क्या यूपी में पॉलीथिन की जगह गाय के गोबर से बने गमले लेंगे?
सारांश
Key Takeaways
- गोबर के गमले पर्यावरण के अनुकूल हैं।
- इस पहल से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
- पौधों की जीवित रहने की दर में वृद्धि होगी।
- यह प्लास्टिक कचरे को कम करने में मदद करेगा।
- गाय के गोबर से बने गमले पोषण का स्रोत हैं।
लखनऊ, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में प्लास्टिक मुक्त समाज की दिशा में सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आत्मनिर्भर गोशाला मॉडल के अंतर्गत, अब पौधरोपण में पॉलीथिन के स्थान पर गोबर से बने ऑर्गेनिक गमलों का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश की लगभग 7000 गोशालाओं में इन गमलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाएगा। इस पहल से हर जिले में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और गोपालकों को भी लाभ होगा।
उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि इस व्यापक पौधरोपण अभियान में पौधों को गोबर के गमलों में रोपित करने की योजना है। आयोग की योजना है कि इस वर्ष 5 करोड़ गोबर के गमलों का निर्माण किया जाए। वन मंत्री डॉ. अरुण सक्सेना के साथ मिलकर इस योजना पर विचार किया गया है और नर्सरियों में ऑर्गेनिक गमलों का उपयोग शुरू किया जाएगा।
इस निर्माण कार्य को महिला स्वयं सहायता समूहों और युवा उद्यमियों के माध्यम से किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार का सृजन होगा। यह पहल गोवंश संरक्षण, पोषण सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
गोसेवा आयोग के ओएसडी डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि इस अभियान में गोबर से बने ऑर्गेनिक कम्पोस्ट वाले गमलों का उपयोग होगा, जिससे प्लास्टिक कचरे में कमी आएगी और मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि होगी। इस पहल से प्लास्टिक मुक्त उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को साकार किया जा सकेगा। ये गमले पौधरोपण के बाद भूमि में आसानी से विलीन हो जाते हैं, जिससे पौधों की जड़ों को नुकसान नहीं होता।
इससे पौधों की जीवित रहने की दर में वृद्धि होगी और पौधरोपण अभियानों की गुणवत्ता में सुधार होगा। आयोग का मानना है कि इस पहल से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों, स्वयंसेवी संस्थाओं, और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित होगी। इससे प्लास्टिक मुक्त उत्तर प्रदेश का संकल्प जनआंदोलन का रूप ले सकेगा।