क्या बलूचिस्तान में बेरोजगार फार्मासिस्टों ने भर्ती प्रक्रिया पर सरकार की आलोचना की?
सारांश
Key Takeaways
- बलूचिस्तान में बेरोजगार फार्मासिस्टों की संख्या 2,000 से अधिक है।
- सरकार की भर्ती नीति पर सवाल उठाए गए हैं।
- पारदर्शिता और मेरिट आधारित प्रक्रिया की मांग उठाई गई है।
- निजी अस्पतालों में फार्मासिस्टों की नियुक्ति की कमी पर चिंता व्यक्त की गई।
- प्रदर्शन के दौरान मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित की गईं।
क्वेटा, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बेरोजगार फार्मासिस्टों ने सरकार की भर्ती नीति को लेकर गंभीर असहमति व्यक्त की है। अनएम्प्लॉयड फार्मासिस्ट्स एक्शन कमेटी (यूपीएसी) ने 2,000 से अधिक बेरोजगार फार्मासिस्टों की तुलना में अत्यधिक सीमित पदों की घोषणा को "ऊंट के मुंह में जीरा" करार दिया है।
बुधवार को क्वेटा प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में, यूपीएसी के महासचिव कासिम अज़ीज़ मेंगल ने सरकार के निर्णय को अस्वीकार्य बताया। पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक डॉन के अनुसार, उन्होंने अधिक पद सृजित करने और पारदर्शी एवं योग्यता आधारित (मेरिट-बेस्ड) भर्ती प्रक्रिया की मांग की।
मेंगल ने आरोप लगाया कि बीपीएस-17 पदों पर वॉक-इन इंटरव्यू के माध्यम से फार्मासिस्टों की नियुक्ति एक गैर-पारदर्शी प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य केवल अपने चहेतों और सिफारिशी व्यक्तियों को शामिल करना है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में न तो मेरिट का पालन हो रहा है और न ही भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता है।
उन्होंने निजी अस्पतालों में फार्मेसी विभागों की अनुपस्थिति और वहां फार्मासिस्टों की नियुक्ति न होने पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग द्वारा हाल ही में जारी अधिसूचना की भी आलोचना की, जिसमें डॉक्टरों और फार्मासिस्टों की संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) आधार पर भर्तियों का विज्ञापन दिया गया है।
इस बीच, मंगलवार को क्वेटा में कई सरकारी कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया, जब पुलिस ने रेड ज़ोन में प्रस्तावित धरने को रोक दिया। कर्मचारी डिस्पैरिटी रिडक्शन अलाउंस लागू करने की मांग कर रहे थे। स्थानीय मीडिया के अनुसार, विरोध प्रदर्शन के दौरान क्वेटा और आस-पास के क्षेत्रों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं।
द बलूचिस्तान पोस्ट के अनुसार, बलूचिस्तान भर से सरकारी कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर क्वेटा पहुंचे थे। हाल के दिनों में इन प्रदर्शनों के कारण कई सरकारी कार्यालयों का कार्य प्रभावित हुआ है।
सोमवार रात प्रशासन ने प्रमुख प्रवेश मार्गों पर कंटेनर लगाकर रेड ज़ोन को पूरी तरह बंद कर दिया, ताकि प्रदर्शनकारी वहां न पहुँच सकें। इसके बाद कर्मचारी क्वेटा प्रेस क्लब के बाहर एकत्र होने लगे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोका और कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद बलूचिस्तान ग्रैंड एलायंस ने "जेल भरो" आंदोलन की घोषणा की।