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क्या जीएसटी बदलाव और फ्रंट लोडिंग निर्यात ने जीडीपी ग्रोथ को प्रभावित किया है? अर्थशास्त्री पंकज जायसवाल

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क्या जीएसटी बदलाव और फ्रंट लोडिंग निर्यात ने जीडीपी ग्रोथ को प्रभावित किया है? अर्थशास्त्री पंकज जायसवाल

सारांश

पंकज जायसवाल ने भारत की जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि फ्रंट लोडिंग निर्यात और जीएसटी में बदलाव ने कैसे भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है। जानिए इसके पीछे की कहानी और क्या है इसका भविष्य।

मुख्य बातें

भारत की जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत तक पहुँची।
आरबीआई की मीटिंग्स में सकारात्मक आउटलुक।
फ्रंट लोडिंग निर्यात मैन्युफैक्चरिंग में वृद्धि का कारण।
जीएसटी में कटौती का सकारात्मक प्रभाव।
वैश्विक दबावों के बीच भारत की आत्मनिर्भरता।

मुंबई, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारत की जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत तक पहुँचने पर, अर्थशास्त्री पंकज जायसवाल ने इस बात की पुष्टि की है कि यह अपेक्षित था, क्योंकि भारत की आर्थिकी लगातार मजबूत हो रही है। पिछले कुछ महीनों में आरबीआई की सभी बैठकें सकारात्मक दृष्टिकोण दर्शा रही हैं, जिसमें रेपो दर में कटौती भी शामिल है, जो आर्थिक सुधार का स्पष्ट संकेत है।

पंकज जायसवाल ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में वृद्धि दर 5.56 प्रतिशत थी, जो वर्तमान में बढ़कर 8.2 प्रतिशत तक पहुँच गई है। उन्होंने कहा कि वैश्विक दबावों और ट्रंप टैरिफ के प्रभाव के बीच, भारत ने इस तरह से उभरकर यह साबित किया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब आत्मनिर्भर हो गई है।

अमेरिकी टैरिफ का जिक्र करते हुए पंकज जायसवाल ने कहा कि लोगों को चिंता थी कि टैरिफ के कारण निर्यात प्रभावित होगा और भारत से खरीददारी कम हो सकती है, लेकिन एडवांस ऑर्डर आने शुरू हो गए, ताकि टैरिफ का प्रभाव न हो। इससे उत्पादन और निर्यात में वृद्धि हुई। इस तरह कंपनियों ने निर्यात करके पहले ही माल को खपा दिया, जो जीडीपी में जुड़ा है।

पंकज जायसवाल ने फ्रंट लोडिंग निर्यात को भी एक मुख्य कारण माना है, जिसने मैन्युफैक्चरिंग को काफी बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि डीजीपी वृद्धि दर में मैन्युफैक्चरिंग का वृद्धि दर 9.1 प्रतिशत है। सेवा क्षेत्र में गैर-आईटी क्षेत्र (फाइनेंशियल, रियल स्टेट) का भी वृद्धि दर 10 प्रतिशत से अधिक है।

उन्होंने जीडीपी वृद्धि दर में वृद्धि का एक कारण जीएसटी को भी बताया। पंकज जायसवाल ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने पहले ही कहा था कि जीएसटी में कटौती का असर तीसरी तिमाही में दिखेगा। फैक्ट्रियों का उत्पादन बढ़ा हुआ था। इसी बीच त्योहारों का सीजन आया, जिससे सभी दुकानदारों के पास सितंबर के अंत तक माल पहुँचना था। इस प्रकार फ्रंट लोडिंग घरेलू बाजार में भी हुआ।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक दबावों के बीच अपनी शक्ति दिखाई है। जीएसटी और फ्रंट लोडिंग निर्यात जैसी नीतियों ने हमारी आर्थिक स्थिरता को और मजबूत किया है। यह समय है जब हमें इन पहलुओं पर ध्यान देना चाहिए।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फ्रंट लोडिंग निर्यात क्या है?
फ्रंट लोडिंग निर्यात का अर्थ है कि कंपनियाँ अपने निर्यात को पहले ही तैयार कर लेती हैं ताकि तात्कालिक समस्याओं का सामना न करना पड़े।
जीएसटी में बदलाव का क्या असर हुआ?
जीएसटी में कटौती से उत्पादन में वृद्धि हुई और यह जीडीपी वृद्धि में योगदान दे रहा है।
भारत की जीडीपी वृद्धि दर में क्या बदलाव आया है?
भारत की जीडीपी वृद्धि दर वर्तमान में 8.2 प्रतिशत है, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में काफी अधिक है।
राष्ट्र प्रेस
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