क्या उत्तराखंड में सनातन-आधारित सरकार है?

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क्या उत्तराखंड में सनातन-आधारित सरकार है?

सारांश

उत्तराखंड सरकार ने सरकारी स्कूलों में भगवद् गीता पढ़ाने का निर्णय लिया है। भाजपा नेता मानवेंद्र प्रताप सिंह ने इस पहल की प्रशंसा की है, और इसे शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना है। जानिए इस फैसले के पीछे की सोच और इसके महत्व के बारे में।

Key Takeaways

  • सरकारी स्कूलों में गीता का पाठ अनिवार्य किया गया है।
  • यह निर्णय संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • भाजपा नेता ने इसे सकारात्मक पहल बताया है।
  • गीता का ज्ञान छात्रों को जीवन के मूल्यों से जोड़ता है।
  • यह नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है।

अलीगढ़, 16 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा नेता मानवेंद्र प्रताप सिंह ने उत्तराखंड सरकार के उस निर्णय की प्रशंसा की है, जिसमें यह तय किया गया है कि सरकारी स्कूलों में भगवद् गीता का पाठ होगा।

भाजपा नेता ने कहा कि उत्तराखंड में सनातन पर आधारित सरकार कार्य कर रही है। उन्होंने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि यह सरकार राष्ट्र के मूल्यों की रक्षा करती है। स्कूलों में गीता को लागू करना एक सही कदम है। पूरी दुनिया में भगवद् गीता का महत्व है। जर्मनी से लेकर अमेरिका और जापान तक, सभी लोग गीता का अध्ययन करते हैं और स्कूलों में इसे पढ़ाया जाता है।

उन्होंने कहा कि कुछ सेक्युलर लोग हैं जो धर्म को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह संभव नहीं है। वे इसका विरोध करते हैं, जबकि पूरी दुनिया गीता के ज्ञान को मानती है। उन्होंने उत्तराखंड सरकार के निर्णय की सराहना की। शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री धामी को धन्यवाद दिया कि उन्होंने इसे लागू करने की अनुमति दी है। वास्तव में, पूरे देश में बंगाल से लेकर केरल और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक गीता का अध्ययन होना चाहिए।

उत्तराखंड भाजपा ने एक एक मिनट का वीडियो साझा किया है, जिसमें स्कूली बच्चे गीता और रामायण जैसे महान ग्रंथों के श्लोक का पाठ कर रहे हैं।

पोस्ट में लिखा गया है, "देवभूमि उत्तराखंड के स्कूलों में प्रार्थना के दौरान गूंजते गीता और रामायण के श्लोक। यह पहल नई पीढ़ी को संस्कार, साहस और विवेक के साथ आगे बढ़ने का प्रोत्साहन देगी और जीवन के मूल्य समझने में मददगार साबित होगी।"

उत्तराखंड सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, स्कूलों में प्रार्थना के दौरान प्रतिदिन श्रीमद्भगवद्गीता का एक श्लोक पढ़ना अनिवार्य किया गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि भगवद् गीता एक पवित्र ग्रंथ है, जिसमें भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया ज्ञान समाहित है, और इसका अध्ययन करने से व्यक्ति का जीवन सफल होता है। हमने शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में निर्णय लिया कि राज्य के सभी स्कूलों में गीता का पाठ होगा। यह प्रक्रिया आरंभ हो गई है।

हाल ही में शिक्षा अधिकारियों के साथ बैठक में धामी ने निर्देश दिए कि विद्यालयों में केवल किताबों के ज्ञान के साथ कला, रंगमंच और खेलकूद की गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाए। बच्चों को फिट इंडिया के बारे में जागरूक किया जाए और परीक्षा प्रणाली में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया जाए। विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भी जल्द भरा जाए।

Point of View

NationPress
31/08/2025

Frequently Asked Questions

उत्तराखंड में गीता का पाठ क्यों शुरू किया गया है?
उत्तराखंड सरकार ने गीता का पाठ शुरू करने का निर्णय लिया है ताकि छात्रों को भारतीय संस्कृति और मूल्यों से जोड़ा जा सके।
क्या यह निर्णय विवादास्पद है?
कुछ लोग इसे विवादास्पद मान सकते हैं, लेकिन इसे सांस्कृतिक शिक्षा के रूप में देखा जा सकता है।
गीता का पाठ कब से लागू होगा?
यह पाठ तुरंत प्रभाव से लागू हो चुका है, और सभी सरकारी स्कूलों में इसे पढ़ाया जाएगा।
क्या अन्य राज्यों में भी ऐसा किया जाएगा?
भाजपा नेता ने कहा है कि इसे पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए, लेकिन यह राज्यों की सरकारों पर निर्भर करेगा।
क्या इससे छात्रों पर प्रभाव पड़ेगा?
जी हां, गीता का ज्ञान छात्रों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।