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NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो का आरोप: UPA काल में बसे अवैध घुसपैठिए अब तख्तापलट की साजिश रच रहे हैं

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NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो का आरोप: UPA काल में बसे अवैध घुसपैठिए अब तख्तापलट की साजिश रच रहे हैं

सारांश

NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने एक्स पर वीडियो जारी कर दावा किया कि UPA काल में अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं को सरकारी दस्तावेज़ दिलाए गए — और अब उनकी दूसरी पीढ़ी तख्तापलट की साजिश रच रही है। ये गंभीर आरोप अभी सत्यापित नहीं हैं, लेकिन अवैध प्रवासन की राष्ट्रीय बहस को नई धार दे रहे हैं।

मुख्य बातें

NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने 19 अक्टूबर 2026 को एक्स पर वीडियो पोस्ट करके आरोप लगाया कि UPA सरकार के कार्यकाल में अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं को वोटर कार्ड व आधार कार्ड दिलवाए गए।
कानूनगो ने नेशनल एडवाइजरी काउंसिल (NAC) और सोनिया गांधी पर सीधे आरोप लगाए; ये आरोप अभी तक स्वतंत्र स्रोतों से सत्यापित नहीं हैं।
उनका दावा है कि घुसपैठियों की दूसरी पीढ़ी हिंसा के ज़रिए तख्तापलट की कोशिश में है और SIR इनकी पहचान का तंत्र है।
उन्होंने कहा कि और प्रमाण 'समय के साथ जारी किए जाएंगे'; कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।
यह बयान ऐसे राजनीतिक माहौल में आया है जब अवैध प्रवासन और SIR को लेकर राष्ट्रीय बहस जारी है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने 19 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं को वोटर कार्ड व आधार कार्ड दिलवाए गए, और उनकी बस्तियाँ बसाई गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन घुसपैठियों की दूसरी पीढ़ी अब हिंसा के ज़रिए देश में तख्तापलट की कोशिश कर रही है।

कानूनगो का मुख्य आरोप

कानूनगो ने एक्स पर लिखा, 'वीडियो नहीं सबूत है। देश को देखना चाहिए। देश पर सोनिया गांधी के नियंत्रण वाले जमाने में सरकार में टॉप पर बैठे अर्बन नक्सल ने अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए और रोहिंग्याओं के वोटर कार्ड और आधार कार्ड बनवाए, उनकी बस्तियाँ बसाईं। अब घुसपैठियों की दूसरी पीढ़ी हिंसा करके देश में तख्तापलट करना चाहती है।' उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे अनेक प्रमाण हैं जो 'समय के साथ जारी किए जाएंगे।'

यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और अवैध प्रवासियों की पहचान को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। कानूनगो ने SIR को घुसपैठियों की पहचान का तंत्र बताते हुए कहा कि इसीलिए 'देशद्रोही' इसका विरोध कर रहे हैं।

नेशनल एडवाइजरी काउंसिल पर निशाना

कानूनगो ने आगे आरोप लगाया कि घुसपैठियों के वोटर आईडी, राशन कार्ड और नागरिकता के कागज नेशनल एडवाइजरी काउंसिल (NAC) के ज़रिए तैयार कराए गए, जिसकी अध्यक्षता सोनिया गांधी करती थीं। उन्होंने दावा किया कि ये घुसपैठिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हटाना चाहते हैं क्योंकि वे 'उनके अपनों में से नहीं हैं।'

गौरतलब है कि कानूनगो के ये बयान उनके व्यक्तिगत आरोप हैं और इन्हें किसी स्वतंत्र स्रोत से अभी तक सत्यापित नहीं किया गया है। इन आरोपों पर कांग्रेस या सोनिया गांधी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

हिंसा और तख्तापलट की चेतावनी

कानूनगो ने कहा कि कथित तौर पर घुसपैठियों के परिजन खुद यह बता रहे हैं कि वे प्रदर्शनों में हिंसा कर सकते थे। उन्होंने फ्रांस में अवैध प्रवासियों द्वारा मचाए जा रहे कथित उत्पात का भी उल्लेख किया और आशंका जताई कि 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' भारत में भी इसी तरह की हिंसा करवाना चाहता है।

