क्या विरार बिल्डिंग हादसा दुर्भाग्यपूर्ण है? आनंद दुबे का बयान

सारांश
Key Takeaways
- विरार बिल्डिंग हादसा में 14 से अधिक लोगों की मौत हुई।
- आनंद दुबे ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
- सरकार से सवाल उठाए जाएंगे।
- गैरकानूनी निर्माण पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
- अमेरिकी टैरिफ का भारत पर प्रभाव पड़ेगा।
मुंबई, 28 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। मुंबई के विरार में हुई बिल्डिंग दुर्घटना को शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे ने दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने राष्ट्र प्रेस से बातचीत के दौरान कहा कि इस हादसे में 14 से अधिक लोगों की जान चली गई है। निश्चित रूप से हम सरकार से सवाल पूछेंगे कि जब इतनी बड़ी बिल्डिंग का निर्माण हो रहा था, तो महानगरपालिका ने क्या किया? उस समय महानगरपालिका में किसकी सत्ता थी?
उन्होंने कहा कि इस जांच का क्या लाभ होगा, क्योंकि जिनकी जान गई, वे वापस नहीं आएंगे। इस बिल्डिंग के नीचे कितने ही लोगों की मौत हुई होगी, कितनी माताएं, बहनें और बच्चे इस हादसे का शिकार बने हैं। गैरकानूनी निर्माण की गतिविधियां लगातार चलती हैं, लेकिन सरकार इस पर ध्यान नहीं देती। वहीं, अगर कोई गरीब व्यक्ति अपने छोटे-मोटे काम से जीविका चला रहा है, तो उसे महानगरपालिका परेशान करती है।
आनंद दुबे ने कहा कि इस हादसे में शामिल सभी व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। किसी को भी नहीं छोड़ा जाना चाहिए, चाहे वह कोई भी हो। भाजपा की केंद्र और महाराष्ट्र सरकार से सवाल उठता है कि वे क्या कर रहे हैं। इस बिल्डिंग के संबंध में कई बार बीएमसी के पास शिकायतें गई होंगी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसका परिणाम यह हुआ कि आज यह बिल्डिंग गिर गई।
उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ की निंदा की और कहा कि इससे हमें भारी नुकसान होगा। भारत से निर्यात किए गए उत्पादों की मांग में कमी आएगी, जिससे रोजगार छिन जाएगा। कई विशेषज्ञों का कहना है कि इससे 10 लाख से ज्यादा लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है।
उन्होंने कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार की महत्ता को भी बताया। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने महाराष्ट्र में कांग्रेस सरकार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, तो वह डीके शिवकुमार हैं। इसी कारण भाजपा उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश कर रही है।
प्रधानमंत्री मोदी के जापान दौरे के संदर्भ में उन्होंने कहा कि जापान के साथ हमारे संबंध हमेशा अच्छे रहे हैं। हमें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री इस दौरे से कुछ अच्छा लेकर आएंगे जो भारत के लिए फायदेमंद होगा।