29 जुलाई 2026
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भारत के आईटी सेक्टर में वित्त वर्ष 2026 में जुड़ीं 1.35 लाख नौकरियाँ, कुल वर्कफोर्स 60 लाख के पार

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भारत के आईटी सेक्टर में वित्त वर्ष 2026 में जुड़ीं 1.35 लाख नौकरियाँ, कुल वर्कफोर्स 60 लाख के पार

सारांश

एआई से नौकरियाँ जाने की आशंकाओं के बीच भारत के आईटी सेक्टर ने वित्त वर्ष 2025-26 में 1.35 लाख नई नौकरियाँ जोड़कर कुल वर्कफोर्स 60 लाख पहुँचाई। सरकार ने माना कि दोहराव वाली भूमिकाएँ जोखिम में हैं, लेकिन हाइब्रिड स्किल्स की माँग तेज़ी से बढ़ रही है।

मुख्य बातें

MeitY ने 29 जुलाई 2026 को लोकसभा में बताया कि आईटी सेक्टर में वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 1.35 लाख नई नौकरियाँ सृजित हुईं।
देश की कुल आईटी वर्कफोर्स बढ़कर 60 लाख हो गई।
नीति आयोग के आकलन के अनुसार, जूनियर QA और लेवल-1 आईटी सपोर्ट जैसी दोहराव वाली भूमिकाएँ ऑटोमेशन से सर्वाधिक प्रभावित होने की आशंका।
एडीपी रिसर्च के अनुसार भारत में 30% कर्मचारी नौकरी सुरक्षित मानते हैं — APAC में पहला स्थान।
जेनरेटिव एआई नौकरियाँ खत्म नहीं कर रहा, बल्कि हाइब्रिड तकनीकी-व्यावसायिक कौशल की माँग बढ़ा रहा है।

भारत का सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र वित्त वर्ष 2025-26 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और ऑटोमेशन से रोज़गार खत्म होने की आशंकाओं को नकारते हुए शुद्ध नियोक्ता बना रहा। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने बुधवार, 29 जुलाई 2026 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि इस अवधि में आईटी उद्योग में करीब 1.35 लाख नई नौकरियाँ सृजित हुईं और कुल कर्मचारी संख्या बढ़कर 60 लाख हो गई।

मुख्य घटनाक्रम

संसद में पेश किए गए सरकारी आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक देश के आईटी उद्योग की कुल कार्यबल संख्या 60 लाख तक पहुँच गई। यह आँकड़ा तब और महत्त्वपूर्ण हो जाता है जब वैश्विक स्तर पर एआई-जनित विस्थापन को लेकर बहस तेज़ है। मंत्रालय ने माना कि उद्योग में कार्य-संरचना में बड़े बदलाव हो रहे हैं, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि कुल रोज़गार में वृद्धि जारी है।

किन भूमिकाओं पर सबसे अधिक असर

सरकार ने नीति आयोग के आकलन का हवाला देते हुए स्वीकार किया कि जूनियर क्वालिटी एश्योरेंस और लेवल-1 आईटी सपोर्ट जैसी शुरुआती स्तर की, दोहराव वाली भूमिकाएँ ऑटोमेशन से सर्वाधिक प्रभावित होने की आशंका है। हालाँकि, मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि नई तकनीकों के कारण विशेष कौशल — विशेषकर अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों में दक्ष — कर्मचारियों की माँग तेज़ी से बढ़ रही है।

उद्योग संगठन नैसकॉम (NASSCOM) ने पहले कहा था कि कंपनियों में हो रहे कर्मचारी पुनर्गठन का मुख्य कारण बदलते कारोबारी मॉडल और आर्थिक चक्र हैं, न कि प्रौद्योगिकी क्षेत्र में रोज़गार का स्थायी संकुचन।

नौकरी सुरक्षा पर भारत की स्थिति

एडीपी रिसर्च की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करीब 30 प्रतिशत कर्मचारियों को अपनी नौकरी सुरक्षित महसूस होती है — इस मामले में भारत वैश्विक स्तर पर तीसरे और एशिया-प्रशांत (APAC) क्षेत्र में पहले स्थान पर है। तुलनात्मक रूप से, पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में केवल 18 प्रतिशत कर्मचारियों ने अपनी नौकरी को सुरक्षित माना।

भारत में यह धारणा कार्य-प्रकार के अनुसार भिन्न है। ज्ञान-आधारित कार्य करने वाले 37 प्रतिशत कर्मचारियों ने नौकरी को सुरक्षित बताया, जबकि कुशल कार्य वालों में यह आँकड़ा 18 प्रतिशत और दोहराव वाले कार्य करने वालों में 17 प्रतिशत रहा।

जेनरेटिव एआई: खतरा या बदलाव?

