क्या भारत टैरिफ से निपटने के लिए चार सूत्रीय दृष्टिकोण अपना रहा है, विकास दर 7.4 प्रतिशत रहने की उम्मीद : महेंद्र देव?
सारांश
Key Takeaways
- भारत सरकार टैरिफ के मुद्दे पर चार सूत्रीय दृष्टिकोण अपना रही है।
- विकास दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
- निवेश दर को 35 प्रतिशत तक बढ़ाने की आवश्यकता है।
- निर्यात में विविधता लाने पर जोर दिया जा रहा है।
- फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) पर बातचीत जारी है।
नई दिल्ली, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के चेयरमैन एस. महेंद्र देव ने कहा कि टैरिफ से निपटने के लिए भारत सरकार चार सूत्रीय दृष्टिकोण अपना रही है। इसमें इंडस्ट्रीज को सहायता प्रदान करना, निर्यात में विविधता लाना और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) शामिल हैं।
दिल्ली में स्कॉच शिखर सम्मेलन में राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए महेंद्र देव ने कहा, "टैरिफ से निपटने के लिए भारत सरकार चार सूत्रीय दृष्टिकोण अपना रही है। पहला - इंडस्ट्रीज को मदद पहुंचाना, दूसरा- एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों में निर्यात का विविधीकरण करना, तीसरा- अन्य देशों से फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) करना और चौथा- अमेरिका से ट्रेड डील के लिए बातचीत जारी रखना।"
उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि जापान, साउथ कोरिया और अन्य कई देश इसे प्राप्त कर चुके हैं। हमारे पास सही नीतियां हैं और विकसित भारत के लिए सात से आठ प्रतिशत की वृद्धि दर आवश्यक है। इसके लिए हमारी निवेश दर 35 प्रतिशत होनी चाहिए, जो वर्तमान में 30 प्रतिशत है। इसे बढ़ाने की आवश्यकता है।
विकास दर के बारे में बात करते हुए ईएसी-पीएम के चेयरमैन ने कहा कि इस वर्ष देश की विकास दर 7.4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है और अगले वर्ष हमारी विकास दर 6.5 प्रतिशत से 7 प्रतिशत के बीच रह सकती है। कोरोना के बाद चार वर्षों में हमारी वृद्धि दर औसत 7.7 प्रतिशत रही है।
उन्होंने आगे बताया कि सरकार विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तेजी से कारोबार में आसानी को बढ़ावा दे रही है। हाल ही में केंद्र ने परमाणु सेक्टर को निजी क्षेत्र की कंपनियों के लिए खोला है और इंश्योरेंस सेक्टर में 100 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी दे दी है। साथ ही, कई कानूनों का गैर-अपराधीकरण और अविनियमन किया गया है।