क्या यूपी में एसपीजी और एनएसजी कमांडो की तर्ज पर 'साइबर कमांडो' तैयार किए गए हैं?
सारांश
Key Takeaways
- साइबर कमांडो की टीम में 15 पुलिसकर्मी हैं।
- इनका प्रशिक्षण एसपीजी और एनएसजी कमांडो की तर्ज पर किया गया है।
- मुख्य उद्देश्य साइबर ठगी और डिजिटल अपराधों पर अंकुश लगाना है।
- हाईटेक उपकरणों का उपयोग किया जाएगा।
- यह पहल डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में है।
लखनऊ, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राज्य सरकार ने साइबर अपराधियों की गतिविधियों पर नियंत्रण पाने और साइबर अपराधों को रोकने के लिए एक नई विशेष टीम "साइबर कमांडो" स्थापित की है।
इन कमांडो को एसपीजी और एनएसजी कमांडो की तर्ज पर देश के प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा साइबर अपराध और धोखाधड़ी को रोकने के लिए प्रशिक्षण दिया गया है। जैसे एनएसजी और एसपीजी कमांडो अपने कार्यक्षेत्र में कुशल होते हैं, इसी तरह यह टीम भी साइबर अपराधों को रोकने में दक्ष है।
साइबर कमांडो को हाईटेक तकनीक और उपकरणों से सुसज्जित किया गया है ताकि साइबर ठगों के नेटवर्क को समाप्त किया जा सके। साइबर/सीआईडी के डीजी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए थे। इस दिशा में मुख्यमंत्री की मंशा के अनुसार अत्याधुनिक तकनीक से लैस साइबर कमांडो की टीम बनाई गई है।
इस टीम में कुल 15 पुलिसकर्मी शामिल हैं। ये साइबर कमांडो न केवल साइबर ठगी और डिजिटल अपराधों पर अंकुश लगाएंगे, बल्कि आम नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल वातावरण प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इनकी संरचना और प्रशिक्षण एसपीजी और एनएसजी कमांडो के समान है।
उन्होंने बताया कि इन 15 साइबर कमांडो को तैयार करने में देश के प्रमुख तकनीकी और सुरक्षा संस्थानों की विशेषज्ञता का उपयोग किया गया है। इन्हें आईआईटी कानपुर, नया रायपुर, मद्रास और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू), गुजरात के विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू), गुजरात और नई दिल्ली से साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल ट्रेसिंग और ऑनलाइन अपराध की जांच से जुड़ी आधुनिक तकनीकों की ट्रेनिंग ली गई।
साइबर/सीआईडी के डीजी ने जानकारी दी कि पहले चरण में 15 चयनित पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। ये सभी तकनीकी दक्षता, विश्लेषण क्षमता और फील्ड अनुभव के आधार पर चुने गए हैं। यह कमांडो भविष्य में अन्य पुलिसकर्मियों को भी प्रशिक्षित करेंगे, जिससे प्रदेश में साइबर अपराध से निपटने की क्षमता में वृद्धि होगी।
प्रशिक्षण के समापन के बाद साइबर कमांडो को पुलिस जोन और मुख्यालय स्तर पर तैनात किया गया है। इनका उद्देश्य साइबर अपराध की सूचना मिलने पर त्वरित और तकनीकी रूप से सक्षम कार्रवाई करना है। ये साइबर ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड, ऑनलाइन साइबर हमले, सोशल मीडिया अपराध, डाटा चोरी, फिशिंग और डिजिटल ब्लैकमेलिंग जैसे मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इसके अतिरिक्त, साइबर कमांडो जिला और थाने स्तर के पुलिसकर्मियों को भी तकनीकी प्रशिक्षण दे रहे हैं, ताकि जमीनी स्तर पर साइबर अपराधों की पहचान और जांच में सुधार किया जा सके। सरकार ने साइबर कमांडो को हाईटेक उपकरण भी उपलब्ध कराए हैं, जिनमें एडवांस्ड सॉफ्टवेयर, डिजिटल फॉरेंसिक टूल्स, डाटा एनालिटिक्स सिस्टम और रियल-टाइम मॉनिटरिंग तकनीक शामिल हैं। इन उपकरणों की सहायता से साइबर अपराधियों के डिजिटल फुटप्रिंट को ट्रैक करना और लेन-देन का विश्लेषण करना आसान होगा।
सरकार का मानना है कि कानून-व्यवस्था केवल पारंपरिक अपराधों तक सीमित नहीं रह गई है। आज अपराधी डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर आम जनता को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में पुलिस को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना समय की मांग है। इसी दृष्टिकोण से साइबर कमांडो नियुक्त किए गए हैं।