उन्होंने स्पष्ट किया, 'वे तख्तापलट करके बांग्लादेशियों को भारत के नागरिकों के अधिकारों के ऊपर अतिक्रमण करवाना चाहते हैं, जो हम नहीं होने देंगे।' यह बयान NHRC सदस्य के पद पर रहते हुए दिया गया, जो स्वयं एक संवैधानिक संस्था का हिस्सा है।

राजनीतिक संदर्भ और प्रतिक्रिया

यह पहली बार नहीं है जब बांग्लादेशी घुसपैठ और रोहिंग्याओं का मुद्दा राष्ट्रीय विमर्श में आया हो। सर्वोच्च न्यायालय सहित कई मंचों पर यह विषय चर्चा में रह चुका है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे बयान चुनावी या राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित हो सकते हैं, जबकि समर्थकों का तर्क है कि अवैध प्रवासन एक वास्तविक सुरक्षा चिंता है।

आने वाले दिनों में देखना होगा कि कानूनगो द्वारा जारी किए जाने का वादा किए गए 'अन्य प्रमाण' सार्वजनिक होते हैं या नहीं, और सरकार या विपक्ष इस पर क्या रुख अपनाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उन्होंने 'और प्रमाण बाद में' की रणनीति अपनाई है, जो जवाबदेही से बचने का परिचित तरीका है। अवैध प्रवासन एक वैध नीतिगत चिंता है, किंतु इसे तख्तापलट की साजिश से जोड़ना बिना सत्यापित साक्ष्य के एक बड़ी छलाँग है। मुख्यधारा की कवरेज इस बात को नज़रअंदाज़ कर रही है कि NHRC सदस्य के रूप में इस तरह के पक्षपातपूर्ण बयान स्वयं संस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियंक कानूनगो कौन हैं और उन्होंने क्या आरोप लगाए हैं?
प्रियंक कानूनगो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य हैं। उन्होंने 19 अक्टूबर 2026 को एक्स पर वीडियो पोस्ट करके आरोप लगाया कि UPA सरकार के कार्यकाल में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं को सरकारी दस्तावेज़ दिलाए गए और अब उनकी दूसरी पीढ़ी तख्तापलट की साजिश रच रही है।
UPA सरकार और सोनिया गांधी पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
कानूनगो ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली नेशनल एडवाइजरी काउंसिल (NAC) के ज़रिए अवैध घुसपैठियों को वोटर कार्ड, राशन कार्ड और नागरिकता के कागज बनवाए गए। ये आरोप अभी तक स्वतंत्र स्रोतों से सत्यापित नहीं हुए हैं और कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक खंडन या प्रतिक्रिया नहीं आई है।
SIR क्या है और इसका इस विवाद से क्या संबंध है?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण एक प्रक्रिया है जिसे कानूनगो ने अवैध घुसपैठियों की पहचान का तंत्र बताया है। उन्होंने कहा कि इसीलिए कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं क्योंकि यह घुसपैठियों को उजागर करेगा।
क्या कानूनगो के इन आरोपों को सत्यापित किया गया है?
नहीं। कानूनगो ने स्वयं कहा है कि 'ऐसे बहुत प्रमाण हैं, जो समय के साथ जारी किए जाएंगे।' अभी तक कोई स्वतंत्र सत्यापन नहीं हुआ है। किसी सरकारी जाँच एजेंसी या न्यायालय ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है।
इस बयान का राजनीतिक महत्व क्या है?
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अवैध प्रवासन और SIR को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज़ है। NHRC सदस्य के पद से इस तरह का बयान आना संस्थागत दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देते हैं, जबकि समर्थकों का तर्क है कि अवैध प्रवासन एक वास्तविक सुरक्षा मुद्दा है।
राष्ट्र प्रेस
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