क्या एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर वन तुलसी से सांस की समस्या दूर होगी और एनर्जी मिलेगी?
सारांश
Key Takeaways
- वन तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं।
- यह श्वसन तंत्र को मजबूत बनाती है।
- तनाव को कम करने में सहायक है।
- एनर्जी बढ़ाने का कार्य करती है।
- सर्दी-खांसी में राहत देती है।
नई दिल्ली, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। तुलसी को भारतीय संस्कृति में एक पवित्र पौधा माना जाता है, जो न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का मुख्य हिस्सा है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी एक अमूल्य खजाना है। घर के आंगन या बाग-बगीचों में उगाई गई तुलसी औषधीय गुणों से भरपूर होती है। वन तुलसी, जो कि एक विशेष किस्म है, सेहत के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।
वन तुलसी, जिसे जंगली तुलसी भी कहा जाता है, हिमालयी क्षेत्र में पाई जाती है और इसके विशेष औषधीय गुण इसे अनूठा बनाते हैं।
अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, शोधकर्ताओं ने कई अध्ययनों का विश्लेषण किया और पाया कि तुलसी का सेवन डायबिटीज, हृदय रोग, तनाव और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी अध्ययन में तुलसी के सेवन से गंभीर नुकसान नहीं देखा गया।
विशेष रूप से, वन तुलसी एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाती है। औषधीय गुणों से समृद्ध वन तुलसी का आयुर्वेद में खास स्थान है और इसे टॉनिक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जो शरीर की एनर्जी और जीवन शक्ति बढ़ाने में सहायक है।
वन तुलसी की सुगंध तेज होती है, जो प्राकृतिक रूप से मच्छरों को भी दूर करती है और हवा को शुद्ध रखती है। इसके सेवन से अनेक लाभ होते हैं। यह श्वसन तंत्र को मजबूत बनाती है, बलगम को निकालने में मदद करती है और अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, खांसी जैसी सांस की समस्याओं में राहत देती है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-माइक्रोबियल गुण होते हैं, जो संक्रमण से लड़ने की क्षमता को बढ़ाते हैं। यह तनाव को कम कर मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने में सहायक है। इसके अलावा, यह दिल को स्वस्थ रखने और सूजन को कम करने में भी मदद करती है।
आयुर्वेदिक टॉनिक के रूप में इसका उपयोग करने से थकान दूर होती है और एनर्जी मिलती है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।
वन तुलसी का काढ़ा या चाय पीने से सर्दी-खांसी और सांस की दिक्कतें दूर हो सकती हैं। वैज्ञानिक अध्ययन भी इसके लाभों की पुष्टि करते हैं।