UP जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह की चेतावनी: परियोजनाओं में देरी पर अधिकारियों को नोटिस से निलंबन तक की कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने मंगलवार, 28 जुलाई को लखनऊ के उदयगंज स्थित सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के मुख्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वीकृत और निर्माणाधीन परियोजनाओं में किसी भी स्तर पर शिथिलता अथवा अनावश्यक देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी — और लापरवाह अधिकारियों के विरुद्ध नोटिस से लेकर निलंबन तक की विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
समीक्षा बैठक में क्या हुआ
जलशक्ति मंत्री ने बैठक में परियोजनावार भौतिक एवं वित्तीय प्रगति, स्वीकृत लागत, बजट आवंटन और वास्तविक व्यय की विस्तृत पड़ताल की। इस दौरान कई परियोजनाओं में धीमी गति और उपलब्ध बजट के अनुपात में कम खर्च की स्थिति सामने आई, जिस पर उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त की।
उन्होंने विभागाध्यक्ष को निर्देश दिए कि जिन अधिकारियों की वजह से परियोजनाएँ पिछड़ रही हैं या बजट का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा, उन्हें तत्काल नोटिस जारी कर जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर निलंबन की कार्रवाई भी की जाएगी।
अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश
स्वतंत्र देव सिंह ने सभी मुख्य अभियंताओं को निर्देशित किया कि वे परियोजनाओं की नियमित निगरानी करें और तकनीकी, प्रशासनिक अथवा अन्य बाधाओं का समय रहते समाधान निकालें। उन्होंने कहा कि सरकार जनहित और प्रदेश के विकास को ध्यान में रखकर पर्याप्त बजट उपलब्ध कराती है, इसलिए निर्धारित समय में धनराशि का प्रभावी उपयोग और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करना अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने दो टूक कहा कि शासन की प्राथमिकताओं से जुड़े विकास कार्यों में उदासीनता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगी और अगली समीक्षा बैठक में प्रत्येक परियोजना की दोबारा समीक्षा की जाएगी।
परिसंपत्तियों के रखरखाव पर जोर
बैठक में जलशक्ति मंत्री ने सिंचाई विभाग की परिसंपत्तियों के रखरखाव को लेकर भी विशेष निर्देश दिए। उन्होंने पुल, पुलियों, साइफन और अन्य विभागीय संरचनाओं का सर्वेक्षण कर मरम्मत कराने के साथ-साथ विशेष अभियान चलाकर डेंटिंग, पेंटिंग और सौंदर्यीकरण का कार्य आगामी दिसंबर 2026 तक हर हाल में पूरा कराने के निर्देश दिए।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार विकास परियोजनाओं की समयबद्ध पूर्णता को अपनी प्राथमिकता बता रही है। गौरतलब है कि सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की परियोजनाएँ किसानों की सिंचाई सुविधाओं से सीधे जुड़ी हैं, इसलिए इनमें देरी का असर ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। अगली समीक्षा बैठक में लक्ष्य न पूरा करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।