शिक्षा प्रणाली को एआई और डिजिटल अर्थव्यवस्था के अनुरूप बनाने की अपील: पीएम मोदी
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को भारत के शैक्षणिक संस्थानों से निवेदन किया कि वे अपने परिसर को उद्योग सहयोग और शोध आधारित शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करें, ताकि छात्रों को वास्तविक दुनिया का अनुभव प्राप्त हो सके।
प्रधानमंत्री ने यह बात बजट के बाद आयोजित एक वेबिनार में वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कही। इस अवसर पर उन्होंने शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता के बीच बेहतर समन्वय पर चर्चा की और एवीजीसी (एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) क्षेत्र को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि भारत तेजी से नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में बढ़ रहा है। उन्होंने इस वेबिनार में गंभीर चर्चा की आवश्यकता पर बल दिया कि कैसे शैक्षणिक संस्थानों के परिसर को उद्योग सहयोग और शोध आधारित शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।
उन्होंने संस्थानों, उद्योग और शिक्षाविदों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन चर्चाओं से भविष्य के लिए एक मज़बूत रोडमैप तैयार होगा और विकसित भारत की नींव को और मजबूती मिलेगी।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत के युवाओं की बदलती सोच इस देश की सबसे बड़ी ताकत है, और इसके अनुसार शिक्षा प्रणाली को विकसित करना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि सरकार लगातार शिक्षा को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के लिए प्रयासरत है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति (एनईपी) ऐसा आधार प्रदान करती है जिससे पाठ्यक्रम को बाजार की जरूरतों और वास्तविक अर्थव्यवस्था के अनुरूप ढाला जा सकता है। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ऑटोमेशन और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में इसकी आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली को वास्तविक दुनिया की अर्थव्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया को और तेज करना होगा।
प्रधानमंत्री ने एसटीईएम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित) क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर गर्व व्यक्त किया और कहा कि सरकार बेटियों को भविष्य की तकनीकों में समान अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है।
इसके साथ ही उन्होंने एक मज़बूत रिसर्च इकोसिस्टम बनाने की आवश्यकता बताई, जहां युवा शोधकर्ताओं को बिना किसी बाधा के नई सोच और प्रयोगों के लिए पूरे अवसर मिल सकें।
उन्होंने कहा कि हमें ऐसा वातावरण निर्मित करना होगा जहां युवा शोधकर्ता नई खोजों और विचारों पर खुलकर काम कर सकें।