भारत की नवाचार-आधारित विकास गाथा पर वैश्विक भरोसा बरकरार: WIPO मुख्य अर्थशास्त्री कार्स्टन फिंक
सारांश
मुख्य बातें
विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) के मुख्य अर्थशास्त्री कार्स्टन फिंक ने 23 जून 2026 को डालियान, चीन में कहा कि मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक संकट और वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल के बावजूद भारत की दीर्घकालिक आर्थिक संभावनाएँ मजबूत बनी हुई हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत का तेज़ी से पनप रहा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और ठोस आर्थिक आधार देश को भविष्य में वैश्विक विकास का प्रमुख इंजन बना सकता है।
समर दावोस में भारत पर फोकस
विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक 'न्यू चैंपियंस' बैठक — जिसे 'समर दावोस' भी कहा जाता है — के दौरान कार्स्टन फिंक ने कहा कि मध्य पूर्व संकट का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सबसे प्रत्यक्ष प्रभाव वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में सामने आया है। उन्होंने विशेष रूप से कच्चे तेल और उर्वरकों की बढ़ती कीमतों का उल्लेख किया।
फिंक ने कहा, "अल्पकाल में भारतीय अर्थव्यवस्था इस संकट से प्रभावित हुई है, क्योंकि भारत काफी हद तक तेल आयात पर निर्भर है। लेकिन भारत के नवाचार क्षेत्र में जो तेज़ी और गतिशीलता दिखाई दे रही है, वह बेहद उत्साहजनक है।"
भारत की विकास दर: मध्यम आय देशों में अलग पहचान
फिंक के अनुसार, भारत ऐसी आर्थिक विकास दर हासिल कर रहा है जो इस समय बहुत कम मध्यम आय वाले देशों में देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि देश में दीर्घकालिक नवाचार क्षमता लगातार विकसित हो रही है, जो भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में एक विशिष्ट स्थान दिलाती है। गौरतलब है कि यह वह समय है जब कई उभरती अर्थव्यवस्थाएँ ऋण संकट और मुद्रास्फीति के दबाव से जूझ रही हैं।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य और वैश्विक व्यापार पर खतरा
फिंक ने चेतावनी दी कि आने वाले महीनों में वैश्विक आर्थिक स्थिति काफी हद तक मध्य पूर्व के घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले व्यापारिक यातायात और उसका वस्तुओं की कीमतों पर पड़ने वाले प्रभाव को वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने वाला प्रमुख कारक बताया।
उन्होंने कहा, "इस झटके के बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था ने काफी हद तक लचीलापन दिखाया है।" साथ ही उन्होंने जोड़ा कि आने वाले समय में महंगाई की दिशा और विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियाँ वैश्विक अर्थव्यवस्था के अल्पकालिक और मध्यम अवधि के भविष्य को निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
नवाचार तंत्र: भारत की असली ताकत
फिंक ने तकनीकी प्रगति और नवाचार को भारत की सतत विकास की नींव बताया। उनके अनुसार, भारत में तेज़ी से विकसित हो रहा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र देश को वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखता है।
उन्होंने कहा, "अल्पकाल में भारतीय अर्थव्यवस्था निश्चित रूप से कुछ चुनौतियों का सामना कर रही है, लेकिन दीर्घकाल में भारत को लेकर आशावादी होने के कई मजबूत कारण मौजूद हैं।" मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच WIPO जैसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्था का यह आकलन भारत की आर्थिक कहानी को वैश्विक मंच पर और मजबूती से स्थापित करता है।