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एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो का बड़ा दावा: UP के मदरसों में फर्जी हाजरी, 'हम लड़ते रहेंगे'

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एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो का बड़ा दावा: UP के मदरसों में फर्जी हाजरी, 'हम लड़ते रहेंगे'

सारांश

एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो ने बाराबंकी के एक सरकारी मदरसे में कथित फर्जी बायोमैट्रिक हाजरी का वीडियो शेयर कर जांच की माँग की है — यह विवाद तब और गहरा हो गया जब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने NHRC की कार्यशैली पर तीखी टिप्पणी करते हुए 588 मदरसों की ईओडब्ल्यू जांच पर रोक लगाई। अगली सुनवाई 11 मई को है।

मुख्य बातें

NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने 29 अप्रैल 2026 को बाराबंकी के एक सरकारी मदरसे में कथित फर्जी बायोमैट्रिक हाजरी का वीडियो एक्स पर शेयर किया।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने NHRC पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि आयोग अपना मूल काम छोड़कर मदरसों की जांच का आदेश दे रहा है, जो नियमों के विरुद्ध है।
हाई कोर्ट ने UP के 588 एडेड मदरसों की ईओडब्ल्यू (EOW) जांच पर पहले ही रोक लगा दी है।
मामले में अगली सुनवाई 11 मई को जस्टिस अतुल श्रीधरन की बेंच के समक्ष निर्धारित है।
याचिका टीचर्स एसोसिएशन मदारिस यूपी के महासचिव हाजी दीवा जमा खान ने दायर की है।

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने 29 अप्रैल 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक वीडियो साझा करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वित्त-पोषित मदरसों में कथित अनियमितताओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कानूनगो ने दावा किया कि वीडियो में बाराबंकी के एक सरकारी अनुदान प्राप्त मदरसे में बायोमैट्रिक मशीन पर कार्डों के ज़रिए फर्जी हाजरी लगाई जा रही है — जो कथित तौर पर करदाताओं के धन की बर्बादी और बच्चों के शिक्षा अधिकार का उल्लंघन है।

कानूनगो का दावा: क्या कहा एक्स पर

कानूनगो ने अपनी पोस्ट में लिखा कि शिकायतकर्ता के अनुसार यह वीडियो उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के एक राज्य-वित्त पोषित मदरसे का है, जहाँ मदरसा मास्टर की तनख्वाह के नाम पर करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग हो रहा है। उन्होंने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

वहीं इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह सवाल उठाया है कि क्या यह आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। विडंबना यह है कि जिस संस्था पर मानवाधिकार उल्लंघनों — जैसे मॉब लिंचिंग — पर मौन रहने का आरोप लगाया गया, वह अब शिक्षा व्यवस्था की जांच में सक्रिय दिख रही है। सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करना जांच का विकल्प नहीं है; असली जवाबदेही तब होगी जब तथ्यों की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच हो — चाहे नतीजा किसी के भी पक्ष में जाए।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियंक कानूनगो ने मदरसों पर क्या आरोप लगाए हैं?
NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के एक सरकारी वित्त-पोषित मदरसे में बायोमैट्रिक मशीन पर कार्डों के ज़रिए फर्जी हाजरी लगाई जा रही है। उन्होंने इसे करदाताओं के धन का दुरुपयोग और बच्चों के शिक्षा अधिकार का उल्लंघन बताया है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने NHRC पर क्या टिप्पणी की?
जस्टिस अतुल श्रीधरन की बेंच ने कहा कि NHRC अपना मूल काम न करके मदरसों की जांच का आदेश दे रहा है, जो गैरकानूनी और गैरसंवैधानिक दोनों है। कोर्ट ने यह भी कहा कि मुसलमानों पर मॉब लिंचिंग के मामलों में आयोग मौन रहता है।
UP के 588 मदरसों की EOW जांच क्या है और उस पर रोक क्यों लगी?
NHRC के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 588 एडेड मदरसों की जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) से कराने का आदेश दिया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस जांच पर रोक लगा दी है और मामले में NHRC की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
इस मामले में याचिका किसने दायर की है और अगली सुनवाई कब है?
टीचर्स एसोसिएशन मदारिस यूपी के महासचिव हाजी दीवा जमा खान ने EOW जांच के आदेश को रद्द कराने के लिए याचिका दायर की है। इस मामले की अगली सुनवाई 11 मई को निर्धारित है।
क्या कानूनगो का वीडियो-आधारित दावा प्रमाणित हो चुका है?
अभी तक कानूनगो के दावे की स्वतंत्र जांच नहीं हुई है। उन्होंने स्वयं कहा है कि वे तथ्यों की जांच कराएंगे। वीडियो शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराया गया है और इसकी प्रामाणिकता अभी सत्यापित नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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