चिराग पासवान का युवाओं को आह्वान: नौकरी खोजने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने 9 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के सोनीपत जिले के कुंडली स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट (निफ्टेम-के) के दीक्षांत समारोह में स्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र रोजगार सृजन, उद्यमिता और किसानों की आय बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे केवल नौकरी की तलाश न करें, बल्कि रोजगार देने वाले, नवाचारकर्ता और समस्याओं का समाधान करने वाले बनें।
मुख्य संदेश: उद्यमिता और नवाचार अपनाएँ
पासवान ने छात्रों से कहा कि पारंपरिक सोच से आगे निकलकर तकनीक, नवाचार और उद्यमिता का उपयोग करते हुए उभरती चुनौतियों के समाधान खोजे जाएँ। उन्होंने युवा नवाचारकर्ताओं को आश्वासन दिया कि सरकार इस क्षेत्र में नए विचारों और पहलों को पूरा समर्थन देगी। गौरतलब है कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में हाल के वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, लेकिन मंत्री के अनुसार इसकी पूर्ण क्षमता का अभी तक उपयोग नहीं हो पाया है।
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की अपार संभावनाएँ
मंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र एक साथ खाद्य गुणवत्ता में सुधार, मूल्य संवर्धन, किसानों के लिए आर्थिक अवसर, रोजगार सृजन और खाद्य पदार्थों की बर्बादी में कमी लाने में सक्षम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि खाद्य मूल्य श्रृंखला, प्रसंस्करण सुविधाओं और तकनीक को खेतों तथा ग्रामीण क्षेत्रों के निकट ले जाना आवश्यक है, ताकि इसके लाभ सीधे किसानों और जमीनी स्तर के उत्पादकों तक पहुँच सकें।
गुणवत्ता और 'ब्रांड इंडिया' की छवि
पासवान ने गुणवत्ता के महत्व पर विशेष जोर देते हुए कहा कि खाद्य क्षेत्र में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, किसी भारतीय उत्पाद की गुणवत्ता केवल एक कंपनी की प्रतिष्ठा को नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में 'ब्रांड इंडिया' की संपूर्ण छवि को प्रभावित करती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का विशाल कृषि आधार, विविध कृषि उत्पाद और बड़ा उपभोक्ता बाजार देश को 'वैश्विक खाद्य भंडार' बनने की क्षमता देता है।
मंत्रालय सचिव और संस्थान निदेशक के विचार
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव अविनाश जोशी ने इस क्षेत्र की व्यापक भूमिका रेखांकित करते हुए कहा कि खाद्य प्रसंस्करण न केवल बर्बादी घटाता है, बल्कि पोषण, मूल्य संवर्धन और उद्यमिता को भी प्रोत्साहित करता है। उन्होंने कुशल मानव संसाधन विकसित करने और छात्रों व शोधकर्ताओं को बड़े स्तर पर मूल्य सृजित करने वाले नवाचारों पर काम करने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता बताई।
निफ्टेम-के के निदेशक डॉ. हरिंदर सिंह ओबेराय ने बताया कि संस्थान ने शिक्षा, शोध, बुनियादी ढाँचे और उद्योगों के साथ साझेदारी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
आगे की राह
यह दीक्षांत समारोह ऐसे समय में हुआ है जब केंद्र सरकार खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को प्राथमिकता के रूप में बढ़ावा दे रही है और ग्रामीण रोजगार तथा कृषि आय बढ़ाने के लिए नई नीतिगत पहलें जारी हैं। स्नातक छात्रों के लिए पासवान का यह संदेश — कि वे नौकरी पाने की जगह नौकरी देने वाले बनें — आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में उद्यमशीलता की दिशा तय कर सकता है।