यूट्यूबर आमिर शौकीन को 5 दिन की पुलिस कस्टडी, अहमदाबाद में वीडियो लोकेशन की होगी जांच
सारांश
मुख्य बातें
यूट्यूबर आमिर शौकीन को 24 अक्टूबर को अदालत ने पाँच दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। पुलिस ने छह दिन की रिमांड माँगी थी, लेकिन बचाव पक्ष के विरोध के बाद अदालत ने पाँच दिन की कस्टडी मंजूर की। जाँच एजेंसी कथित तौर पर उस वीडियो की वास्तविक रिकॉर्डिंग लोकेशन का पता लगाने के लिए पूछताछ करेगी, जिसे पुलिस ने अहमदाबाद में बनाया गया बताया है।
मुख्य घटनाक्रम
बचाव पक्ष के वकील शुभम गुप्ता ने बताया कि पुलिस ने अदालत में छह दिन की कस्टडी रिमांड की अर्जी दाखिल की थी। बचाव पक्ष ने इस अर्जी का विरोध किया, जिसके बाद अदालत ने पाँच दिन की रिमांड मंजूर की। पुलिस का दावा है कि विवादित वीडियो अहमदाबाद में रिकॉर्ड की गई थी, हालाँकि अभी तक किसी निश्चित स्थान का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
वकील विनीत जैन ने भी पुष्टि की कि पुलिस ने वीडियो में दिखाई देने वाले अन्य व्यक्तियों से पूछताछ और कुछ संभावित बरामदगी का हवाला देते हुए रिमांड की माँग की थी। रिमांड के दौरान आमिर शौकीन को दिल्ली से बाहर, संभवतः अहमदाबाद ले जाया जा सकता है।
एफआईआर में लगाई गई धाराएँ
वकील शुभम गुप्ता के अनुसार, बचाव पक्ष को सुनवाई के दौरान एफआईआर की प्रति उपलब्ध कराई गई। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 192, 196, 352 और 353 लगाई गई हैं। इसके अतिरिक्त, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC/ST) अधिनियम की धाराएँ भी अलग से जोड़ी गई हैं, जिनका एफआईआर में उल्लेख नहीं है।
वकील ने स्पष्ट किया कि मामले में लगाई गई कुछ धाराएँ गैर-जमानती हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब डिजिटल कंटेंट निर्माताओं पर कानूनी कार्रवाई को लेकर देशभर में बहस तेज हो रही है।
वीडियो और शिकायत का विवरण
वकील शुभम गुप्ता ने बताया कि उनकी जानकारी में केवल एक वीडियो है, जिसमें त्रिपुरा से संबंधित एक व्यक्ति के बारे में कथित तौर पर टिप्पणियाँ की गई थीं। वर्तमान मामले में इसी वीडियो को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है। वकील विनीत जैन ने यह भी कहा कि अब तक किसी शिकायतकर्ता की ओर से कोई औपचारिक शिकायती बयान सामने नहीं आया है — फिलहाल मामला पुलिस के बयान के आधार पर दर्ज एफआईआर पर टिका है।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
पाँच दिन की कस्टडी समाप्त होने पर पुलिस अदालत में रिपोर्ट दाखिल करेगी, जिसमें पूछताछ के बिंदु, जाँच के निष्कर्ष और सामने आए तथ्य शामिल होंगे। वकील ने बताया कि इस रिपोर्ट की प्रति बचाव पक्ष को भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा स्पष्ट होगी। गौरतलब है कि अभी तक वीडियो की कोई सटीक रिकॉर्डिंग लोकेशन सार्वजनिक नहीं हुई है — यह जानकारी रिमांड अवधि के बाद ही सामने आ सकती है।