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फिक्की अध्यक्ष अनंत गोयनका: बढ़ते कैपेक्स और मजबूत मांग से भारत में नया निवेश चक्र शुरू

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फिक्की अध्यक्ष अनंत गोयनका: बढ़ते कैपेक्स और मजबूत मांग से भारत में नया निवेश चक्र शुरू

सारांश

फिक्की अध्यक्ष अनंत गोयनका ने मुंबई में संकेत दिया कि भारत में एक नया कैपेक्स चक्र शुरू हो चुका है — ऑटो से लेकर मीडिया तक व्यापक वृद्धि दिख रही है। लेकिन ब्रेंट क्रूड के $100 प्रति बैरल के पार जाने से मार्जिन पर दबाव बनी एक बड़ी चुनौती है।

मुख्य बातें

फिक्की (FICCI) अध्यक्ष अनंत गोयनका ने 29 सितंबर 2026 को मुंबई में कहा कि भारत में व्यापक आधार पर आर्थिक वृद्धि जारी है।
बढ़ते क्षमता उपयोग के चलते कंपनियाँ सभी प्रमुख क्षेत्रों में पूंजीगत निवेश (कैपेक्स) बढ़ा रही हैं।
ऑटोमोबाइल सेक्टर में सबसे तेज वृद्धि; इसका सकारात्मक प्रभाव पुर्जे, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पर भी पड़ रहा है।
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $90 से बढ़कर $100 प्रति बैरल या उससे ऊपर पहुँचने से उद्योगों के लाभ मार्जिन पर दबाव है।
फिक्की फ्रेम्स अपने 26 वर्ष पूरे कर चुका है; AI और मल्टी-स्क्रीन उपभोग मीडिया उद्योग को तेजी से बदल रहे हैं।

फिक्की (FICCI) अध्यक्ष और आरपीजी ग्रुप के वाइस चेयरमैन अनंत गोयनका ने 29 सितंबर 2026 को मुंबई में कहा कि भारत में व्यापक आधार पर आर्थिक वृद्धि हो रही है और बढ़ते क्षमता उपयोग के चलते कंपनियाँ पूंजीगत निवेश (कैपेक्स) बढ़ा रही हैं। फिक्की फ्रेम्स कार्यक्रम के दौरान दिए गए वक्तव्य में उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में माँग में सुधार से कारोबारी विश्वास और मजबूत हुआ है।

व्यापक आर्थिक वृद्धि और कैपेक्स में उछाल

गोयनका ने कहा, 'हम अर्थव्यवस्था में व्यापक स्तर पर वृद्धि देख रहे हैं। क्षमता उपयोग बढ़ने के साथ विभिन्न क्षेत्रों में पूंजी निवेश भी बढ़ रहा है।' उनके अनुसार, यह एक नए निवेश चक्र की शुरुआत के संकेत हैं जो उद्योग जगत में आत्मविश्वास बढ़ा रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है।

ऑटोमोबाइल क्षेत्र में अग्रणी वृद्धि

गोयनका ने विशेष रूप से ऑटोमोबाइल क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि इस सेक्टर में अपेक्षाकृत अधिक तेज वृद्धि दर्ज की गई है। इस वृद्धि का सकारात्मक प्रभाव पूरे सप्लाई नेटवर्क और वैल्यू चेन पर पड़ रहा है — पुर्जे, कच्चा माल, लॉजिस्टिक्स और अन्य संबद्ध उद्योग सभी को लाभ मिल रहा है। गौरतलब है कि ऑटो सेक्टर भारत के विनिर्माण सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण योगदान देता है और इसका असर रोजगार पर भी सीधा पड़ता है।

मार्जिन पर दबाव और कमोडिटी कीमतों की चुनौती

हालाँकि, अनंत गोयनका ने यह भी स्पष्ट किया कि उद्योगों के सामने लाभ मार्जिन को लेकर चुनौतियाँ बनी हुई हैं। बढ़ती कमोडिटी कीमतों के कारण कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ रही है। उनके अनुसार, कंपनियाँ कुछ अतिरिक्त लागत उपभोक्ताओं तक पहुँचाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में समय लगता है और इसका पूरा असर तुरंत कीमतों में नहीं दिखता।

विशेष रूप से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में आई तेजी को उन्होंने उद्योगों के लिए चिंता का विषय बताया। उनके अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग $90 प्रति बैरल से बढ़कर $100 प्रति बैरल या उससे ऊपर पहुँच गई हैं, जिससे विभिन्न उद्योगों की लागत संरचना प्रभावित हो रही है।

