जया बच्चन ने वीआईपी संस्कृति की कड़ी निंदा की, कहा- यह सम्मान का प्रश्न है
सारांश
Key Takeaways
- वीआईपी संस्कृति आम नागरिकों के जीवन को प्रभावित कर रही है।
- सांसदों को वीआईपी मूवमेंट के कारण लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।
- यह वीआईपी संस्कृति आपातकालीन सेवाओं को भी बाधित कर रही है।
- जया बच्चन ने इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाने की मांग की है।
- दिल्ली में यह समस्या गंभीर है, जिसे सुधारने की आवश्यकता है।
नई दिल्ली, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राज्यसभा सांसद जया बच्चन ने वीआईपी संस्कृति के खिलाफ अपनी कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने राज्यसभा में बयान देते हुए इसे एक गंभीर मुद्दा बताया। सांसद ने दिल्ली में बढ़ती वीआईपी संस्कृति की प्रवृत्ति पर अपनी चिंता व्यक्त की और इसे समाज के लिए एक बड़ा खतरा बताया।
उन्होंने कहा कि वीआईपी संस्कृति खासकर जैसे दिल्ली जैसे महानगर में आम लोगों के जीवन में बाधा उत्पन्न कर रही है। जब भी किसी वीआईपी का आवागमन होता है, चाहे वह कोई राजनेता हो या अन्य गणमान्य व्यक्ति, तब सड़कें आम जनता के लिए बंद कर दी जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप ट्रैफिक डायवर्जन किया जाता है और आम नागरिकों को लंबे समय तक अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए इंतजार करना पड़ता है।
जया बच्चन ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि हाल ही में जब वह संसद से बाहर निकल रही थीं, तब मुख्य द्वार को वीआईपी मूवमेंट के कारण बंद कर दिया गया, जिससे उन्हें और अन्य सांसदों को भी रोका गया। उन्होंने इसे अपने 22 वर्षों के संसदीय जीवन का सबसे शर्मनाक अनुभव बताया। उनका कहना था कि जनप्रतिनिधि होने के नाते इस तरह का व्यवहार अस्वीकार्य है, क्योंकि वे किसी भी वीआईपी के लिए खतरा नहीं हैं।
उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां बड़े राजनीतिक नेता रहते हैं और वहां अक्सर सड़कें बंद कर दी जाती हैं, जिससे संसद पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। कई बार सांसदों को वीआईपी मूवमेंट के कारण आधे घंटे तक इंतजार करना पड़ता है।
उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि रिटायर्ड राज्यसभा सांसदों के विदाई समारोह में हिस्सा लेने के लिए उन्हें एक घंटे तक ट्रैफिक में फंसे रहना पड़ा, जिसका कारण भी वीआईपी मूवमेंट था। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में आम जनता में भारी नाराजगी देखी जाती है। सांसद ने विशेष रूप से चिंता जताई कि वीआईपी संस्कृति के कारण एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित होती हैं।
उन्होंने कहा कि कई बार एम्बुलेंस को भी रोका जा सकता है, जो मानव जीवन के लिए अत्यंत खतरनाक है। यदि समय पर इलाज न मिले तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में कहा कि उन्होंने कई देशों का दौरा किया है, जहां वीआईपी मूवमेंट होता है, लेकिन वहां आम लोगों को इस तरह नहीं रोका जाता। भारत में यह समस्या और भी गंभीर है और इसे तुरंत सुधारने की आवश्यकता है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने सभापति, जो देश के उपराष्ट्रपति भी हैं, से अनुरोध किया कि वे सरकार के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करें और ठोस कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि वीआईपी संस्कृति को समाप्त करना आवश्यक है, ताकि आम करदाताओं को सम्मान मिल सके और लोकतंत्र की मूल भावना बनी रहे। यदि इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में सड़क पर हिंसा जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं, जो देश के लिए ठीक नहीं होंगी।