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वित्त वर्ष 2026 के जीडीपी आंकड़े आज, अर्थशास्त्रियों का अनुमान 7.4% वृद्धि दर

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वित्त वर्ष 2026 के जीडीपी आंकड़े आज, अर्थशास्त्रियों का अनुमान 7.4% वृद्धि दर

सारांश

आज जारी होने वाले वित्त वर्ष 2025-26 के जीडीपी आंकड़े भारत की आर्थिक सेहत की असली तस्वीर पेश करेंगे। अर्थशास्त्रियों का अनुमान 7.4% वृद्धि दर है — SAE से थोड़ा कम। नया आधार वर्ष 2022-23 और कच्चे तेल व मानसून के जोखिम इस बार के आंकड़ों को खास बनाते हैं।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार 6 जून 2025 को वित्त वर्ष 2025-26 की Q4 और पूरे वर्ष के जीडीपी आंकड़े जारी करेगी।
अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि वार्षिक वृद्धि दर 7.4% रहेगी, जो SAE से 0.20% कम है।
इस बार आंकड़े 2022-23 को नए आधार वर्ष के रूप में अपनाकर जारी किए जाएंगे।
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.9% रहने का अनुमान लगाया है।
कच्चे तेल की ऊँची कीमतें और कमजोर मानसून की आशंका प्रमुख जोखिम बताए गए हैं।
PFCE 8.9%, GFCF 7.1% और GVA 7.7% की वृद्धि का अनुमान है।

केंद्र सरकार शुक्रवार, 6 जून 2025 को वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही (Q4) के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े और पूरे वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि दर सार्वजनिक करेगी। अर्थशास्त्रियों के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं और बाहरी जोखिमों के चलते वृद्धि दर दूसरे अग्रिम अनुमान (SAE) से लगभग 0.20 प्रतिशत कम रहकर 7.4% के आसपास आ सकती है।

नया आधार वर्ष और सांख्यिकीय संशोधन

इस बार पूरे वित्त वर्ष के जीडीपी आंकड़े 2022-23 को नया आधार वर्ष मानकर जारी किए जाएंगे। राष्ट्रीय आय की गणना में यह एक महत्वपूर्ण सांख्यिकीय बदलाव है, जो विभिन्न क्षेत्रों की वृद्धि की तुलना को अधिक सटीक बनाएगा। गौरतलब है कि सरकार ने इससे पहले जीडीपी अनुमान जारी करने की तिथि को मई के अंतिम कार्य दिवस से बदलकर 7 जून (या उससे पहले का कार्य दिवस) कर दिया था।

मुख्य आर्थिक संकेतक

दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) — जो जीडीपी में 55-56% का सबसे बड़ा हिस्सा रखता है — वित्त वर्ष 2025-26 में 8.9% की दर से बढ़ने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 9.7% था। सकल स्थिर पूंजी निर्माण (GFCF) अर्थात निवेश गतिविधियाँ 7.1% बढ़ने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 6.4% से बेहतर है। सरकारी अंतिम उपभोग व्यय (GFCE) 9.6% बढ़ सकता है, हालाँकि यह पिछले वित्त वर्ष के स्तर से कुछ कम रहेगा।

सकल मूल्य वर्धन (GVA), जो विभिन्न क्षेत्रों के उत्पादन को दर्शाता है, वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7% की दर से बढ़ने का अनुमान है — एक वर्ष पूर्व यह 7.3% था।

आरबीआई का अनुमान और प्रमुख जोखिम

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अगले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.9% रहने का अनुमान लगाया है। वहीं, अर्थशास्त्रियों ने कच्चे तेल की ऊँची कीमतों और कमजोर मानसून की आशंका को अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख जोखिम बताया है। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा लागत का दबाव भी घरेलू माँग और निवेश पर असर डाल सकता है।

आंकड़ों का महत्व

जीडीपी किसी देश में एक निश्चित अवधि में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य का संकेतक है। यह राजकोषीय नीति, मौद्रिक नीति और निवेश संबंधी निर्णयों का आधार बनता है। नीति निर्माताओं, बाज़ार विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों की इन आंकड़ों पर विशेष नज़र रहेगी, क्योंकि इससे यह स्पष्ट होगा कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने घरेलू माँग, निवेश और वैश्विक चुनौतियों का किस तरह सामना किया।

आगे की राह

ये आंकड़े चालू वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि के लिए भी दिशा-संकेत देंगे। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर मंदी की आशंकाएँ और व्यापार अनिश्चितताएँ बनी हुई हैं। आने वाले हफ्तों में RBI और वित्त मंत्रालय की नीतिगत प्रतिक्रिया इन्हीं आंकड़ों के इर्द-गिर्द तय होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन SAE से 0.20% की गिरावट यह संकेत देती है कि वैश्विक दबाव घरेलू गति को धीमा कर रहे हैं। असली चिंता यह है कि PFCE वृद्धि 9.7% से घटकर 8.9% पर आ गई है — यानी आम उपभोक्ता की क्रय शक्ति पर दबाव बढ़ रहा है। नया आधार वर्ष 2022-23 तुलनात्मक संख्याओं को बदल देगा, जिससे पिछले वर्षों की वृद्धि दर का पुनर्मूल्यांकन होगा — और इसे राजनीतिक व नीतिगत दोनों नज़रियों से ध्यान से पढ़ा जाना चाहिए। कच्चे तेल और मानसून के दोहरे जोखिम के बीच RBI का 6.9% का अगले वर्ष का अनुमान बताता है कि नरमी की यह प्रवृत्ति अल्पकालिक नहीं है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वित्त वर्ष 2025-26 के जीडीपी आंकड़े कब और कहाँ जारी होंगे?
केंद्र सरकार 6 जून 2025 को वित्त वर्ष 2025-26 की Q4 (जनवरी-मार्च) और पूरे वर्ष के जीडीपी आंकड़े जारी करेगी। सरकार ने इस तिथि को पहले मई के अंतिम कार्य दिवस से बदलकर 7 जून (या उससे पहले का कार्य दिवस) कर दिया था।
वित्त वर्ष 2026 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर कितनी रहने का अनुमान है?
अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर लगभग 7.4% रहेगी, जो दूसरे अग्रिम अनुमान (SAE) से करीब 0.20% कम है। वैश्विक अनिश्चितताओं और बाहरी जोखिमों को इस मामूली गिरावट का कारण बताया जा रहा है।
जीडीपी गणना में नया आधार वर्ष 2022-23 क्यों अपनाया जा रहा है?
राष्ट्रीय आय की गणना को अधिक सटीक और समकालीन बनाने के लिए आधार वर्ष को 2022-23 किया जा रहा है। यह एक महत्वपूर्ण सांख्यिकीय संशोधन है जो विभिन्न क्षेत्रों की वृद्धि दर की तुलना को बेहतर ढंग से दर्शाएगा।
RBI ने अगले वित्त वर्ष के लिए क्या अनुमान दिया है?
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.9% रहने का अनुमान लगाया है। यह वित्त वर्ष 2025-26 के अनुमानित 7.4% से कम है, जो आर्थिक गति में क्रमिक नरमी का संकेत देता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख जोखिम कौन से हैं?
अर्थशास्त्रियों ने कच्चे तेल की ऊँची कीमतों और कमजोर मानसून की आशंका को प्रमुख जोखिम बताया है। इसके अलावा, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार अनिश्चितताएँ भी घरेलू माँग और निवेश गतिविधियों पर दबाव डाल सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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