाएँ हैं। बैठक में इनसे संबंधित 7,682 कार्यों को एक महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
'जल सारथी ऐप' का क्या उद्देश्य है?
'जल सारथी ऐप' जल जीवन मिशन की निगरानी और जन-जागरूकता के लिए बनाया गया डिजिटल माध्यम है। मंत्री ने इसके व्यापक प्रचार-प्रसार और भूगर्भ जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने पर विशेष बल दिया।
राष्ट्र प्रेस
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