नस्लीय दुर्व्यवहार मामला: इन्फ्लुएंसर आमिर शौकीन को तीस हजारी कोर्ट ने भेजा एक दिन की न्यायिक हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आमिर शौकीन को तीस हजारी कोर्ट ने 23 अक्टूबर 2026 को एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। त्रिपुरा के एक युवक के साथ नस्लीय दुर्व्यवहार और अपमान से जुड़े इस मामले में शौकीन को ड्यूटी जज के समक्ष पेश किया गया, जहाँ अदालत ने उन्हें शनिवार को दोबारा पेश करने का आदेश दिया।
अदालत में क्या हुआ
दिल्ली पुलिस ने सुनवाई के दौरान अदालत से आमिर शौकीन की छह दिन की पुलिस हिरासत की माँग की। हालाँकि, बचाव पक्ष के वकील ने इस माँग का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें अभी तक एफआईआर की प्रति नहीं दी गई है और न ही गिरफ्तारी के कारण स्पष्ट किए गए हैं।
बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में कहा, 'हमें एफआईआर की प्रति उपलब्ध कराई जानी चाहिए। अभी तक हमें एफआईआर की कॉपी नहीं दी गई है और न ही गिरफ्तारी के कारण बताए गए हैं।' अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पुलिस की हिरासत अर्जी अस्वीकार करते हुए एक दिन की न्यायिक हिरासत का आदेश दिया।
गिरफ्तारी और मामले की पृष्ठभूमि
दिल्ली पुलिस ने 22 अक्टूबर 2026 को आमिर शौकीन को गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई इंस्टाग्राम पर एक विवादित वीडियो वायरल होने और उसके संबंध में एफआईआर दर्ज होने के कुछ घंटों के भीतर की गई थी।
पुलिस ने सदर बाजार थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 192, 196, 352 और 353 के तहत मामला दर्ज किया है। यह मामला त्रिपुरा स्टूडेंट्स फोरम दिल्ली की शिकायत के आधार पर दर्ज हुआ, जिसने आरोप लगाया कि उक्त वीडियो में पूर्वोत्तर भारत के एक युवक के साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया और इससे पूर्वोत्तर के लोगों के प्रति भेदभाव एवं नस्लीय टिप्पणियों को बढ़ावा मिल सकता है।
शौकीन का पक्ष
विवाद बढ़ने के बाद आमिर शौकीन ने सोशल मीडिया पर सार्वजनिक माफी माँगी थी। उन्होंने दावा किया कि वायरल वीडियो एक पूर्व-निर्धारित स्क्रिप्ट के तहत बनाया गया था और वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति उनका परिचित है। शौकीन के अनुसार दोनों के बीच बातचीत मजाकिया अंदाज में हुई थी और उनका किसी की भावनाएँ आहत करने का कोई इरादा नहीं था।
गौरतलब है कि माफी के बावजूद शिकायतकर्ता संगठन ने अपनी शिकायत वापस नहीं ली और पुलिस से निष्पक्ष जाँच की माँग कायम रखी।
राष्ट्रीय चर्चा में कैसे आया मामला
यह मामला तब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया जब केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने सोशल मीडिया पर इसे उठाया। पूर्वोत्तर भारत के लोगों के साथ नस्लीय भेदभाव का यह कोई पहला मामला नहीं है — आलोचकों का कहना है कि ऐसी घटनाएँ बार-बार सामने आती हैं, लेकिन ठोस सामाजिक बदलाव अभी भी दूर है।
त्रिपुरा स्टूडेंट्स फोरम दिल्ली ने शिकायत में कहा था कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह व्यक्ति की गरिमा, सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा गंभीर मामला है। फिलहाल दिल्ली पुलिस मामले की जाँच जारी रखे हुए है और शौकीन को शनिवार, 24 अक्टूबर को संबंधित अदालत के समक्ष दोबारा पेश किया जाएगा।