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वैभव सूर्यवंशी की तकनीक नहीं, मानसिक मजबूती पर ध्यान दें: अभिषेक नायर

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वैभव सूर्यवंशी की तकनीक नहीं, मानसिक मजबूती पर ध्यान दें: अभिषेक नायर

सारांश

इंग्लैंड टी20 सीरीज में वैभव सूर्यवंशी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद तकनीक पर बहस छिड़ी है — लेकिन पूर्व सहायक कोच अभिषेक नायर कह रहे हैं कि असली ज़रूरत मानसिक समर्थन की है, आलोचना की नहीं। युवा खिलाड़ियों के लिए यह नज़रिया बदल सकता है पूरी बहस का रुख।

मुख्य बातें

पूर्व सहायक कोच अभिषेक नायर ने कहा कि वैभव सूर्यवंशी की मानसिक स्थिति पर तकनीक से पहले ध्यान देना चाहिए।
इंग्लैंड टी20 सीरीज में तीन पारियों में सूर्यवंशी कोई बड़ा स्कोर नहीं बना सके, जिसके बाद आलोचना तेज़ हुई।
नायर ने दक्षिण अफ्रीका 2024 से तुलना को अनुचित बताया — दोनों दौरों की परिस्थितियाँ अलग थीं।
आईपीएल के बाद ब्रेक, नया कप्तान और बाहरी दबाव को नायर ने टीम के प्रदर्शन पर असर डालने वाले कारण बताया।
ईशान किशन , अभिषेक शर्मा और सूर्यवंशी की शॉर्ट बॉल कमज़ोरी को नायर ने स्थायी नहीं माना।

पूर्व सहायक कोच अभिषेक नायर ने 16 जुलाई को युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के इंग्लैंड दौरे पर निराशाजनक प्रदर्शन के बाद स्पष्ट किया कि इस समय तकनीकी विश्लेषण से पहले खिलाड़ी की मानसिक स्थिति को समझना कहीं अधिक ज़रूरी है। नायर के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण के शुरुआती दौर में युवा खिलाड़ियों पर आलोचना और सलाहों की बौछार उनके आत्मविश्वास को और कमज़ोर कर सकती है।

इंग्लैंड दौरे पर सूर्यवंशी का प्रदर्शन

वैभव सूर्यवंशी ने इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज से अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की। तीन मैचों की तीन पारियों में वह कोई बड़ा स्कोर नहीं बना सके, जिसके बाद उनकी तकनीकी क्षमता पर व्यापक सवाल उठने लगे। आईपीएल में उनकी आक्रामक बल्लेबाजी देख चुके दर्शकों और विशेषज्ञों की अपेक्षाएँ ऊँची थीं, जो पूरी नहीं हो सकीं।

नायर की सलाह: पहले मन, फिर तकनीक

जियोस्टार पर बोलते हुए अभिषेक नायर ने कहा कि सबसे पहले यह जानना ज़रूरी है कि खिलाड़ी खुद कैसा महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा, 'एक युवा क्रिकेटर पहले से ही कई तरह की भावनात्मक उलझनों से गुजरता है। कुछ मैच पहले तक उसकी बल्लेबाजी की हर ओर तारीफ हो रही होती है और अचानक खराब प्रदर्शन के बाद वही खिलाड़ी आलोचना का केंद्र बन जाता है। ऐसे बदलाव को संभालना आसान नहीं होता।' नायर ने यह भी कहा कि शुरुआती बातचीत बल्लेबाजी की तकनीक पर नहीं, बल्कि खिलाड़ी के अनुभव और उसके मानसिक पक्ष पर होनी चाहिए।

सपोर्ट स्टाफ की भूमिका

नायर ने सपोर्ट स्टाफ की जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए कहा कि कोच को अपनी भावनाएँ खिलाड़ी पर नहीं थोपनी चाहिए। उनका काम खिलाड़ी की भावनाओं को समझना, उसका आत्मविश्वास बनाए रखना और उसे मानसिक रूप से अगले मुकाबले के लिए तैयार करना है। उन्होंने कहा कि जब खिलाड़ी साफ दिमाग के साथ मैदान पर उतरता है, तभी वह अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन कर पाता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय क्रिकेट टीम के युवा खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य पर बहस तेज़ हो रही है।

