क्या हैप्पी बर्थडे अजीम प्रेमजी के पीछे की प्रेरणादायक कहानी है?

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क्या हैप्पी बर्थडे अजीम प्रेमजी के पीछे की प्रेरणादायक कहानी है?

सारांश

अजीम प्रेमजी का जीवन एक प्रेरणादायक कहानी है। स्टैनफोर्ड से लौटकर, उन्होंने विप्रो को एक आईटी दिग्गज बनाया। जानिए उनके संघर्ष और सफलता की कहानी।

मुख्य बातें

अजीम प्रेमजी की प्रेरणादायक यात्रा संघर्ष और सफलता का प्रतीक है।
विप्रो का निर्माण आईटी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
उन्होंने सामाजिक जिम्मेदारी के साथ उद्यमिता को जोड़ा।
विप्रो आज 100 से अधिक देशों में कार्यरत है।
दानवीर अजीम प्रेमजी ने 15 अरब डॉलर से अधिक की राशि दान की है।

नई दिल्ली, 23 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। अजीम प्रेमजी, भारत के कारोबारी क्षेत्र में एक ऐसा नाम है, जिसे किसी पहचान की आवश्यकता नहीं है। वह 24 जुलाई, 1945 को जन्मे थे और इस गुरुवार को 80 साल के हो जाएंगे।

अजीम प्रेमजी को व्यापार विरासत में मिला था, लेकिन उनकी यात्रा में कई चुनौतियाँ रहीं।

अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे अजीम प्रेमजी को 11 अगस्त, 1966 को अपनी मां का एक फोन आया, जिसमें उन्हें अपने पिता की मृत्यु का समाचार मिला। इसके बाद, उन्होंने तुरंत भारत लौटकर पिता के व्यवसाय का संचालन शुरू किया। उस समय कंपनी पर भारी कर्ज था, जिसे अजीम प्रेमजी ने नए सिरे से संभाला।

वास्तव में, वेस्टर्न इंडिया वेजिटेबल प्रोजेक्ट लिमिटेड, जो आगे चलकर विप्रो बनी, मुंबई से 370 किलोमीटर दूर अमलनेर में एक तेल मिल संचालित कर रही थी। समय के साथ, अजीम प्रेमजी को यह समझ में आया कि केवल तेल के कारोबार से आगे बढ़ना संभव नहीं है, इसलिए कंपनी को अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार करना होगा।

इसके बाद, अजीम प्रेमजी ने पाम ऑयल, साबुन और इन्फ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया, लेकिन उनकी बड़ी सफलता इमरजेंसी के समाप्त होने के बाद मिली।

1977 में, मोरारजी देसाई की कैबिनेट में उद्योग मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस ने विदेशी कंपनियों को फेरा कानून का पालन करने का आदेश दिया। 1973 में पारित इस कानून के तहत, भारत में व्यापार करने वाली विदेशी कंपनियों को बहुसंख्यक हिस्सेदारी भारतीय के पास रखनी चाहिए। कई कंपनियों ने इस कानून का पालन किया, जबकि आईबीएम और कोका कोला ने देश छोड़ने का निर्णय लिया।

इसी समय, अजीम प्रेमजी को आईटी सेक्टर में एक बड़ा अवसर दिखाई दिया और उन्होंने इस क्षेत्र में कारोबार करने के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन किया। इस दौरान, वेस्टर्न इंडिया वेजिटेबल प्रोजेक्ट लिमिटेड का नाम बदलकर विप्रो रख दिया गया।

कंपनी ने पहले हार्डवेयर में काम करना शुरू किया, लेकिन समय के साथ सॉफ्टवेयर का कारोबार तेजी से बढ़ा।

2019 में, अजीम प्रेमजी ने विप्रो के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया और उनके बेटे रिशद प्रेमजी ने उनकी जगह ली।

वर्तमान में, विप्रो का व्यापार 100 से अधिक देशों में फैला है। कंपनी की मार्केट कैप लगभग 2.80 लाख करोड़ रुपए है। वित्त वर्ष 25 में कंपनी ने 13,218 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया।

इसके अलावा, अजीम प्रेमजी का नाम देश के बड़े दानवीरों में भी आता है। अब तक उन्होंने करीब 15 अरब डॉलर से अधिक की राशि दान की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अजीम प्रेमजी की कहानी केवल व्यक्तिगत सफलता की नहीं, बल्कि भारतीय उद्यमिता और सामाजिक जिम्मेदारी की एक मिसाल है। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि एक अच्छे व्यवसायी होने के साथ-साथ, एक दानवीर भी होना चाहिए।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अजीम प्रेमजी का जन्म कब हुआ?
अजीम प्रेमजी का जन्म 24 जुलाई, 1945 को हुआ था।
विप्रो का मूल नाम क्या था?
विप्रो का मूल नाम वेस्टर्न इंडिया वेजिटेबल प्रोजेक्ट लिमिटेड था।
अजीम प्रेमजी ने किस क्षेत्र में विस्तार किया?
अजीम प्रेमजी ने पाम ऑयल, साबुन और इन्फ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया।
विप्रो की मार्केट कैप क्या है?
विप्रो की मार्केट कैप लगभग 2.80 लाख करोड़ रुपए है।
अजीम प्रेमजी ने अब तक कितनी राशि दान की है?
अजीम प्रेमजी ने अब तक करीब 15 अरब डॉलर से अधिक की राशि दान की है।
राष्ट्र प्रेस
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