क्या म्यूचुअल फंड, एफडी और आरडी में अंतर समझना जरूरी है?
सारांश
Key Takeaways
- म्यूचुअल फंड में अधिक मुनाफा लेकिन जोखिम भी होता है।
- एफडी और आरडी सुरक्षित निवेश के विकल्प हैं।
- हर व्यक्ति को अपनी आर्थिक जरूरतें समझकर निवेश करना चाहिए।
- सही जानकारी और सलाह से ही बेहतर निवेश किया जा सकता है।
- लंबी अवधि के लिए निवेश करना लाभकारी हो सकता है।
मुंबई, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्तमान समय में पैसे की बचत और निवेश के लिए लोगों के पास कई विकल्प हैं। इनमें शेयर मार्केट के अलावा म्यूचुअल फंड, एफडी और आरडी मुख्यतः उपयोग किए जाने वाले निवेश के साधन हैं। हालांकि, अनेक लोग इनके नाम तो सुन चुके हैं, लेकिन इनके बीच का फर्क और इनमें मिलने वाले मुनाफे को सही तरीके से नहीं समझ पाते। ऐसे में निवेश से पहले इन तीनों को समझना बेहद आवश्यक हो जाता है。
म्यूचुअल फंड एक ऐसा निवेश का माध्यम है, जिसमें विभिन्न निवेशकों का पैसा एकत्र किया जाता है और उसे शेयर बाजार, बॉंड या अन्य वित्तीय साधनों में लगाया जाता है। इसे पेशेवर फंड प्रबंधक संभालते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आप हर महीने 2000 रुपए म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, तो लंबे समय में बाजार के प्रदर्शन के अनुसार आपका पैसा बढ़ सकता है। इसमें मुनाफा अधिक हो सकता है, लेकिन जोखिम भी रहता है।
वहीं, एफडी यानी फिक्स्ड डिपॉजिट बैंक द्वारा दी जाने वाली एक सुरक्षित निवेश योजना है। इसमें आप एक निश्चित राशि बैंक में एक निश्चित समय के लिए जमा करते हैं और उस पर पहले से तय ब्याज मिलता है। मान लीजिए, आपने बैंक में 1 लाख रुपए की एफडी 5 साल के लिए कराई है, तो आपको तय ब्याज दर के अनुसार निश्चित रिटर्न मिलेगा। इसमें जोखिम बहुत कम होता है, लेकिन मुनाफा भी सीमित होता है।
आरडी यानी रिकरिंग डिपॉजिट उन लोगों के लिए होती है, जो हर महीने थोड़ी-थोड़ी रकम बचाना चाहते हैं। इसमें तय समय तक हर महीने एक निश्चित राशि जमा करनी होती है और अंत में ब्याज के साथ पूरी रकम मिल जाती है। जैसे, यदि आप हर महीने 1000 रुपए आरडी में जमा करते हैं, तो कुछ साल बाद आपको एक अच्छी रकम मिल सकती है।
बाजार के जानकारों के अनुसार, म्यूचुअल फंड बाजार से जुड़ा होता है, इसलिए इसमें जोखिम और मुनाफा दोनों अधिक हो सकते हैं। वहीं, एफडी और आरडी पूरी तरह सुरक्षित मानी जाती हैं, क्योंकि इनमें बैंक तय ब्याज देते हैं। म्यूचुअल फंड में रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती, जबकि एफडी और आरडी में रिटर्न पहले से तय होता है।
लंबे समय में देखा जाए तो, म्यूचुअल फंड से मिलने वाला मुनाफा एफडी और आरडी से अधिक हो सकता है। हालांकि, इसमें उतार-चढ़ाव का जोखिम रहता है। एफडी और आरडी उन लोगों के लिए बेहतर होती हैं, जो सुरक्षित और निश्चित रिटर्न चाहते हैं।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, जो लोग जोखिम लेने को तैयार हैं और लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए म्यूचुअल फंड बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। वहीं, सुरक्षित निवेश और नियमित बचत के लिए एफडी और आरडी अधिक उपयुक्त मानी जाती हैं।
जानकारों का कहना है कि निवेश करते समय केवल मुनाफा ही नहीं, बल्कि जोखिम और अपनी आवश्यकताओं को समझना भी आवश्यक है। म्यूचुअल फंड, एफडी और आरडी तीनों के अपने फायदे हैं। लेकिन सही जानकारी के साथ या एक्सपर्ट्स की सलाह के अनुसार निवेश करने से ही भविष्य के लिए बेहतर सेविंग्स की जा सकती है।
-राष्ट्र प्रेस
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