14 अक्टूबर 2026
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गौतम अदाणी ने माइकल ब्लूमबर्ग से मुलाकात के बाद कहा: राष्ट्र निर्माण के लिए पूंजी, सुशासन और क्रियान्वयन अनिवार्य

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गौतम अदाणी ने माइकल ब्लूमबर्ग से मुलाकात के बाद कहा: राष्ट्र निर्माण के लिए पूंजी, सुशासन और क्रियान्वयन अनिवार्य

सारांश

गौतम अदाणी ने नई दिल्ली में माइकल ब्लूमबर्ग से मुलाकात के बाद लिंक्डइन पर लिखा कि राष्ट्र निर्माण के लिए दृश्य और अदृश्य — दोनों बुनियादी ढाँचे अनिवार्य हैं। धारावी से लेकर डीकार्बोनाइजेशन तक, उन्होंने स्पष्ट किया कि हरित बदलाव तभी टिकाऊ है जब वह आम नागरिक के लिए व्यवहारिक हो।

मुख्य बातें

गौतम अदाणी ने 14 अक्टूबर 2026 को लिंक्डइन पर ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम, नई दिल्ली में माइकल ब्लूमबर्ग से हुई मुलाकात के बाद विचार साझा किए।
अदाणी के अनुसार देश को टिकाऊ बनाने के लिए दृश्य बुनियादी ढाँचे (बंदरगाह, ग्रीन हाइड्रोजन, कंप्यूटिंग क्लस्टर) के साथ-साथ अदृश्य ढाँचे (विश्वसनीय डेटा, जवाबदेह संस्थाएँ, कार्यशील शासन) की समान रूप से ज़रूरत है।
उन्होंने कहा कि डीकार्बोनाइजेशन आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ नहीं बन सकता और हरित ऊर्जा को गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में व्यवहारिक होना होगा।
धारावी पुनर्विकास पर अदाणी ने कहा कि इसे रियल एस्टेट नहीं, बल्कि जलवायु-अनुकूल आवास, स्वच्छता, बिजली और आजीविका के सुधार के पैमाने पर परखा जाना चाहिए।
राष्ट्र निर्माण के लिए अदाणी ने चार अनिवार्य शक्तियाँ बताईं: धैर्यपूर्ण पूंजी, भौतिक क्रियान्वयन, पारदर्शी शासन और सक्षम स्थानीय नेतृत्व।
माइकल ब्लूमबर्ग 30 वर्षों से भारत में सक्रिय हैं और करीब दो दशकों से परोपकारी साझेदारी के ज़रिए जुड़े हैं।

अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने 14 अक्टूबर 2026 को लिंक्डइन पर एक विस्तृत पोस्ट में कहा कि किसी भी राष्ट्र के दीर्घकालिक विकास के लिए धैर्यपूर्ण पूंजी, भौतिक क्रियान्वयन, पारदर्शी शासन और सक्षम स्थानीय नेतृत्व — ये चार शक्तियाँ अपरिहार्य हैं। यह पोस्ट उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम के दौरान माइकल ब्लूमबर्ग के साथ हुई मुलाकात के बाद लिखी।

मुलाकात की पृष्ठभूमि

अदाणी ने बताया कि ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम में माइकल ब्लूमबर्ग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), उन्नत विनिर्माण और हरित बुनियादी ढाँचे में भारत की प्रगति पर पूरे विश्वास के साथ बात की। गौतम अदाणी के अनुसार यह भाषण मंच के लिए तैयार किया गया वक्तव्य नहीं था, बल्कि ब्लूमबर्ग पिछले 30 वर्षों से भारत में सक्रिय हैं और लगभग दो दशकों से परोपकारी साझेदारी के माध्यम से भी देश से जुड़े हुए हैं।

दृश्य और अदृश्य बुनियादी ढाँचे का महत्व

अदाणी ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया कि किसी भी देश को टिकाऊ बनाने के लिए दो प्रकार के बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता होती है। पहला — दृश्य ढाँचा, जिसमें बंदरगाह, ट्रांसमिशन कॉरिडोर, ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र, गीगावाट स्तर के कंप्यूटिंग क्लस्टर और ट्रांजिट सिस्टम शामिल हैं। दूसरा — अदृश्य ढाँचा, जो विश्वसनीय डेटा, जवाबदेह संस्थानों और ऐसी शासन व्यवस्था पर आधारित है जिसे केवल घोषणाओं का मंच नहीं, बल्कि एक कार्यशील अनुशासन माना जाए। उनके अनुसार यह दूसरा ढाँचा ही पहले को सक्षम बनाता है।

डीकार्बोनाइजेशन पर साझा और भिन्न दृष्टिकोण

अदाणी ने माना कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकसित पूंजी बाज़ारों की प्राथमिकताएँ अलग होती हैं। उन्होंने कहा कि एक उभरती अर्थव्यवस्था के लिए करोड़ों लोगों को आर्थिक सुरक्षा देने हेतु बिना देरी के बिजली, औद्योगिक क्षमता और डिजिटल पहुँच उपलब्ध कराना तात्कालिक प्राथमिकता है, जबकि विकसित बाज़ारों में डीकार्बोनाइजेशन की गति और नियामकीय सामंजस्य पर ध्यान अधिक रहता है।

अदाणी ने यह भी स्पष्ट किया, 'डीकार्बोनाइजेशन एक वैचारिक आदेश नहीं बन सकता, जो आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ डाले, कारखानों को बंद कर दे या वैश्विक दक्षिण की प्रगति को रोक दे। यदि हरित ऊर्जा गुजरात के किसी छोटे कारोबारी या उत्तर प्रदेश के किसी परिवार के लिए विश्वसनीय और व्यवहारिक नहीं है, तो यह बदलाव अपने ही बोझ तले दब जाएगा।' इसके साथ ही उन्होंने जोड़ा कि पुरानी प्रणालियों से चिपके रहना भी जलवायु अस्थिरता को नज़रअंदाज़ करना है।

