यूपी सीट बंटवारा: सपा प्रवक्ता अब्बास हैदर बोले — जीत की क्षमता ही असली कसौटी
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता अब्बास हैदर ने 5 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीट बंटवारे का आधार सीटों की संख्या नहीं, बल्कि जीत की वास्तविक संभावना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस दल या उम्मीदवार की किसी सीट पर सबसे अधिक जीत की संभावना हो, टिकट का फैसला उसी के पक्ष में होना चाहिए।
गठबंधन में सीट बंटवारे का फॉर्मूला
अब्बास हैदर ने कहा कि किसी सीट पर जिस पार्टी की जनता तक पहुँच और संगठनात्मक पकड़ अधिक मज़बूत है, उसे वहाँ उम्मीदवार उतारने का अवसर मिलना चाहिए। उनके अनुसार, 'गठबंधन का उद्देश्य केवल सीटों का बंटवारा नहीं, बल्कि अधिक से अधिक सीटों पर जीत हासिल करना होना चाहिए।'
उन्होंने यह भी कहा कि किस पार्टी को कौन-सी सीट मिलेगी, इसका अंतिम निर्णय दोनों दलों का शीर्ष नेतृत्व करेगा। नेताओं के व्यक्तिगत बयानों को अधिक तूल देने की ज़रूरत नहीं है।
शीर्ष नेतृत्व पर भरोसा
हैदर ने कहा, 'हमें कुछ समय इंतज़ार करना चाहिए और देखना चाहिए कि दोनों पार्टियों का शीर्ष नेतृत्व क्या फैसला करता है और जमीनी स्तर पर सीट शेयरिंग का क्या फॉर्मूला लागू होता है।' उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों दल आपसी सहमति से एक ऐसा फॉर्मूला तैयार करेंगे जिससे गठबंधन को अधिकतम चुनावी लाभ मिल सके।
उन्होंने अलग-अलग नेताओं के बयानों को 'व्यक्तिगत राय' बताते हुए कहा कि आधिकारिक निर्णय के लिए शीर्ष नेतृत्व को समय देना उचित है।
सपा-कांग्रेस गठबंधन की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकजुटता की कोशिशें राष्ट्रीय स्तर पर भी तेज हैं। यूपी की 403 विधानसभा सीटें किसी भी गठबंधन के लिए निर्णायक महत्व रखती हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने कांग्रेस के साथ नहीं, बल्कि अपने दम पर चुनाव लड़ा था, और भाजपा ने भारी बहुमत से सरकार बनाई थी। ऐसे में इस बार के गठबंधन की रणनीति पर विशेष नज़र है।
आगे क्या होगा
सपा प्रवक्ता के बयान से संकेत मिलता है कि पार्टी सीट बंटवारे में व्यावहारिक और जीत-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के पक्ष में है। आने वाले हफ्तों में दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की बैठकों में सीट शेयरिंग का अंतिम फॉर्मूला तय होने की संभावना है।