9 जुलाई 2026
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क्या यूएस टैरिफ और एफआईआई की बिकवाली ने भारतीय शेयर बाजार को 0.9 प्रतिशत गिरने पर मजबूर किया?

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क्या यूएस टैरिफ और एफआईआई की बिकवाली ने भारतीय शेयर बाजार को 0.9 प्रतिशत गिरने पर मजबूर किया?

सारांश

इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में यूएस टैरिफ और एफआईआई की बिकवाली के चलते 0.9 प्रतिशत गिरावट आई है। सेंसेक्स 24,363 पर बंद हुआ। जानें, बाजार में क्या चल रहा है और क्या हैं इसके पीछे के कारण।

मुख्य बातें

सेंसेक्स 0.9 प्रतिशत गिरा है।
निफ्टी ने 24,363 पर बंद किया।
यूएस टैरिफ और एफआईआई बिकवाली का प्रभाव।
आरबीआई ने मुद्रास्फीति का अनुमान घटाया है।
बाजार में अस्थिरता की संभावना बनी हुई है।

मुंबई, 9 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय शेयर बाजार में यूएस टैरिफ और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) द्वारा बिकवाली के चलते इस हफ्ते गिरावट आई। इस दौरान सेंसेक्स 0.9 प्रतिशत की कमी के साथ 24,363 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी लगभग इसी स्तर पर रहा और 24,400 के महत्वपूर्ण समर्थन से नीचे फिसल गया।

मार्केट विशेषज्ञों ने शनिवार को बताया कि भारतीय इक्विटी बाजार में जुलाई की शुरुआत से चल रहा ट्रेंड एक और हफ्ते जारी रहा, और बाजार कंसोलिडेशन जोन में बंद हुआ। इसका कारण वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों की चिंता, कमजोर वैश्विक संकेत, यूएस टैरिफ, एफआईआई की बिकवाली और बाजार में लगातार प्रॉफिट बुकिंग है।

इस हफ्ते, भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने अनुकूल मानसून और बेहतर आपूर्ति का हवाला देते हुए वित्त वर्ष 26 के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान 3.7 प्रतिशत से घटाकर 3.1 प्रतिशत कर दिया।

वैश्विक व्यापार की अनिश्चितताओं के बीच तटस्थ रुख बनाए रखते हुए, केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 5.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा और वित्त वर्ष 26 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि के अनुमान को भी 6.5 प्रतिशत पर बनाए रखा।

7 अगस्त से अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर 25 प्रतिशत टैरिफ लागू किया है। हालांकि, आरबीआई गवर्नर ने कहा है कि टैरिफ का भारत की अर्थव्यवस्था पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा, "अमेरिका में टैरिफ दरों में भारी वृद्धि और कमजोर तिमाही आय की चिंताओं ने बाजार के विश्वास को कम किया है। विशेष रूप से अमेरिका में महत्वपूर्ण निवेश वाले फार्मा शेयरों में एफआईआई द्वारा लगातार बिकवाली इस सतर्क दृष्टिकोण को दर्शाती है। भारतीय रुपए का निरंतर अवमूल्यन भी निवेशकों की चिंता बढ़ा रहा है।"

नायर ने यह भी कहा कि इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, आरबीआई द्वारा व्यापक आर्थिक स्थिरता की पुष्टि, घरेलू विकास पर उसके आशावादी रुख और मुद्रास्फीति में कमी के प्रारंभिक संकेतों ने नकारात्मक जोखिम को आंशिक रूप से कम किया है।

उन्होंने आगे कहा कि बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है और निवेशक भारत और अमेरिका से आने वाले मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर ध्यान देंगे।

चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग के मंदार भोजने ने कहा, "निफ्टी ने साप्ताहिक चार्ट पर लगातार छह लाल कैंडल बनाए हैं, जो लगातार बिकवाली के दबाव का संकेत देते हैं। सूचकांक के 24,200-24,000 के समर्थन क्षेत्र के आसपास कोई भी उलटफेर खरीदारी का अवसर हो सकता है।"

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारण यूएस टैरिफ और एफआईआई की बिकवाली है।
क्या भारतीय रिजर्व बैंक का मौद्रिक नीति पर प्रभाव पड़ा है?
हाँ, RBI ने रेपो रेट को स्थिर रखा है और मुद्रास्फीति का अनुमान भी घटाया है।
क्या निवेशकों को चिंता करने की आवश्यकता है?
निवेशक सतर्क रहें, खासकर वैश्विक संकेतों को देखते हुए।
राष्ट्र प्रेस
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