27 जुलाई 2026
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जेई-एईएस प्रभावित गांवों में नल जल: स्वतंत्र देव सिंह ने दिए 24 घंटे तीन शिफ्ट में काम के निर्देश

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जेई-एईएस प्रभावित गांवों में नल जल: स्वतंत्र देव सिंह ने दिए 24 घंटे तीन शिफ्ट में काम के निर्देश

सारांश

जेई और एईएस से प्रभावित गांवों में अब तक नल का पानी नहीं पहुँचा — जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने इसे बदलने के लिए 24 घंटे तीन शिफ्ट में काम का आदेश दिया और दो महीने में सभी लंबित परियोजनाएँ पूरी करने की समयसीमा तय की।

मुख्य बातें

जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने 27 जुलाई को लखनऊ में जल जीवन मिशन की समीक्षा बैठक की।
जेई और एईएस प्रभावित उन गांवों में 24 घंटे तीन शिफ्टों में काम का निर्देश, जहाँ अभी नल जल नहीं पहुँचा।
लापरवाही पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी।
जल निगम (ग्रामीण) की सभी लंबित परियोजनाएँ दो महीने के भीतर पूरी करने का आदेश।
प्रत्येक जिले में जल चौपाल और 'जल सारथी' ऐप के ज़रिए जनप्रतिनिधियों को प्रगति रिपोर्ट देने के निर्देश।
पाइपलाइन बिछाने से क्षतिग्रस्त सड़कों की तत्काल मरम्मत सुनिश्चित करने का आदेश।

उत्तर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने 27 जुलाई को लखनऊ में जल जीवन मिशन की समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए कि जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से प्रभावित उन सभी गांवों में, जहाँ अभी तक नल से जलापूर्ति आरंभ नहीं हो पाई है, 24 घंटे तीन शिफ्टों में कार्य कर पेयजल व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

समीक्षा बैठक में मुख्य निर्देश

राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन कार्यालय में आयोजित इस बैठक में मंत्री ने कहा कि सभी परियोजनाएँ तय समयसीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता मानकों के साथ पूरी की जाएँ। उन्होंने जलापूर्ति से जुड़ी शिकायतों के त्वरित निस्तारण और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने पर जोर दिया।

स्वतंत्र देव सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे नियमित रूप से ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण करें और पेयजल संबंधी समस्याओं का मौके पर ही समाधान करें। सिंगल विलेज योजनाओं के लंबित कार्य समयबद्ध ढंग से पूरे करने तथा पाइपलाइन बिछाने के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की तत्काल मरम्मत के भी निर्देश दिए गए। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सड़क बहाली में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

जल जीवन मिशन के प्रभाव का आकलन

मंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे गांवों में जाकर जल जीवन मिशन के वास्तविक प्रभाव का मूल्यांकन करें। उन्होंने कहा कि जलजनित बीमारियों में आई कमी और ग्रामीण जीवन में हुए बदलावों का विधिवत अध्ययन किया जाए। साथ ही लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल के प्रति जागरूक करने के अभियान भी चलाए जाएँ।

यह ऐसे समय में आया है जब जेई और एईएस जैसी जलजनित बीमारियाँ उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में हर वर्ष बड़ी संख्या में बच्चों को प्रभावित करती हैं। गौरतलब है कि स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता इन बीमारियों की रोकथाम में निर्णायक भूमिका निभाती है।

जल अर्पण और जन जागरूकता

जिन गांवों में नल से जलापूर्ति पहले से शुरू हो चुकी है, वहाँ 'जल अर्पण' कार्यक्रमों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। मंत्री ने प्रत्येक जिले में नियमित रूप से जल चौपाल आयोजित करने और जनप्रतिनिधियों को मिशन की प्रगति रिपोर्ट पोर्टल तथा 'जल सारथी' ऐप के माध्यम से उपलब्ध कराने को कहा।

पुरानी परियोजनाओं में देरी पर नाराजगी

जल निगम (ग्रामीण) की पुरानी परियोजनाओं में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए स्वतंत्र देव सिंह ने अधिकारियों को दो महीने के भीतर सभी लंबित परियोजनाएँ पूरी करने का सख्त निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि यदि तय समयसीमा का पालन नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा।

आने वाले हफ्तों में मंत्री के इन निर्देशों के क्रियान्वयन की निगरानी होगी और यह देखना अहम होगा कि जेई-एईएस प्रभावित गांवों तक समयसीमा में नल का पानी पहुँचता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जमीनी क्रियान्वयन की रफ्तार हमेशा सवालों के घेरे में रही है। दो महीने की नई समयसीमा और तीन-शिफ्ट कार्य का आदेश तत्परता दिखाता है, पर असली कसौटी यह होगी कि मानसून के बीच क्षतिग्रस्त सड़कों और दूरदराज के गांवों में यह लक्ष्य व्यवहारिक रूप से पूरा हो पाता है या नहीं। जवाबदेही तंत्र — 'जल सारथी' ऐप और जल चौपाल — सही दिशा में कदम हैं, लेकिन इनकी सफलता डेटा की पारदर्शिता और स्थानीय निगरानी पर निर्भर करेगी।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेई-एईएस प्रभावित गांवों में नल जल के लिए क्या निर्देश दिए गए हैं?
जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने 27 जुलाई को निर्देश दिए कि जेई और एईएस प्रभावित उन सभी गांवों में, जहाँ अभी नल से जलापूर्ति नहीं हुई है, 24 घंटे तीन शिफ्टों में काम कर पेयजल व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित की जाए। लापरवाही पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
जल निगम (ग्रामीण) की लंबित परियोजनाओं की समयसीमा क्या तय की गई है?
मंत्री ने अधिकारियों को दो महीने के भीतर जल निगम (ग्रामीण) की सभी लंबित परियोजनाएँ पूरी करने का निर्देश दिया है। समयसीमा का पालन न होने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
'जल सारथी' ऐप और जल चौपाल क्या हैं?
'जल सारथी' ऐप एक डिजिटल मंच है जिसके ज़रिए जनप्रतिनिधियों को जल जीवन मिशन की प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाती है। जल चौपाल प्रत्येक जिले में आयोजित होने वाली जन-संवाद बैठक है, जिसमें पेयजल संबंधी समस्याओं और मिशन की स्थिति पर चर्चा होती है।
जेई और एईएस से पेयजल का क्या संबंध है?
जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) ऐसी बीमारियाँ हैं जो दूषित जल और खराब स्वच्छता से जुड़ी होती हैं और उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में हर वर्ष बड़ी संख्या में बच्चों को प्रभावित करती हैं। स्वच्छ नल जल की उपलब्धता इन बीमारियों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
'जल अर्पण' कार्यक्रम क्या है और इसे क्यों तेज किया जा रहा है?
'जल अर्पण' कार्यक्रम उन गांवों में आयोजित किया जाता है जहाँ नल से जलापूर्ति शुरू हो चुकी है, ताकि लोगों को स्वच्छ पेयजल के महत्व के प्रति जागरूक किया जा सके। मंत्री ने इसे और अधिक गांवों में तेजी से आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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