5 अक्टूबर 2026
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यूपी सीट बंटवारा: सपा प्रवक्ता अब्बास हैदर बोले — जीत की क्षमता ही असली कसौटी

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यूपी सीट बंटवारा: सपा प्रवक्ता अब्बास हैदर बोले — जीत की क्षमता ही असली कसौटी

सारांश

यूपी चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस सीट बंटवारे की बहस के बीच सपा प्रवक्ता अब्बास हैदर ने साफ किया — सीटों की गिनती नहीं, जीत की क्षमता तय करेगी टिकट। अंतिम फैसला दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व पर छोड़ा।

मुख्य बातें

सपा प्रवक्ता अब्बास हैदर ने 5 अक्टूबर 2026 को कहा कि सीट बंटवारे में जीत की संभावना ही प्रमुख आधार होनी चाहिए।
जिस पार्टी की किसी सीट पर जनता तक पहुँच और संगठनात्मक पकड़ मज़बूत हो, उसे वहाँ टिकट मिलनी चाहिए।
सीट बंटवारे का अंतिम निर्णय सपा और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व करेंगे।
हैदर ने व्यक्तिगत नेताओं के बयानों को अधिक तूल न देने की सलाह दी।
उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा सीटें हैं; 2022 में सपा ने अकेले चुनाव लड़ा था।

समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता अब्बास हैदर ने 5 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीट बंटवारे का आधार सीटों की संख्या नहीं, बल्कि जीत की वास्तविक संभावना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस दल या उम्मीदवार की किसी सीट पर सबसे अधिक जीत की संभावना हो, टिकट का फैसला उसी के पक्ष में होना चाहिए।

गठबंधन में सीट बंटवारे का फॉर्मूला

अब्बास हैदर ने कहा कि किसी सीट पर जिस पार्टी की जनता तक पहुँच और संगठनात्मक पकड़ अधिक मज़बूत है, उसे वहाँ उम्मीदवार उतारने का अवसर मिलना चाहिए। उनके अनुसार, 'गठबंधन का उद्देश्य केवल सीटों का बंटवारा नहीं, बल्कि अधिक से अधिक सीटों पर जीत हासिल करना होना चाहिए।'

उन्होंने यह भी कहा कि किस पार्टी को कौन-सी सीट मिलेगी, इसका अंतिम निर्णय दोनों दलों का शीर्ष नेतृत्व करेगा। नेताओं के व्यक्तिगत बयानों को अधिक तूल देने की ज़रूरत नहीं है।

शीर्ष नेतृत्व पर भरोसा

हैदर ने कहा, 'हमें कुछ समय इंतज़ार करना चाहिए और देखना चाहिए कि दोनों पार्टियों का शीर्ष नेतृत्व क्या फैसला करता है और जमीनी स्तर पर सीट शेयरिंग का क्या फॉर्मूला लागू होता है।' उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों दल आपसी सहमति से एक ऐसा फॉर्मूला तैयार करेंगे जिससे गठबंधन को अधिकतम चुनावी लाभ मिल सके।

उन्होंने अलग-अलग नेताओं के बयानों को 'व्यक्तिगत राय' बताते हुए कहा कि आधिकारिक निर्णय के लिए शीर्ष नेतृत्व को समय देना उचित है।

सपा-कांग्रेस गठबंधन की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकजुटता की कोशिशें राष्ट्रीय स्तर पर भी तेज हैं। यूपी की 403 विधानसभा सीटें किसी भी गठबंधन के लिए निर्णायक महत्व रखती हैं।

2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने कांग्रेस के साथ नहीं, बल्कि अपने दम पर चुनाव लड़ा था, और भाजपा ने भारी बहुमत से सरकार बनाई थी। ऐसे में इस बार के गठबंधन की रणनीति पर विशेष नज़र है।

आगे क्या होगा

सपा प्रवक्ता के बयान से संकेत मिलता है कि पार्टी सीट बंटवारे में व्यावहारिक और जीत-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के पक्ष में है। आने वाले हफ्तों में दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की बैठकों में सीट शेयरिंग का अंतिम फॉर्मूला तय होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 'जीत की संभावना' को कौन मापेगा और किस डेटा के आधार पर। सपा और कांग्रेस दोनों अपनी-अपनी सीटों पर दावेदारी करते हैं, और इस 'क्षमता' की परिभाषा ही बातचीत में सबसे विवादास्पद बिंदु बनेगी। 2022 में सपा-कांग्रेस के अलग-अलग लड़ने के नतीजे दोनों के लिए सबक थे, लेकिन इतिहास बताता है कि यूपी में विपक्षी गठबंधन अक्सर सीट बंटवारे की खींचतान में कमज़ोर पड़ जाते हैं। शीर्ष नेतृत्व पर भरोसे की बात तब तक अधूरी है, जब तक बैठकों का कोई ठोस नतीजा सामने न आए।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सपा प्रवक्ता अब्बास हैदर ने यूपी सीट बंटवारे पर क्या कहा?
अब्बास हैदर ने कहा कि गठबंधन में सीटों की संख्या नहीं, बल्कि जीत की संभावना सबसे महत्वपूर्ण है। जिस दल या उम्मीदवार की किसी सीट पर जीत की अधिक संभावना हो, टिकट उसी को मिलनी चाहिए।
यूपी में सपा-कांग्रेस सीट बंटवारे का अंतिम फैसला कौन करेगा?
हैदर के अनुसार, सीट शेयरिंग का अंतिम निर्णय दोनों दलों — सपा और कांग्रेस — का शीर्ष नेतृत्व मिलकर करेगा। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत नेताओं के बयानों को बहुत अधिक महत्व न दिया जाए।
यूपी विधानसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन क्यों अहम है?
उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा सीटें हैं और यह राज्य राष्ट्रीय राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है। 2022 में दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था, जिसके बाद भाजपा ने भारी बहुमत हासिल किया था; इस बार गठबंधन विपक्ष को मजबूत करने की कोशिश है।
सपा-कांग्रेस सीट शेयरिंग का फॉर्मूला क्या होगा?
अभी तक कोई आधिकारिक फॉर्मूला घोषित नहीं हुआ है। सपा प्रवक्ता ने कहा है कि जमीनी पहुँच और जीत की संभावना के आधार पर फॉर्मूला तय होगा, और दोनों दल आपसी सहमति से इसे अंतिम रूप देंगे।
क्या सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे पर बातचीत पूरी हो गई है?
नहीं। हैदर के बयान से स्पष्ट है कि बातचीत अभी जारी है और अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने सभी पक्षों से शीर्ष नेतृत्व को समय देने की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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