वर्धन पुरी ने गणेश चतुर्थी पर याद किए दादा अमरीश पुरी, बोले- 'बप्पा हर साल परिवार को करते हैं एकजुट'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता वर्धन पुरी ने 14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी के अवसर पर अपने परिवार के साथ बप्पा का स्वागत करते हुए दिवंगत दादा और हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अमरीश पुरी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने बताया कि यह उत्सव उनके लिए महज़ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि परिवार के बिखरे हुए सदस्यों को एक छत के नीचे लाने का सबसे खूबसूरत ज़रिया है।
बचपन की यादें और मोदक की खुशबू
वर्धन ने बताया कि उनके परिवार में बप्पा को घर लाने की परंपरा जब से शुरू हुई, तब से सभी लोग मिलकर अपने हाथों से मोदक बनाते आए हैं। उन्होंने कहा, 'जब परिवार ने पहली बार बप्पा को घर लाने की परंपरा शुरू की थी, तब सभी एक साथ मिलकर बप्पा के पसंदीदा मोदक अपने हाथों से बनाया करते थे। इसमें दादू, दादी, माता-पिता, बहन साची और परिवार के बाकी सभी लोग शामिल होते थे।' यह परंपरा आज भी उतनी ही आत्मीयता के साथ जारी है।
उत्सव का तरीका — दो दिन, असीम आनंद
वर्धन ने बताया कि गणपति उत्सव के दौरान परिवार के सदस्य दुनिया के अलग-अलग कोनों से मुंबई में एकत्रित होते हैं। वे अपने मंदिर में स्थापित उसी गणपति की मूर्ति को घर के बैठक वाले कमरे में लाते हैं। 'इसके बाद दो दिनों तक बप्पा का जन्मदिन धूमधाम से मनाया जाता है। इस दौरान घर में स्वादिष्ट महाराष्ट्रीयन खाना और ढेर सारे मोदक बनाए जाते हैं,' उन्होंने कहा।
पर्यावरण के प्रति जागरूकता
दो दिन के उत्सव के बाद पूरे परिवार की मौजूदगी में बप्पा को वापस मंदिर ले जाया जाता है। वर्धन ने बताया कि विसर्जन के लिए उनका परिवार नारियल से बनी पर्यावरण के अनुकूल गणपति की मूर्ति लाता है। उन्होंने कहा, 'बप्पा का उत्सव मनाने के साथ-साथ सबसे खूबसूरत रचना यानी धरती माँ का ख्याल रखना भी ज़रूरी है।'
अमरीश पुरी की विरासत और 'मोगैम्बो' की अमर छाप
वर्धन पुरी, हिंदी सिनेमा के महान अभिनेता अमरीश पुरी के पोते हैं। अमरीश पुरी ने अपने सशक्त अभिनय से बॉलीवुड में अमिट पहचान बनाई। 1987 में प्रदर्शित फिल्म 'मिस्टर इंडिया' में उनके 'मोगैम्बो' किरदार का संवाद और अंदाज़ इतना मशहूर हुआ कि वे हिंदी सिनेमा के सर्वाधिक यादगार खलनायकों में शुमार हो गए। 12 जनवरी 2005 को 72 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया था, परंतु उनका काम आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित है।
गणेश चतुर्थी — आस्था से परे पारिवारिक बंधन का उत्सव
वर्धन ने भावुक होते हुए कहा, 'हर साल बप्पा परिवार को एक-दूसरे के और करीब ले आते हैं। गणेश चतुर्थी हमारे लिए सिर्फ धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि परिवार के साथ समय बिताने और रिश्तों को और मज़बूत करने का मौका भी है।' यह भावना इस त्योहार की सार्वभौमिक शक्ति को उजागर करती है — जो पीढ़ियों को, यादों को और आस्था को एक सूत्र में पिरोती है।