मीडिया उद्योग में परिवर्तन का दौर

फिक्की फ्रेम्स के बारे में बात करते हुए गोयनका ने इसे मीडिया और मनोरंजन उद्योग का एक प्रतिष्ठित मंच बताया, जो अब अपने 26 वर्ष पूरे कर चुका है। उन्होंने कहा कि मीडिया उद्योग आज एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है — कंटेंट उपभोग के तरीके, मल्टी-स्क्रीन उपयोग, घटती ध्यान अवधि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सिंथेटिक डेटा जैसी तकनीकें उद्योग की प्रकृति को तेजी से बदल रही हैं।

उनके अनुसार, फ्रेम्स एक ऐसा मंच है जहाँ कंटेंट क्रिएटर्स, तकनीकी विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि और उपभोक्ता एक साथ आकर भविष्य की दिशा समझ सकते हैं। आगे चलकर, कमोडिटी कीमतों के स्थिर होने और कैपेक्स चक्र के परिपक्व होने पर मार्जिन दबाव में कमी आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देना जरूरी है कि भारत में पहले भी निवेश-पुनरुद्धार के ऐसे दावे हुए हैं जो वैश्विक झटकों में दम तोड़ देते हैं। ब्रेंट क्रूड का $100 प्रति बैरल पार करना केवल उद्योग का नहीं, बल्कि आम उपभोक्ता और मुद्रास्फीति का भी मसला है — जो भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की ब्याज दर नीति को भी प्रभावित कर सकता है। ऑटो सेक्टर की तेजी असली है, लेकिन यह देखना होगा कि क्या यह वृद्धि घरेलू माँग से टिकाऊ रूप से आ रही है या आयातित कमोडिटी लागत बढ़ने पर यह चक्र जल्दी थम जाएगा।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फिक्की अध्यक्ष अनंत गोयनका ने भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में क्या कहा?
अनंत गोयनका ने 29 सितंबर 2026 को मुंबई में कहा कि भारत में व्यापक आधार पर आर्थिक वृद्धि हो रही है और बढ़ते क्षमता उपयोग के चलते कंपनियाँ सभी प्रमुख क्षेत्रों में कैपेक्स बढ़ा रही हैं। उनके अनुसार माँग में सुधार से कारोबारी विश्वास मजबूत हुआ है।
भारत में नए कैपेक्स चक्र को क्या बढ़ावा दे रहा है?
फिक्की अध्यक्ष के अनुसार, बढ़ता क्षमता उपयोग और अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में माँग में सुधार कंपनियों को नए पूंजीगत निवेश के लिए प्रेरित कर रहे हैं। विशेष रूप से ऑटोमोबाइल क्षेत्र में तेज वृद्धि ने पूरी सप्लाई चेन को गति दी है।
ब्रेंट क्रूड की बढ़ती कीमतें भारतीय उद्योग को कैसे प्रभावित कर रही हैं?
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें लगभग $90 प्रति बैरल से बढ़कर $100 प्रति बैरल या उससे ऊपर पहुँच गई हैं, जिससे विभिन्न उद्योगों की परिचालन लागत बढ़ रही है। गोयनका के अनुसार, कमोडिटी कीमतों के स्थिर होने तक लाभ मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है।
फिक्की फ्रेम्स क्या है और इसका मीडिया उद्योग के लिए क्या महत्व है?
फिक्की फ्रेम्स मीडिया और मनोरंजन उद्योग का एक प्रतिष्ठित वार्षिक आयोजन है जो अब अपने 26 वर्ष पूरे कर चुका है। यह मंच कंटेंट क्रिएटर्स, तकनीकी विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों को AI, मल्टी-स्क्रीन उपभोग और सिंथेटिक डेटा जैसे बदलावों को समझने का अवसर देता है।
क्या ऑटोमोबाइल क्षेत्र की वृद्धि अन्य उद्योगों पर भी असर डाल रही है?
हाँ, अनंत गोयनका के अनुसार ऑटो सेक्टर में बढ़ती माँग का सकारात्मक प्रभाव पूरे सप्लाई नेटवर्क पर पड़ रहा है। पुर्जे, कच्चा माल, लॉजिस्टिक्स और संबद्ध उद्योगों को भी इस वृद्धि से प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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