एक अन्य हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि जेनरेटिव एआई भारत के आईटी सेक्टर में बड़े पैमाने पर नौकरियाँ समाप्त नहीं कर रहा, बल्कि काम करने के तरीके में बदलाव ला रहा है। इससे उत्पादकता बढ़ रही है और कंपनियों की माँग ऐसे कर्मचारियों की ओर स्थानांतरित हो रही है जिनके पास तकनीकी और व्यावसायिक दोनों तरह के हाइब्रिड कौशल हों। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आईटी कंपनियाँ एआई-केंद्रित पुनर्गठन से गुज़र रही हैं।

आगे की राह

गौरतलब है कि भारत का आईटी क्षेत्र देश के कुल निर्यात में महत्त्वपूर्ण हिस्सेदारी रखता है और लाखों मध्यवर्गीय परिवारों की आजीविका का आधार है। सरकारी आँकड़े बताते हैं कि एआई-युग में भी यह क्षेत्र रोज़गार-सृजन की क्षमता बनाए हुए है — हालाँकि भूमिकाओं की प्रकृति तेज़ी से बदल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग ही इस क्षेत्र में रोज़गार की दीर्घकालिक सुरक्षा की कुंजी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इनमें से कितनी भूमिकाएँ दीर्घकालिक हैं और कितनी अगले दो-तीन वर्षों में एआई के अगले चरण की भेंट चढ़ सकती हैं। नीति आयोग का यह स्वीकार करना कि शुरुआती स्तर की भूमिकाएँ जोखिम में हैं, उन लाखों युवाओं के लिए चिंताजनक है जो आईटी को पहली नौकरी की सीढ़ी मानते हैं। वर्कफोर्स की संख्या बढ़ना और उसकी गुणवत्ता व स्थिरता — दोनों एक नहीं हैं; सरकार को री-स्किलिंग कार्यक्रमों के ठोस आँकड़े भी सार्वजनिक करने चाहिए।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वित्त वर्ष 2026 में भारत के आईटी सेक्टर में कितनी नई नौकरियाँ आईं?
MeitY के संसद में दिए लिखित उत्तर के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में आईटी सेक्टर में करीब 1.35 लाख नई नौकरियाँ जुड़ीं और कुल वर्कफोर्स 60 लाख हो गई।
एआई और ऑटोमेशन से आईटी की कौन-सी नौकरियाँ सबसे अधिक प्रभावित होंगी?
नीति आयोग के आकलन के अनुसार, जूनियर क्वालिटी एश्योरेंस और लेवल-1 आईटी सपोर्ट जैसी दोहराव वाली, शुरुआती स्तर की भूमिकाएँ ऑटोमेशन से सर्वाधिक प्रभावित होने की आशंका है। हाइब्रिड तकनीकी-व्यावसायिक कौशल वाले पदों की माँग बढ़ रही है।
क्या जेनरेटिव एआई भारत में आईटी नौकरियाँ खत्म कर रहा है?
एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जेनरेटिव एआई बड़े पैमाने पर नौकरियाँ समाप्त नहीं कर रहा, बल्कि काम करने के तरीके में बदलाव ला रहा है। इससे उत्पादकता बढ़ रही है और कंपनियाँ हाइब्रिड स्किल्स वाले कर्मचारियों को प्राथमिकता दे रही हैं।
भारत में आईटी कर्मचारियों को नौकरी कितनी सुरक्षित लगती है?
एडीपी रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करीब 30 प्रतिशत कर्मचारी अपनी नौकरी सुरक्षित मानते हैं — यह APAC में पहला और वैश्विक स्तर पर तीसरा स्थान है। ज्ञान-आधारित कार्य करने वालों में यह आँकड़ा 37 प्रतिशत है, जबकि दोहराव वाले कार्यों में केवल 17 प्रतिशत।
नैसकॉम के अनुसार आईटी कंपनियों में कर्मचारी पुनर्गठन क्यों हो रहा है?
नैसकॉम ने कहा है कि कंपनियों में हो रहे पुनर्गठन का मुख्य कारण बदलते कारोबारी मॉडल और आर्थिक चक्र हैं, न कि प्रौद्योगिकी क्षेत्र में रोज़गार का स्थायी संकुचन। यह स्पष्टीकरण एआई से नौकरियाँ जाने की व्यापक आशंकाओं के संदर्भ में आया है।
राष्ट्र प्रेस
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