यूपी एफएसडीए के आउटसोर्स बेंच केमिस्टों ने बहाली की मांग, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के आवास पर प्रदर्शन
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग की प्रयोगशालाओं में 1 नवंबर 2022 से आउटसोर्सिंग के ज़रिए कार्यरत बेंच केमिस्टों को अचानक हटाए जाने के विरोध में सोमवार, 14 सितंबर 2026 को लखनऊ में डिप्टी मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के आवास के बाहर बड़ी संख्या में केमिस्ट एकत्र हुए और अपनी बहाली की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें बिना किसी पूर्व नोटिस या लिखित आदेश के सेवा से बाहर कर दिया गया।
मुख्य घटनाक्रम
प्रदेश के 18 मंडलों में स्थित एफएसडीए प्रयोगशालाओं में कार्यरत ये केमिस्ट बैनर और पोस्टर लेकर डिप्टी सीएम आवास के बाहर प्रदर्शन करते रहे। उनकी मुख्य माँग है कि उन्हें सभी 18 मंडलों की प्रयोगशालाओं में पुनः बहाल किया जाए और नवगठित कॉरपोरेशन के अंतर्गत उनकी सेवाएँ जारी रखी जाएँ।
विभाग से हटाए गए बेंच केमिस्ट गोपाल रस्तोगी ने बताया, '1 नवंबर 2022 से हम आउटसोर्सिंग के ज़रिए बेंच केमिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं। प्रयोगशालाओं में हमने अब तक 11 भर्तियाँ की हैं और हर व्यक्ति ने 700 से अधिक सैंपल प्रोसेस किए हैं। अब विभाग ने 347 नए पद सृजित कर उन पर नई नियुक्तियाँ की हैं और हमें यह कहकर हटाया जा रहा है कि नए कर्मचारी आ गए हैं।'
केमिस्टों के कानूनी आरोप
रस्तोगी ने यह भी कहा, 'यह पूरी तरह निंदनीय और सरकारी नियमों तथा औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत गैर-कानूनी है। बार-बार गुजारिश के बावजूद सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया, इसीलिए हम डिप्टी सीएम के सामने अपनी बात रखने यहाँ आए हैं।' प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि बिना लिखित आदेश के हटाना श्रम कानूनों का उल्लंघन है।
कॉरपोरेशन लागू होने से पहले ही बर्खास्तगी
एक अन्य बेंच केमिस्ट सुशील गौतम ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा कॉरपोरेशन का उद्घाटन किए जाने के महज़ दो दिन पहले ही उन्हें बिना किसी सूचना के हटा दिया गया। गौतम ने कहा, 'कॉरपोरेशन का उद्घाटन मुख्यमंत्री ने दो-तीन दिन पहले किया था और हम अन्य विभागों के आउटसोर्स कर्मचारियों की तरह ही काम कर रहे थे। हम बस यही चाहते हैं कि सभी प्रयोगशालाओं में हमें वापस लिया जाए और कॉरपोरेशन के अंतर्गत हमारी सेवाएँ जारी रखी जाएँ।'
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति
गौरतलब है कि यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब एफएसडीए के नवगठित कॉरपोरेशन का उद्घाटन अभी हाल ही में हुआ है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। केमिस्टों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी बहाली नहीं हुई तो वे आंदोलन को और तेज़ करेंगे।
यह ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षा को लेकर व्यापक चिंता बनी हुई है। खाद्य सुरक्षा से जुड़ी प्रयोगशालाओं में अनुभवी केमिस्टों का अचानक हटाया जाना सार्वजनिक स्वास्थ्य परीक्षण प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है, जिस पर विशेषज्ञों की नज़र बनी रहेगी।