धारावी पुनर्विकास — शहरी नवीकरण का मानक

इस मुलाकात में मुंबई के धारावी पुनर्विकास परियोजना पर भी चर्चा हुई, जिसे अदाणी ने सामूहिक क्षमता की परीक्षा बताया। उन्होंने कहा कि धारावी को केवल एक रियल एस्टेट परियोजना के रूप में नहीं देखा जा सकता — यह सूक्ष्म उद्यमियों, कई पीढ़ियों से रह रहे परिवारों और मानवीय संघर्षों का एक जीवंत और आत्मनिर्भर इकोसिस्टम है। अदाणी के अनुसार इसके पुनर्विकास की सफलता का आकलन जलवायु के अनुकूल आवास, आधुनिक स्वच्छता, भरोसेमंद बिजली और सुरक्षित आजीविका से आने वाले वास्तविक जीवन-सुधार के आधार पर होना चाहिए, न कि केवल निर्मित क्षेत्रफल से।

गौरतलब है कि न्यूयॉर्क के पूर्व महापौर रहे माइकल ब्लूमबर्ग के कार्यकाल में नगर प्रशासन के डेटा और सख्त क्रियान्वयन ने घनी आबादी वाले शहरी समुदायों की सेवा में कैसे काम किया — इसे अदाणी ने धारावी के संदर्भ में प्रासंगिक बताया।

नेतृत्व की परिभाषा और आगे की राह

अदाणी ने अपनी पोस्ट का समापन करते हुए कहा, 'नेतृत्व का माप आज की उपलब्धियों से नहीं, बल्कि भविष्य में मानवता की क्षमताओं को और अधिक विस्तारित करने की प्रतिबद्धता से होता है।' उन्होंने माइकल ब्लूमबर्ग को इस सोच का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण बताया। यह चर्चा ऐसे समय में आई है जब भारत वैश्विक निवेशकों और नीति निर्माताओं के बीच हरित ऊर्जा और शहरी बुनियादी ढाँचे में अपनी स्थिति मज़बूत करने में जुटा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए 'पारदर्शी शासन' की पैरोकारी को व्यापक संदर्भ में परखा जाना चाहिए। धारावी परियोजना पर उनका दृष्टिकोण महत्वाकांक्षी है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस बात को नज़रअंदाज़ कर देती है कि इस परियोजना पर स्थानीय समुदायों की सहमति और पुनर्वास की शर्तें अभी भी विवाद का विषय हैं।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गौतम अदाणी ने ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम में क्या कहा?
अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम में माइकल ब्लूमबर्ग से मुलाकात के बाद लिंक्डइन पर विस्तृत विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि टिकाऊ राष्ट्र निर्माण के लिए दृश्य और अदृश्य दोनों बुनियादी ढाँचों के साथ-साथ धैर्यपूर्ण पूंजी, क्रियान्वयन, पारदर्शी शासन और स्थानीय नेतृत्व अनिवार्य हैं।
अदाणी के अनुसार 'अदृश्य बुनियादी ढाँचा' क्या है?
अदाणी के अनुसार अदृश्य बुनियादी ढाँचे में विश्वसनीय डेटा, जवाबदेह संस्थाएँ और ऐसी शासन व्यवस्था शामिल है जो केवल घोषणाओं का मंच नहीं बल्कि एक कार्यशील अनुशासन हो। उनका मानना है कि यही ढाँचा बंदरगाहों, ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्रों और कंप्यूटिंग क्लस्टर जैसे दृश्य ढाँचे को सक्षम और प्रभावी बनाता है।
अदाणी ने डीकार्बोनाइजेशन पर क्या रुख अपनाया?
गौतम अदाणी ने कहा कि डीकार्बोनाइजेशन एक वैचारिक आदेश नहीं बन सकता जो आम नागरिकों पर बोझ डाले या वैश्विक दक्षिण की प्रगति को रोके। साथ ही उन्होंने पुरानी प्रणालियों से चिपके रहने को भी जलवायु अस्थिरता को नज़रअंदाज़ करना बताया और कहा कि हरित ऊर्जा को सबसे सस्ता व व्यवहारिक विकल्प बनाने के लिए पूंजी, नीति और क्रियान्वयन को मिलकर काम करना होगा।
धारावी पुनर्विकास पर अदाणी और ब्लूमबर्ग के बीच क्या चर्चा हुई?
अदाणी ने बताया कि माइकल ब्लूमबर्ग के साथ मुंबई की धारावी पुनर्विकास परियोजना पर भी चर्चा हुई। उन्होंने इसे रियल एस्टेट नहीं, बल्कि सूक्ष्म उद्यमियों और कई पीढ़ियों के परिवारों का जीवंत इकोसिस्टम बताया और कहा कि इसकी सफलता जलवायु-अनुकूल आवास, स्वच्छता, बिजली और सुरक्षित आजीविका से मापी जानी चाहिए।
माइकल ब्लूमबर्ग का भारत से क्या संबंध है?
गौतम अदाणी के अनुसार माइकल ब्लूमबर्ग पिछले 30 वर्षों से भारत में सक्रिय हैं और करीब दो दशकों से परोपकारी साझेदारी के माध्यम से भी देश से जुड़े हुए हैं। ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम में उन्होंने AI, उन्नत विनिर्माण और हरित बुनियादी ढाँचे में भारत की प्रगति पर विश्वास व्यक्त किया।
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