भारतीय आईटी सेक्टर में भर्ती 10% बढ़ी, एआई पदों की हिस्सेदारी 1% से 4% हुई: फाउंडइट रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारत के तकनीकी रोज़गार बाज़ार में 6 अगस्त 2026 को जारी जॉब पोर्टल फाउंडइट की ताज़ा रिपोर्ट ने एक विरोधाभासी तस्वीर पेश की है — एक तरफ आईटी ऑक्युपेशन इंडेक्स में सालाना 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है, वहीं दूसरी तरफ एंट्री-लेवल आईटी नौकरियों में पिछले एक वर्ष में लगभग 25 प्रतिशत की गिरावट आई है। रिपोर्ट के अनुसार, यह बदलाव इस बात का संकेत है कि तकनीकी कौशल की माँग अब पारंपरिक आईटी कंपनियों की सीमाओं से बाहर निकलकर कई अन्य उद्योगों में फैल रही है।
एआई भूमिकाओं में तेज़ उछाल
रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े पदों की एंट्री-लेवल भर्ती में हिस्सेदारी एक वर्ष पूर्व मात्र 1 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 4 प्रतिशत हो गई है। उल्लेखनीय यह है कि कंपनियाँ अब केवल एआई मॉडल विकसित करने वाले उम्मीदवारों की नहीं, बल्कि ऐसे पेशेवरों की तलाश कर रही हैं जो एआई सिस्टम का संचालन, सत्यापन और अनुकूलन कर सकें। यह बदलाव दर्शाता है कि उद्योग अब एआई के निर्माण से आगे बढ़कर उसके व्यावहारिक प्रबंधन की ओर केंद्रित हो रहा है।
आईटी सेक्टर में फ्रेशर भर्ती की घटती हिस्सेदारी
कुल फ्रेशर भर्ती में आईटी उद्योग का योगदान पिछले वर्ष 32 प्रतिशत से घटकर 24 प्रतिशत रह गया है। इसके साथ ही, आईटी इंडस्ट्री इंडेक्स में सालाना 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। समग्र फ्रेशर भर्ती में भी माह-दर-माह 2 प्रतिशत और साल-दर-साल 10 प्रतिशत की कमी देखी गई है। गौरतलब है कि यह गिरावट किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक पुनर्संरचना का हिस्सा है जिसमें तकनीकी नौकरियाँ बैंकिंग, विनिर्माण, हेल्थकेयर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) जैसे क्षेत्रों में स्थानांतरित हो रही हैं।
अनुभवी पेशेवरों की माँग में इज़ाफ़ा
7 से 10 वर्ष के अनुभव वाले तकनीकी पेशेवर इस समय सबसे अधिक माँग में हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह एकमात्र अनुभव वर्ग है जिसमें मासिक आधार पर 2 प्रतिशत और वार्षिक आधार पर 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह प्रवृत्ति बताती है कि कंपनियाँ ऐसे पेशेवरों को प्राथमिकता दे रही हैं जो नई तकनीकों को मौजूदा व्यावसायिक प्रक्रियाओं में एकीकृत कर सकें।
हेल्थकेयर और सेल्स में फ्रेशर भर्ती की सबसे तेज़ वृद्धि
फ्रेशर भर्ती के क्षेत्रवार विश्लेषण में सबसे बड़ी उछाल मेडिकल और हेल्थकेयर सेक्टर में देखी गई, जहाँ हिस्सेदारी 7 प्रतिशत से बढ़कर 11 प्रतिशत हो गई — यह सभी क्षेत्रों में सर्वाधिक वृद्धि है। इसके अलावा, सेल्स और बिजनेस डेवलपमेंट की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत, तथा इंजीनियरिंग एवं उत्पादन की हिस्सेदारी 6 प्रतिशत से बढ़कर 8 प्रतिशत हो गई। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) पृष्ठभूमि के स्नातकों की कुल फ्रेशर भर्ती में हिस्सेदारी 42 प्रतिशत बनी हुई है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
फाउंडइट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तरुण सिन्हा ने कहा, 'जो कंपनियाँ आर्थिक सुस्ती के दौरान भी नए स्नातकों की भर्ती जारी रखती हैं, वे भविष्य की क्षमताओं में निवेश कर रही हैं। वे आने वाले वर्षों के नेतृत्व को तैयार कर रही हैं, बजाय इसके कि भविष्य में महंगे अनुभवी कर्मचारियों के लिए प्रतिस्पर्धा करनी पड़े।' यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब भारतीय आईटी उद्योग वैश्विक माँग में अनिश्चितता और एआई-जनित स्वचालन के दोहरे दबाव से गुज़र रहा है। आगे चलकर, तकनीकी रोज़गार बाज़ार में वही उम्मीदवार और कंपनियाँ आगे रहेंगी जो एआई-सक्षम कौशल को तेज़ी से अपना सकें।