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यूपी एफएसडीए के आउटसोर्स बेंच केमिस्टों ने बहाली की मांग, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के आवास पर प्रदर्शन

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यूपी एफएसडीए के आउटसोर्स बेंच केमिस्टों ने बहाली की मांग, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के आवास पर प्रदर्शन

सारांश

उत्तर प्रदेश में एफएसडीए प्रयोगशालाओं के आउटसोर्स बेंच केमिस्ट सड़क पर उतरे — बिना नोटिस हटाए जाने और 347 नई नियुक्तियों के बाद। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के दरवाज़े पर दस्तक, बहाली और कॉरपोरेशन में समायोजन की माँग।

मुख्य बातें

यूपी एफएसडीए की 18 मंडलों की प्रयोगशालाओं में कार्यरत आउटसोर्स बेंच केमिस्टों को बिना नोटिस हटाया गया।
केमिस्टों ने 1 नवंबर 2022 से सेवा दी है और प्रत्येक ने 700 से अधिक सैंपल प्रोसेस किए।
विभाग ने 347 नए पद सृजित कर नई नियुक्तियाँ कीं, जिसके बाद आउटसोर्स केमिस्टों को हटाया गया।
केमिस्टों ने हटाने को औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 का उल्लंघन बताया।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के आवास पर सोमवार को बड़ी संख्या में प्रदर्शन, बहाली और नए कॉरपोरेशन में समायोजन की माँग।

उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग की प्रयोगशालाओं में 1 नवंबर 2022 से आउटसोर्सिंग के ज़रिए कार्यरत बेंच केमिस्टों को अचानक हटाए जाने के विरोध में सोमवार, 14 सितंबर 2026 को लखनऊ में डिप्टी मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के आवास के बाहर बड़ी संख्या में केमिस्ट एकत्र हुए और अपनी बहाली की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें बिना किसी पूर्व नोटिस या लिखित आदेश के सेवा से बाहर कर दिया गया।

मुख्य घटनाक्रम

प्रदेश के 18 मंडलों में स्थित एफएसडीए प्रयोगशालाओं में कार्यरत ये केमिस्ट बैनर और पोस्टर लेकर डिप्टी सीएम आवास के बाहर प्रदर्शन करते रहे। उनकी मुख्य माँग है कि उन्हें सभी 18 मंडलों की प्रयोगशालाओं में पुनः बहाल किया जाए और नवगठित कॉरपोरेशन के अंतर्गत उनकी सेवाएँ जारी रखी जाएँ।

विभाग से हटाए गए बेंच केमिस्ट गोपाल रस्तोगी ने बताया, '1 नवंबर 2022 से हम आउटसोर्सिंग के ज़रिए बेंच केमिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं। प्रयोगशालाओं में हमने अब तक 11 भर्तियाँ की हैं और हर व्यक्ति ने 700 से अधिक सैंपल प्रोसेस किए हैं। अब विभाग ने 347 नए पद सृजित कर उन पर नई नियुक्तियाँ की हैं और हमें यह कहकर हटाया जा रहा है कि नए कर्मचारी आ गए हैं।'

केमिस्टों के कानूनी आरोप

रस्तोगी ने यह भी कहा, 'यह पूरी तरह निंदनीय और सरकारी नियमों तथा औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत गैर-कानूनी है। बार-बार गुजारिश के बावजूद सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया, इसीलिए हम डिप्टी सीएम के सामने अपनी बात रखने यहाँ आए हैं।' प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि बिना लिखित आदेश के हटाना श्रम कानूनों का उल्लंघन है।

कॉरपोरेशन लागू होने से पहले ही बर्खास्तगी

एक अन्य बेंच केमिस्ट सुशील गौतम ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा कॉरपोरेशन का उद्घाटन किए जाने के महज़ दो दिन पहले ही उन्हें बिना किसी सूचना के हटा दिया गया। गौतम ने कहा, 'कॉरपोरेशन का उद्घाटन मुख्यमंत्री ने दो-तीन दिन पहले किया था और हम अन्य विभागों के आउटसोर्स कर्मचारियों की तरह ही काम कर रहे थे। हम बस यही चाहते हैं कि सभी प्रयोगशालाओं में हमें वापस लिया जाए और कॉरपोरेशन के अंतर्गत हमारी सेवाएँ जारी रखी जाएँ।'

सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति

गौरतलब है कि यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब एफएसडीए के नवगठित कॉरपोरेशन का उद्घाटन अभी हाल ही में हुआ है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। केमिस्टों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी बहाली नहीं हुई तो वे आंदोलन को और तेज़ करेंगे।

यह ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षा को लेकर व्यापक चिंता बनी हुई है। खाद्य सुरक्षा से जुड़ी प्रयोगशालाओं में अनुभवी केमिस्टों का अचानक हटाया जाना सार्वजनिक स्वास्थ्य परीक्षण प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है, जिस पर विशेषज्ञों की नज़र बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन खाद्य सुरक्षा प्रयोगशालाओं जैसे संवेदनशील विभाग में अनुभवी केमिस्टों को अचानक बाहर करना सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी के लिए चिंताजनक है। 347 नए पदों के सृजन और मौजूदा अनुभवी कर्मचारियों को एक साथ हटाने की यह रणनीति श्रम कानूनों की भावना के विपरीत दिखती है। कॉरपोरेशन के गठन का मकसद जहाँ व्यवस्था को सुदृढ़ करना था, वहीं इसके क्रियान्वयन में पारदर्शिता की कमी स्पष्ट झलकती है — जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी है।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी एफएसडीए बेंच केमिस्टों को क्यों हटाया गया?
विभाग ने 347 नए पद सृजित कर उन पर नई नियुक्तियाँ की हैं और आउटसोर्स बेंच केमिस्टों को यह कहकर हटाया है कि नए कर्मचारी आ गए हैं। केमिस्टों का आरोप है कि उन्हें बिना किसी पूर्व नोटिस या लिखित आदेश के सेवा से बाहर किया गया।
प्रदर्शनकारी बेंच केमिस्टों की मुख्य माँगें क्या हैं?
प्रदर्शनकारी केमिस्ट चाहते हैं कि उन्हें प्रदेश के सभी 18 मंडलों की एफएसडीए प्रयोगशालाओं में बहाल किया जाए और नवगठित कॉरपोरेशन के अंतर्गत उनकी सेवाएँ जारी रखी जाएँ।
केमिस्टों ने किस कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया है?
केमिस्टों ने कहा है कि बिना नोटिस हटाया जाना सरकारी नियमों और औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत गैर-कानूनी है। उनके अनुसार यह श्रम कानूनों की सीधी अवहेलना है।
ये केमिस्ट कब से एफएसडीए प्रयोगशालाओं में काम कर रहे थे?
ये केमिस्ट 1 नवंबर 2022 से आउटसोर्सिंग के ज़रिए एफएसडीए प्रयोगशालाओं में बेंच केमिस्ट के रूप में कार्यरत थे। इस दौरान उन्होंने 11 भर्तियों में भाग लिया और हर व्यक्ति ने 700 से अधिक सैंपल प्रोसेस किए।
एफएसडीए कॉरपोरेशन के गठन का इस विवाद से क्या संबंध है?
केमिस्टों का कहना है कि मुख्यमंत्री द्वारा नए कॉरपोरेशन के उद्घाटन से ठीक दो दिन पहले ही उन्हें हटाया गया। उनकी माँग है कि उन्हें इसी नवगठित कॉरपोरेशन के अंतर्गत समायोजित किया जाए।
राष्ट्र प्रेस
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