वारिस पठान का नीतीश कुमार पर कटाक्ष: मानसिक संतुलन में कमी और फैसले लेने में असमर्थ
सारांश
Key Takeaways
- नीतीश कुमार के स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
- वारिस पठान ने उनके निर्णय लेने की क्षमता पर सवाल खड़ा किया।
- भारत को युद्ध की स्थिति में अपनी नीति स्पष्ट करने की आवश्यकता है।
- बच्चों के सुरक्षा मुद्दे पर सोशल मीडिया बैन का निर्णय चर्चा का विषय है।
- सीमांचल की विकास की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
मुंबई, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के निर्णय पर एआईएमआईएम के नेता वारिस पठान ने उनके मानसिक स्वास्थ्य पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि उनका मानसिक संतुलन सही नहीं है और वह फैसले लेने में असमर्थ हैं।
वारिस पठान ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि एक मुख्यमंत्री राज्यसभा का सांसद बनने की ख्वाहिश रखता है। सच्चाई यह है कि उनका मानसिक संतुलन ठीक नहीं है। वह अपने फैसले खुद नहीं ले सकते। जब नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का निर्णय लिया, तो जदयू के कार्यालय में उनके कार्यकर्ताओं ने नाराजगी प्रकट की।
उन्होंने आगे कहा कि नीतीश कुमार स्वस्थ नहीं हैं। कभी वह किसी महिला का हिजाब खींच लेते हैं, कभी राज्यसभा जाने के लिए पोस्ट कर देते हैं, और समझ नहीं आ रहा कि क्या हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जो भी अगला मुख्यमंत्री बने, उन्हें सीमांचल की बदहाली को दूर करना चाहिए।
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष पर वारिस पठान ने कहा कि मेरा मानना है कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। रमजान में इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया। सुप्रीम लीडर की हत्या हुई। दुबई-कतर पर मिसाइलें छोड़ी जा रही हैं। भारत सरकार की युद्ध नीति क्या है? खामेनेई की मौत पर सरकार की ओर से कोई बयान नहीं आया। भारत के 50 हजार से ज्यादा लोग ईरान में रहते हैं, उन्हें कैसे लाया जाएगा? इजरायल में जो लोग फंसे हैं, उन्हें कैसे लाया जाएगा? युद्ध के विषय में भारत सरकार को आगे आना चाहिए।
वारिस पठान ने कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की सरकारों द्वारा बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के निर्णय पर कहा, "दोनों राज्यों की सरकारों ने यह निर्णय क्यों लिया? इसे देखना भी आवश्यक है। यदि सरकार सुरक्षा को लेकर कोई कदम उठाती है, खासकर जब बात बच्चों की सुरक्षा की हो, तो यह अच्छी बात है।"