एक युवती ने अपने विदेश में रहने वाले भाई पर गंभीर आरोप लगाए, झारखंड हाईकोर्ट ने एसएसपी को तलब किया
सारांश
Key Takeaways
- युवती का आरोप: भाई ने संपत्ति हड़पने के लिए मानसिक आरोग्यशाला में भर्ती कराया।
- हाईकोर्ट की कार्रवाई: एसएसपी को तलब कर एफआईआर की अनुपस्थिति का कारण पूछा गया।
- सुरक्षा निर्देश: युवती और माता-पिता की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश।
- विदेश मंत्रालय को शामिल किया गया: भाई के बारे में जानकारी के लिए।
- आर्थिक कठिनाई: युवती अपने परिवार के साथ कठिनाई में जीवन यापन कर रही है।
रांची, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड उच्च न्यायालय ने एक युवती द्वारा दायर हैबियस कॉर्पस याचिका की सुनवाई के दौरान जमशेदपुर के एसएसपी को वर्चुअल तरीके से तलब किया और पूछा कि उसकी शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की? युवती ने अपनी याचिका में यह आरोप लगाया कि ऑस्ट्रेलिया में निवास कर रहे उसके भाई ने पुश्तैनी संपत्ति को हड़पने की मंशा से अपने प्रभाव का उपयोग करके उसे जबरन 'मानसिक बीमार' घोषित कर रांची में एक मानसिक आरोग्यशाला में भर्ती करा दिया।
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एसएसपी से सीधा प्रश्न किया कि जब पीड़िता ने अपने भाई द्वारा मिल रही धमकियों की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी, तो अब तक प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की गई? अदालत ने यह स्पष्ट किया कि गंभीर शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए, जिस पर एसएसपी ने न्यायालय को आश्वासन दिया कि वे मामले की गहराई से जांच कर उचित निर्णय लेंगे।
पीड़िता ने अदालत को बताया कि वह वर्तमान में जमशेदपुर के कदमा थाना क्षेत्र में अपने बीमार माता-पिता के साथ बेहद आर्थिक कठिनाई में जीवन यापन कर रही है। उसने यह भी बताया कि वह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने वाली एक शिक्षित युवती है। युवती ने आरोप लगाया कि उसके भाई ने दादा की संपत्ति को 'गिफ्ट डीड' के माध्यम से अपने नाम पर कर लिया और फिर उसे बेच दिया।
भाई ने अपने प्रभाव का उपयोग करके उसे जबरन रांची के डेविस इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री और बाद में रिनपास जैसे मानसिक आरोग्यशालाओं में भर्ती कराया, ताकि वह संपत्ति पर अपना दावा न कर सके। उच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के सचिव को भी प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया है, ताकि ऑस्ट्रेलिया में रह रहे युवती के भाई के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सके।
खंडपीठ ने पहले ही जमशेदपुर के एसएसपी को निर्देश दिया था कि वह युवती और उसके माता-पिता की सुरक्षा सुनिश्चित करें। न्यायालय ने चेतावनी दी कि यदि परिवार के साथ कोई भी अप्रिय घटना होती है, तो इसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी एसएसपी की होगी। अदालत ने युवती की मां के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि वे भाई के साथ 'सेटलमेंट' के मुद्दों पर बातचीत कर अगली सुनवाई में शपथ पत्र प्रस्तुत करें। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता खुशबू कुमारी और शैलेश कुमार ने पक्ष रखा।