क्या यूपी में धर्म परिवर्तन के आरोप में एनजीओ पर केंद्रीय गृह मंत्रालय की कार्रवाई है?

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क्या यूपी में धर्म परिवर्तन के आरोप में एनजीओ पर केंद्रीय गृह मंत्रालय की कार्रवाई है?

सारांश

उत्तर प्रदेश में एक एनजीओ पर धर्म परिवर्तन के गंभीर आरोपों के चलते केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया है। इस कार्रवाई का उद्देश्य विदेशी फंड्स के दुरुपयोग और धर्मांतरण पर रोक लगाना है। क्या यह कदम अन्य एनजीओ के लिए चेतावनी बनेगा?

Key Takeaways

  • जीईडब्ल्यूएस का एफसीआरए लाइसेंस रद्द किया गया है।
  • धर्म परिवर्तन के आरोपों की गंभीरता पर कार्रवाई हुई है।
  • केंद्र सरकार विदेशी फंड्स के दुरुपयोग पर कड़ी नजर रख रही है।

नई दिल्ली, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में धर्म परिवर्तन के गंभीर आरोपों में फंसे एक एनजीओ पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कड़ा कदम उठाया है। जानकारी के अनुसार, संतकबीर नगर जिले से संचालित गाइडेंस एजुकेशनल वेलफेयर सोसाइटी (जीईडब्ल्यूएस) का एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया गया है।

यह संस्था शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर विदेशी चंदा प्राप्त करती थी, लेकिन जांच में इसे धर्मांतरण को बढ़ावा देने का दोषी पाया गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जीईडब्ल्यूएस को नोटिस जारी किया है कि जब तक संगठन वैध दस्तावेज और स्पष्टीकरण नहीं देता, तब तक उसका एफसीआरए पंजीकरण रद्द रहेगा।

अब यह संस्था विदेशी फंड्स प्राप्त नहीं कर सकती और न ही उनका उपयोग कर सकती है। यह कार्रवाई एफसीआरए अधिनियम, 2010 के तहत की गई है, जिसमें पिछले 5 वर्षों (लगभग 2020-2025) के वित्तीय दस्तावेजों में कई उल्लंघन पाए गए हैं। उल्लंघनों में फंड्स का गलत उपयोग, उद्देश्यों से विचलन और संदिग्ध लेनदेन शामिल हैं।

यह मामला 2021 से चर्चा में है, जब जीईडब्ल्यूएस पर धर्म परिवर्तन के आरोप लगे थे। आरोप था कि संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण कार्यक्रमों की आड़ में गरीब और आदिवासी परिवारों को लुभाकर ईसाई धर्म में परिवर्तित करवा रही थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2021 में ही संतकबीर नगर स्थित संस्था के कार्यालय पर छापेमारी की थी। छापे में कई वित्तीय गड़बड़ियां मिलीं, जिसमें फंड्स का गलत उपयोग और दस्तावेजों में छेड़छाड़ के सबूत सामने आए। ईडी ने संस्था के अध्यक्ष और अन्य कर्मचारियों से लंबी पूछताछ की थी।

इसके बाद गृह मंत्रालय ने जीईडब्ल्यूएस के एफसीआरए नवीनीकरण आवेदन की गहन जांच की। जांच में पाया गया कि विदेशी चंदे का इस्तेमाल संगठन के घोषित उद्देश्यों (शिक्षा और वेलफेयर) से अलग किया गया था। एमएचए के हालिया दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि कोई एनजीओ जबरन धर्म परिवर्तन, एंटी-डेवलपमेंट गतिविधियां या सामाजिक/धार्मिक सद्भाव बिगाड़ने में शामिल पाया जाता है, तो उसका एफसीआरए रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है। जीईडब्ल्यूएस पर ऐसे ही आरोप सिद्ध हुए हैं।

यह कार्रवाई केंद्र सरकार की उस नीति का हिस्सा है जिसमें धर्मांतरण और विदेशी फंड्स के दुरुपयोग पर सख्त निगरानी रखी जा रही है। पिछले वर्षों में कई एनजीओ के एफसीआरए लाइसेंस रद्द हो चुके हैं, खासकर उन पर जहां धर्म परिवर्तन या संदिग्ध गतिविधियों के आरोप थे। उत्तर प्रदेश में एंटी-कन्वर्जन लॉ लागू होने के बाद ऐसे मामलों पर नजर बढ़ गई है।

Point of View

ताकि समाज में सद्भावना बनी रहे।
NationPress
21/01/2026

Frequently Asked Questions

एफसीआरए लाइसेंस क्या है?
एफसीआरए लाइसेंस विदेशी चंदा प्राप्त करने के लिए आवश्यक है, जो एनजीओ को विदेशी स्रोतों से धन प्राप्त करने की अनुमति देता है।
क्यों रद्द किया गया जीईडब्ल्यूएस का लाइसेंस?
धर्मांतरण को बढ़ावा देने के आरोपों के चलते जीईडब्ल्यूएस का एफसीआरए लाइसेंस रद्द किया गया।
क्या यह कार्रवाई अन्य एनजीओ पर भी होगी?
हाँ, यदि अन्य एनजीओ पर भी ऐसे ही आरोप सिद्ध होते हैं, तो उनकी कार्रवाई भी हो सकती है।
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