उत्तर प्रदेश रेरा का अहम निर्णय: नए संशोधन से घर खरीदारों को मिलेगी राहत

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उत्तर प्रदेश रेरा का अहम निर्णय: नए संशोधन से घर खरीदारों को मिलेगी राहत

सारांश

उत्तर प्रदेश रेरा ने रियल एस्टेट में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 10वां संशोधन लागू किया है। यह कदम खासतौर पर घर खरीदारों को राहत देने और डेवलपर्स की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में है। जानें इस नए बदलाव के बारे में विस्तार से।

Key Takeaways

  • यूपी रेरा ने 10वां संशोधन लागू किया है।
  • घर खरीदारों को मिलेगा राहत।
  • डेवलपर्स की जवाबदेही होगी सुनिश्चित।
  • अपंजीकृत परियोजनाओं की शिकायतें रेरा में दर्ज हो सकेंगी।
  • संपत्ति का हस्तांतरण शुल्क में कमी।

गौतमबुद्ध नगर, 26 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) ने रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और उपभोक्ता हितों को सशक्त बनाने के लिए अपने सामान्य विनियम, 2019 में 10वां संशोधन लागू किया है। यह संशोधन 25 मार्च 2026 से प्रभावी हो चुका है। प्राधिकरण द्वारा किए गए ये बदलाव विशेष रूप से घर खरीदारों को राहत देने और डेवलपर्स की जवाबदेही निर्धारित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

यूपी रेरा ने इस संशोधन के अंतर्गत विनियम 24 और 47 में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन परिवर्तनों का सबसे बड़ा लाभ उन खरीदारों को प्राप्त होगा, जिन्होंने ऐसी परियोजनाओं में निवेश किया है जो रेरा में पंजीकृत नहीं हैं। लंबे समय से यह सवाल उठ रहा था कि क्या अपंजीकृत परियोजनाओं के आवंटियों के लिए रेरा के तहत शिकायत दर्ज करना संभव है। अब इस संशोधन के माध्यम से इस स्थिति को स्पष्ट किया गया है।

नए प्रावधानों के अनुसार, अपंजीकृत परियोजनाओं से संबंधित मामलों की सुनवाई अब यूपी रेरा की पीठों द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी। सबसे पहले यह निर्धारित किया जाएगा कि संबंधित परियोजना को पंजीकरण से छूट है या नहीं। यदि पंजीकरण आवश्यक पाया जाता है, तो इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के लिए मामला सचिव को भेजा जाएगा। इसके बाद ही शिकायत के गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया जाएगा और खरीदार को उचित राहत दी जाएगी।

इस व्यवस्था के लागू होने से अब ऐसे खरीदारों को भटकने की आवश्यकता नहीं होगी, जिन्हें न्याय पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। साथ ही, यूपी रेरा जल्द ही अपने पोर्टल पर एक नई सुविधा भी शुरू करेगा, जिससे प्रभावित लोग फॉर्म-एम के माध्यम से अपनी शिकायतें आसानी से दर्ज कर सकेंगे।

वहीं, विनियम 47 में किए गए संशोधन के अंतर्गत प्रशासनिक और प्रोसेसिंग शुल्क को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। यदि किसी आवंटी की मृत्यु हो जाती है और संपत्ति का हस्तांतरण परिवार के सदस्य को किया जाता है, तो प्रमोटर अधिकतम 1,000 रुपये ही शुल्क ले सकेगा।

गैर-परिवार सदस्य को हस्तांतरण के मामले में यह शुल्क अधिकतम 25,000 रुपये निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, ऐसे मामलों में नया एग्रीमेंट करने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि मौजूदा अनुबंध में ही संशोधन कर प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इससे खरीदारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।

यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने कहा कि यह संशोधन रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ता हितों को प्राथमिकता देने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने आश्वासन दिया कि इससे शिकायत निवारण प्रक्रिया और अधिक प्रभावी और उपभोक्ता-अनुकूल बनेगी। यूपी रेरा का यह निर्णय लंबे समय से लंबित समस्याओं के समाधान की दिशा में एक बड़ी पहल है, जिससे हजारों घर खरीदारों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।

Point of View

बल्कि डेवलपर्स की जवाबदेही भी बढ़ेगी। यह कदम उपभोक्ता हितों को प्राथमिकता देने का संकेत है।
NationPress
27/03/2026

Frequently Asked Questions

क्या अपंजीकृत परियोजनाओं के आवंटियों के लिए रेरा में शिकायत दर्ज कराना संभव है?
जी हां, नए संशोधन के अनुसार अपंजीकृत परियोजनाओं से संबंधित शिकायतें अब रेरा में दर्ज की जा सकती हैं।
क्या नए संशोधन से परिवार के सदस्य को संपत्ति का हस्तांतरण सस्ता होगा?
हां, यदि आवंटी की मृत्यु होती है, तो परिवार के सदस्य को हस्तांतरण के लिए अधिकतम 1,000 रुपये शुल्क लिया जाएगा।
नए नियम कब प्रभावी होंगे?
यह संशोधन 25 मार्च 2026 से प्रभावी हो चुका है।
क्या मौजूदा अनुबंध में संशोधन करने की आवश्यकता होगी?
नहीं, नए एग्रीमेंट की आवश्यकता नहीं होगी, मौजूदा अनुबंध में ही संशोधन किया जाएगा।
यूपी रेरा के अध्यक्ष ने इस निर्णय पर क्या कहा?
यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने इसे पारदर्शिता और उपभोक्ता हितों को प्राथमिकता देने वाला कदम बताया।
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