वित्त वर्ष 2026 के जीडीपी आंकड़े आज, अर्थशास्त्रियों का अनुमान 7.4% वृद्धि दर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार शुक्रवार, 6 जून 2025 को वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही (Q4) के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े और पूरे वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि दर सार्वजनिक करेगी। अर्थशास्त्रियों के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं और बाहरी जोखिमों के चलते वृद्धि दर दूसरे अग्रिम अनुमान (SAE) से लगभग 0.20 प्रतिशत कम रहकर 7.4% के आसपास आ सकती है।
नया आधार वर्ष और सांख्यिकीय संशोधन
इस बार पूरे वित्त वर्ष के जीडीपी आंकड़े 2022-23 को नया आधार वर्ष मानकर जारी किए जाएंगे। राष्ट्रीय आय की गणना में यह एक महत्वपूर्ण सांख्यिकीय बदलाव है, जो विभिन्न क्षेत्रों की वृद्धि की तुलना को अधिक सटीक बनाएगा। गौरतलब है कि सरकार ने इससे पहले जीडीपी अनुमान जारी करने की तिथि को मई के अंतिम कार्य दिवस से बदलकर 7 जून (या उससे पहले का कार्य दिवस) कर दिया था।
मुख्य आर्थिक संकेतक
दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) — जो जीडीपी में 55-56% का सबसे बड़ा हिस्सा रखता है — वित्त वर्ष 2025-26 में 8.9% की दर से बढ़ने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 9.7% था। सकल स्थिर पूंजी निर्माण (GFCF) अर्थात निवेश गतिविधियाँ 7.1% बढ़ने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 6.4% से बेहतर है। सरकारी अंतिम उपभोग व्यय (GFCE) 9.6% बढ़ सकता है, हालाँकि यह पिछले वित्त वर्ष के स्तर से कुछ कम रहेगा।
सकल मूल्य वर्धन (GVA), जो विभिन्न क्षेत्रों के उत्पादन को दर्शाता है, वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7% की दर से बढ़ने का अनुमान है — एक वर्ष पूर्व यह 7.3% था।
आरबीआई का अनुमान और प्रमुख जोखिम
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अगले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.9% रहने का अनुमान लगाया है। वहीं, अर्थशास्त्रियों ने कच्चे तेल की ऊँची कीमतों और कमजोर मानसून की आशंका को अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख जोखिम बताया है। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा लागत का दबाव भी घरेलू माँग और निवेश पर असर डाल सकता है।
आंकड़ों का महत्व
जीडीपी किसी देश में एक निश्चित अवधि में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य का संकेतक है। यह राजकोषीय नीति, मौद्रिक नीति और निवेश संबंधी निर्णयों का आधार बनता है। नीति निर्माताओं, बाज़ार विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों की इन आंकड़ों पर विशेष नज़र रहेगी, क्योंकि इससे यह स्पष्ट होगा कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने घरेलू माँग, निवेश और वैश्विक चुनौतियों का किस तरह सामना किया।
आगे की राह
ये आंकड़े चालू वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि के लिए भी दिशा-संकेत देंगे। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर मंदी की आशंकाएँ और व्यापार अनिश्चितताएँ बनी हुई हैं। आने वाले हफ्तों में RBI और वित्त मंत्रालय की नीतिगत प्रतिक्रिया इन्हीं आंकड़ों के इर्द-गिर्द तय होगी।