दक्षिण अफ्रीका से तुलना पर असहमति

2024 में दक्षिण अफ्रीका के सफल टी20 दौरे से तुलना किए जाने पर नायर ने असहमति जताई। उन्होंने कहा कि दोनों परिस्थितियाँ पूरी तरह अलग थीं — दक्षिण अफ्रीका में बल्लेबाजी के अनुकूल पिचें थीं और टीम के पास लय तथा आत्मविश्वास दोनों मौजूद थे। इसके विपरीत, इंग्लैंड दौरे से पहले आईपीएल के बाद खिलाड़ियों को ब्रेक मिला, जिससे टीम बिना पर्याप्त तैयारी के आयरलैंड सीरीज में उतरी। गौरतलब है कि नया कप्तान, टीम में नए चेहरे और सूर्यवंशी को लेकर लगातार हो रही चर्चा ने भी टीम का ध्यान प्रभावित किया।

शॉर्ट बॉल चुनौती और आगे की राह

नायर ने स्वीकार किया कि भारतीय बल्लेबाजों को शॉर्ट बॉल के खिलाफ मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन इसे स्थायी कमज़ोरी मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि ईशान किशन, अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी जैसे बल्लेबाज पहले भी तेज़ गेंदबाजों और शॉर्ट गेंदों के खिलाफ सफल रहे हैं। कुछ मैचों के आधार पर उनकी समग्र क्षमता पर सवाल उठाना उचित नहीं होगा। नायर का मानना है कि यदि खिलाड़ी को सही मानसिक माहौल और समय दिया जाए, तो वह अपना स्तर दोबारा हासिल कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि भारतीय क्रिकेट की चयन और कोचिंग प्रणाली में मानसिक स्वास्थ्य को व्यवस्थागत प्राथमिकता कब मिलेगी। वैभव सूर्यवंशी का मामला इकलौता नहीं है — पिछले कुछ वर्षों में कई युवा खिलाड़ी शुरुआती दबाव में टूटते दिखे हैं। मीडिया और सोशल मीडिया की तीव्र निगरानी में अंतरराष्ट्रीय पदार्पण करना आज किसी भी युवा के लिए असाधारण मानसिक चुनौती है। जब तक बीसीसीआई स्तर पर खिलाड़ियों के लिए संरचित मनोवैज्ञानिक सहायता तंत्र नहीं बनता, ऐसी 'धैर्य रखें' की अपीलें केवल व्यक्तिगत स्तर पर राहत देती हैं — ढाँचागत समस्या जस की तस बनी रहती है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिषेक नायर ने वैभव सूर्यवंशी के बारे में क्या कहा?
पूर्व सहायक कोच अभिषेक नायर ने कहा कि वैभव सूर्यवंशी के साथ पहले मानसिक स्थिति पर बात होनी चाहिए, तकनीक पर नहीं। उनके अनुसार युवा खिलाड़ी को आलोचनाओं से घेरने के बजाय उसका आत्मविश्वास बनाए रखना ज़रूरी है।
इंग्लैंड टी20 सीरीज में वैभव सूर्यवंशी का प्रदर्शन कैसा रहा?
वैभव सूर्यवंशी ने इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज से अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की, लेकिन तीन मैचों की तीन पारियों में कोई बड़ा स्कोर नहीं बना सके। इसके बाद उनकी तकनीकी क्षमता और शॉर्ट बॉल के खिलाफ कमज़ोरी पर बहस छिड़ गई।
नायर ने भारत के खराब प्रदर्शन के क्या कारण बताए?
नायर के अनुसार आईपीएल के बाद ब्रेक, नया कप्तान, टीम में नए चेहरे और सूर्यवंशी को लेकर बाहरी चर्चा ने मिलकर टीम पर अनावश्यक दबाव बनाया। उन्होंने कहा कि इंग्लैंड दौरे से पहले टीम को पर्याप्त तैयारी का समय नहीं मिला।
क्या सूर्यवंशी की शॉर्ट बॉल कमज़ोरी स्थायी है?
अभिषेक नायर ने इसे स्थायी कमज़ोरी मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि ईशान किशन, अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी पहले भी तेज़ गेंदबाजों के खिलाफ सफल रहे हैं, इसलिए कुछ मैचों के आधार पर उनकी क्षमता पर सवाल उठाना उचित नहीं।
नायर ने 2024 दक्षिण अफ्रीका दौरे से तुलना पर क्या कहा?
नायर ने दक्षिण अफ्रीका 2024 से तुलना को अनुचित बताया, क्योंकि वहाँ बल्लेबाजी के अनुकूल पिचें थीं और टीम के पास लय व आत्मविश्वास दोनों थे। इंग्लैंड दौरे की परिस्थितियाँ पूरी तरह अलग थीं।
राष्ट्र प्रेस
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