क्या एआई का बढ़ा हुआ शोर कम होने से भारत में विदेशी निवेशकों की वापसी संभव है?
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अगर एआई से जुड़ी उत्साह की हाइप में कमी आती है, तो वैश्विक निवेशकों का ध्यान पुनः भारत की दिशा में आकर्षित हो सकता है। इससे भारतीय बाजारों को महत्वपूर्ण लाभ मिल सकता है। यह जानकारी गुरुवार को जारी बे कैपिटल की रिपोर्ट में दी गई है।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि विश्वभर में एआई से संबंधित अधिकांश इन्फ्रास्ट्रक्चर को कर्ज लेकर स्थापित किया जा रहा है। यह परिदृश्य पहले देखे गए टेलीकॉम और फाइबर नेटवर्क के बूम जैसा प्रतीत होता है, जहां बाद में जोखिम सामने आए थे।
रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों ने जनरेटिव एआई पर 30 से 40 अरब डॉलर का निवेश किया है, लेकिन 95 प्रतिशत संस्थाओं को अब तक कोई लाभ नहीं मिल पाया है।
वर्तमान में एआई को लेकर बने निवेश के माहौल में भारत की बाजार संरचना को कमजोर माना जा रहा है। लेकिन जब एआई का हाइप समाप्त होगा, तो यह स्थिति भारत के लिए लाभदायक साबित हो सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई जैसे चर्चित विषय में भारत की कम भागीदारी भविष्य में असमान लेकिन बड़ा लाभ दे सकती है, जब निवेशक पुनः वास्तविक आर्थिक आधार पर निवेश करेंगे।
भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण या बड़े डाटा सेंटर जैसे एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी है। इसके बावजूद, भारत तेजी से एक ऐसा देश बन रहा है जहां एआई के उपयोग से कार्य अधिक तेज और आसान हो रहा है। इससे भारत के बड़े घरेलू बाजार में कार्य करने की क्षमता बढ़ रही है और उत्पादन भी बेहतर हो रहा है।
विश्वभर में एआई से जुड़े निवेश के कारण पूंजी का प्रवाह भारत से बाहर जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में करीब 23 अरब डॉलर और 2025 में लगभग 13 अरब डॉलर का विदेशी निवेश भारत से बाहर गया है।
यदि एआई में निवेश के लिए निवेशकों ने पहले 'सेल इंडिया' का निर्णय लिया था, तो एआई के हाइप खत्म होने पर 'बाय इंडिया' उनका अगला निर्णय हो सकता है।
विशेष रूप से, भारत की आर्थिक स्थिति दुनिया की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनी हुई है, भले ही विदेशी निवेश का प्रवाह कम हुआ है।
भारत वैश्विक जीडीपी वृद्धि में 9 प्रतिशत का योगदान देता है और 2025 से 2028 के बीच भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत से अधिक रहने की संभावना है, जो G20 देशों में सबसे तेज है।